रविवार, 16 नवंबर 2008

तमन्ना

तमन्नाए अब ख़तम हो गई ,
अहसास अब मर गए ,
जीते है सिर्फ़ उस बेवफा की याद मे ,
जो हमारे न हो किसी और के हो गए .........................

2 टिप्‍पणियां:

  1. दीवाने जी आपकी कविता मैं दर्द की गहराई है लगता है कोई आपको बहुत सताई है
    समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर दस्तक दे

    उत्तर देंहटाएं