मंगलवार, 9 दिसंबर 2008

मै आज अकेला हु

आज मे बहुत अकेलापन महसूस कर हु ,किसी भी चीज मे मन ही नही लग रहा है ,जिन्दगी बिल्कुल निर्थक लग रही है , १३ साल से लगातार सिर्फ़ कमा ही रहा हु , किसी भी तरह का जिन्दगी मे कोई मौज मस्ती ही नही है ,सिर्फ़ सूबह ८ बजे उठो , आधे घंटे मे तैयार हो कर सीधे दुकान पर जाना, सब लोगो से बिना मन के हस हस कर बात करना , सब की प्रॉब्लम सुनते रहना , पर किसी को अपने मन की बात न बोल पाना ,रात को १० बजे तक काम करना , फिर घर पर जा का सो जाना ,अकेलेपन मे लिपटे हुई ये जिन्दगी मे अब छोड़ना चाहता हू/ मेरे लिए अकेलापन ......................................................जिन्दगी मे एक मोड़ जहा याद नही करते और किसी की की याद अकेला छोड़ जाती है /जब कोई हमसफ़र न हो ,जीना , जीने की चाहत के बिना हो हर वक्त आखो मे नींद हो पर कभी नींद न आए , जिन्दगी जीने मे कोई मजा ही न रहे ओर मरने मे भी कोई सकूँ न दिखे / हर वक्त दोराहे पर खड़ा रहे , न जिन्दा न मुर्दा बस आई सी ऊ मे पड़ा हुआ वो मरीज जिस की ससे चल रही है और दिल धडकना छोड़ना चाहे पर आखे किसी से मिलना चाहे

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