बुधवार, 31 दिसंबर 2008

पहचानो मै कोन हु , इनाम मिले गा , जितने वाले को नव वर्ष मे हँसते हँसते प्रवेश मिलेगा


नया साल आने वाला है ,
मै वही जा रहा हु ,
आप सब भी साथ आ जाओ ,,
यारो मिल कर बोलते है ,
नव वर्ष सभी के लिए शुभ हो

मंगलवार, 30 दिसंबर 2008

ये समर्पित है मेरी महबूबा के पिताश्री के लिए

दिल का दर्द दिल तोड़ने वाला क्या जाने ,

प्यार के रिवाजो को जमाना क्या जाने ,

होती है कितनी तकलीफ लड़की पटाने मे ,

ये लड़की का बाप क्या जाने ...................

मुझसे किसी बात पर नाराज न होना ,
तुम अपनी ये प्यारी सी मुस्कान कभी न खोना ,
सुकून मिलता है इस दिल को ,
देख कर तुम्हरी ये प्यारी सी मुस्कान ,
अगर मौत भी आ जाए हमे ,
तो मेरी जान तुम उदास मत होना
अपने हिस्से की जिन्दगी तो हम जी चुके ,
अब तो बस धडकनों का लिहाज करते है ,
क्या कहे दुनिया वालो को जो ,
आखरी सास पर भी एतराज करते है,
कोई उन्हें भी तो बता दो ,
जिनके लिए ये दिल धड़कता है ,
और हर धड़कन के बाद उनको याद करता है ,
गुनाह है अगर आप की नजर मे ये ,
तो हमे जो सजा चाहे दे दो ,
नही तो कोई हमे भी हमारे महबूब से मिला दो ...........
मेरे प्यारे दोस्तों आप सब ने जो कुछ मेरे दिल मे जो था उस को पढ़ लिया , पर कोई भी टिप्पणी नही दी ,क्यो ? क्या मेरे दिल की बात इस लायक भी नही की मै उन को आप को बताऊ , क्या मे आगे लिखता रहू या नही , ये आप सब का प्यार ही है की मै चिठा जगत के सक्रियता क्रमांक 5421 से 194 par १ महीने मे ही आ गया , कोई नाराजगी है तो बताना ..... आपका नया नया सा दोस्त अमित
ज़माने को दिखलाने के लिए मुस्कराता रहा वो ,
तेरी बेवफाई के दर्द को चुपचाप सीने मे अपने ,
दफनाता रहा वो ............................
आया ही था ख्याल उन का ,
और आँखे छलक उठी ,
न जाने ये आंसू किसी की याद के कितने करीब थे ...........
तेरे इंतजार की उम्मीद ही तो थी ,
जो अभी तक उस की सास की डोरी बंधी रही ,
उसकी वफ़ा तो देखती ओ बेवफा ,
आखरी साँस तक तेरा इंतजार करती रही ..........

रविवार, 28 दिसंबर 2008

इस जिन्दगी को लेकर हम क्या करे ,

हमको समझ न आया कुछ फ़ैसला आप करे ,

ये सोचते है छोड़ दे इस जिन्दगी का साथ ,

कब तक हम दर्द -ऐ - जिन्दगी की दवा करे ........................तुम्हारी बहूत याद आती है

जिन्दगी की राह मे आगे चल हर पल ,
मुड़ के न देख बीते हुए पल ,
जो नही था तेरा ,
तुजे नही मिला ,
जो मिल गया ,
उस के साथ गुजर अपना हर पल.........
आज तेरी याद आई तो आंसू निकल आए ,
दिल आज भी ये सोचता है तुम क्यो न मेरी जिन्दगी मे आए .....
जब गम का प्याला भर गया ,
छलकने को हो गया तैयार ,
सारी आप बीती बताने को हो गया दिल बेकरार ,
हम आईने के सामने आ जाते है ,
और सारा हाल -ए -दिल सुनाते है ,
फ़िर चुपचाप अपने ताबूत मे सो जाते है....

शुक्रवार, 26 दिसंबर 2008

सोचा नही अच्हा बुरा ,
देखा सुना कुछ भी नही ,
मागा खुदा से रात दिन ,
तेरे सिवा कुछ नही ,
तेरे सिवा कुछ नही, कुछ नही ,कुछ नही
मौत जब सामने आती है तो जी लेता हु ,
जख्म जब मुह खोलने लगते है तो सी लेता हु ,
मुझको मालूम है तेरी जुदाई की हकीकत लेकिन ,
होश जब हद से ज्यादा आता है तो फ़िर तेरे तस्वीर के आगे रो लेता हु *********
बाग़ मे एक फूल खिला था ,
न जाने किस ने तोड़ दिया ,
तुम भी न जाने कैसी इतनी बेवफा हो गई ,
की हम से मिलना छोड़ दिया ******

ताजमहल

यार प्यार हमको भी करना था ,
लेकिन बात कुछ खाश नही हुई ,
ताजमहल मुझे भी बनवाना था ,
लेकिन ......लेकिन लोन पास हुआ नही

आरजू

आरजू नही है हमारी ,
की किसी को रुलाये हम ,
बस इतना ही जिन्दगी मे काफी है ,
किसी को कभी ,
किसी पल याद आए हम ........
उसने अपना बना कर हमे छोड़ दिया ,
रिश्ता गैरों से बना लिया ,
हम कभी एक फूल भी न तोड़ पाए ,
उसने तो हमारा दिल ही तोड़ दिया .......
इंकार के डर से कभी इज़हार न कर सके ,
यारो जिन्दगी मे हम कभी प्यार न कर सके

गुरुवार, 25 दिसंबर 2008

मायूस मुस्कान के पीछे ,
गम के बादल है अब ,
तुम्हे क्या बताय ,
की तुम बिन कितने अकेले है अब ,
तुम अब फ़िर से आ जाओ ,
वरना हम जी न सकेगे अब .........
इंसानों के कंधो पर इन्सान जा रहे थे ,
कफनो मे लिपटे कुछ अरमान जा रहे थे ,
जिन्हें मिली थी बेवफाई मोहबत मे ,
वफ़ा की तलाश मे कब्रिस्तान जा रहे थे ..

सोमवार, 22 दिसंबर 2008

मुझे सुलाने के लिए जब रात आती है ,
मै सो नही पाता ,
रात ख़ुद सो जाती है ,
पूछने पर दिल से ,
ये आवाज आती है ,
आज भी याद कर लो ,
रात तो रोज आती जाती है ,,,,,,,,,

रविवार, 21 दिसंबर 2008

यु पलक बिछा कर तेरा इंतजार करते है ,
ये वो गुनाह है जो हम बार बार करते है ,
जलाकर हसरते तेरे मिलने की राह पर ,
हम सुबह और शाम तेरा इंतजार करते है

शनिवार, 20 दिसंबर 2008

आसू की गर्मी की आहट नही होती ,
दिल के टूटने की आवाज नही होती ,
अगर होता खुदा को अहसाश दर्द का ,
तो उसे दर्द देने की आदत न होती .......
वो नदिया नही आशु थे मेरे,
जिन पर वो कश्ती चलाते रहे ,
मंजिल मिले उन्हें ये चाहत थी मेरी ,
इसलिए हम आसू बहाते रहे ....
....

आओ यारो मिलकर प्यार की बरसात करे ,

टूटे है तुम्हरे दिल तो क्या ,

आओ मिल कर मुलाकात करे ,

बेवफा है ये सारी लड़किया ,

आओ मिल कर इनकी बेवाफियो को ,

बातो मे भुला दे ,

दर्द मेरे सीने मे भी है ,

दर्द तुम्हरे सीने मे भी भरा है ,

आओ मिल कर उस दर्द को हवा मै उडा दे

..........................अमित

शुक्रवार, 19 दिसंबर 2008

चाँद ना ला पायेगे ,
सितारे न तोड़ पायेगे ,
ज़माने को न जला सके ,
हवाओ का रुख ना मोड़ सके ,
अरे मेरे प्यारे से यार ,
तेरी जुदाई के बाद हम जिन्दा ही ना रह पाये।
............................अमित
पागलपन ---------------- जब आदमी इस समाज से जयादा समझ दार हो जाए और समाज की हर चालाकी को समझता जाए तो समाज उसे पागल घोषित कर देता है / आओ आप को एक भूले हुए पागल से मिलाय / जिसे आप पढ़ रहे है उस पागल को पागलखाने का रास्ता दिखाए /आज उसे समझ आया ....अपनों का दबाव, जिसने उस की जिन्दगी को बिखरा दिया ,सब का अपना अपना मतलब था ,अपनी अपनी खवाइश ..................................
दिल का दर्द जब कागजो पर आता है ,
तो आसू भी दरिया बन जाते है ,
दिल टूटने की आवाज भी नही आती,
और सारा दर्द गजल बन जाता है
..................................अमित

रविवार, 14 दिसंबर 2008

मायूसी

आज फ़िर मायूसी का ,
एक और मंजर देखा मैने,
हर मंजर की तरह इसे भी अपने मे छुपा लिया ,
टुटा बहुत मे अन्दर से ,
फ़िर भी तेरी यादो के ख़ुद को बचा लिया ......................................अमित

मंगलवार, 9 दिसंबर 2008

मै आज अकेला हु

आज मे बहुत अकेलापन महसूस कर हु ,किसी भी चीज मे मन ही नही लग रहा है ,जिन्दगी बिल्कुल निर्थक लग रही है , १३ साल से लगातार सिर्फ़ कमा ही रहा हु , किसी भी तरह का जिन्दगी मे कोई मौज मस्ती ही नही है ,सिर्फ़ सूबह ८ बजे उठो , आधे घंटे मे तैयार हो कर सीधे दुकान पर जाना, सब लोगो से बिना मन के हस हस कर बात करना , सब की प्रॉब्लम सुनते रहना , पर किसी को अपने मन की बात न बोल पाना ,रात को १० बजे तक काम करना , फिर घर पर जा का सो जाना ,अकेलेपन मे लिपटे हुई ये जिन्दगी मे अब छोड़ना चाहता हू/ मेरे लिए अकेलापन ......................................................जिन्दगी मे एक मोड़ जहा याद नही करते और किसी की की याद अकेला छोड़ जाती है /जब कोई हमसफ़र न हो ,जीना , जीने की चाहत के बिना हो हर वक्त आखो मे नींद हो पर कभी नींद न आए , जिन्दगी जीने मे कोई मजा ही न रहे ओर मरने मे भी कोई सकूँ न दिखे / हर वक्त दोराहे पर खड़ा रहे , न जिन्दा न मुर्दा बस आई सी ऊ मे पड़ा हुआ वो मरीज जिस की ससे चल रही है और दिल धडकना छोड़ना चाहे पर आखे किसी से मिलना चाहे

दर्द

पक्षियो को रोते देखा न होगा कभी ,
शिलाओ को आसुओ से भीगा न देखा होगा कभी ,
देखा तो बहुत कुछ न होगा कभी ,
आहो से भरी उस राह को देखा न होगा कभी ,
उस राह पर कभी जाना भी नही ,
ऐ - मेरे दोस्त ,
उस राह पर दर्द है कितना देखा भी न होगा कभी,
......................अमित

सोमवार, 8 दिसंबर 2008

याद

हर याद ,
हर धड़कन,
पूछते है एक दूसरे से ,
कब तू जायगी ,
जवाब दिया बेचारे दिल ने ,
जब तक धड़कन रहेगी इस दिल मे ,
तेरी याद आती रहेगी .............................अमित

रविवार, 7 दिसंबर 2008

जरूरत

अब मौत की जरूरत महसूस होती है ,
जिन्दगी अब एक बोझ महसूस होती है ,
अकेले इस दुनिया मे रहने की कब तक हिम्मत रहेगी ,
अगर तुम अब भी न मिली ,
जीने की जरूरत ही न रहेगी ................................अमित

बिखरा

न जाने वो कोन सा पल होगा ,
खुशी के कुछ पल हम भी पायगे ,
बिखर चुका है इतना कुछ जिन्दगी का ,
क्या कुछ कतरे उसके समेटे पायेगे ..................

बुधवार, 3 दिसंबर 2008

अकेलापन

अकलेपन का सुकून तुम क्या जानो ,
दर्द नजर आता था जो चहेरे पर भरी महफिल मे ,
अकलेपन मै ख़ुद में छुपा लो ,
टूट कर बिखर गया हो मन की तरंग ,
अकेलेपन मै सारे टुकड़े जमा कर लो ,
जहर मिला हो दिलनशी की जुदाई का ,
या जहर मिला हो खुशियो की विदाई का ,
अकेलेपन मै ख़ुद को अकेले पिला लो ,
हर पल का तनाव हर पल की तन्हाई ,
बेबस हो चुकी जिन्दगी की वो परछाई ,
अकलेपन मै ही हमने अपने दिल मै दफनाई ,
अकेलपन का सुकून तूम क्या जानो ............................................

दोस्ती

प्यार दोस्ती है ,
और दोस्ती प्यार ,
किसी फ़िल्म के इसी डाय्लोग ही तो हमे मारा है यार ............................

दिल तो पागल है

आपकी यादो का ही तो सहारा है ,
वरना हम तो तनहा रह जाते ,
शुक्रिया आप का जो आपने ये हमे दी ,
वरना हम तो कब के मर जाते ,
न जाने कब से इंतजार कर रही है मेरी निगाहे ,
दिल तो पागल है मेरा ,
जो हर वक्त देखती रहती है तुम्हारी राहे..............................

सोमवार, 1 दिसंबर 2008


हमने आज वो आइना देखा है ,
जो टूटता है आँसू बहाता है ,
आज वो पत्थर भी है देखा ,
जो तोड़कर वो आइना आँसू बहाता है ,
अपनी तक़दीर से कोई गिला नही है मुझे,
पर न जाने क्यो खुदा जो तक़दीर लिखता है ,
मेरी तक़दीर लिख कर रोता है ..............................
न वो समझी हमे ,
न हम समझे उसे ,
जिन्दगी बीत गई,
इस समझने समझाने में.........