रविवार, 23 नवंबर 2008

बेवफाई

फिर तेरी याद चली आई ,
सीने मे धुआ सा उठा लाई ,
सुनी सुनी राहों पर अकेला चलने की मजबूरी ,
प्यार क्यो किया मैंने तुम्हे इतना ,
ख़ुद ही तुम्हरी बेवाफ़ई मे जल गया इतना ,
न कभी अब किसी को चाहेगे इतना ,
दर्द - ऐ - दिल दिया है तुमने इतना ,
उसे ही उठाए सीने पर ,सारी जिन्दगी घुमेगे न जाने कितना ..............

1 टिप्पणी:

  1. लगता है चोट गहरी है ! पर उठो दोस्त , अभी सारी दुनिया है ! बहुत शुभकामनाएं !

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