शनिवार, 10 जनवरी 2009

प्यार क्या होता है ?

प्यार को बयां करना जितना मुश्किल है
महसूस करना उतना ही आसान है।
आपको प्यार कब, कैसे और कहां हो जाएगा
आप खुद भी नहीं जान पाते।
वो पहली नज़र में भी हो सकता है
और हो सकता है कि कई मुलाकातों के बाद भी।......................

प्रेम पनपता है तो अहंकार टूटता है।
अहंकार टूटने से सत्य का जन्म होता है।
जहां तक मीरा, सूफी संतों की बात है,
उनका प्रेम अमृत है।
अन्य रिश्तों की तरह ही प्रेम में भी संमजस्य बेहद ज़रूरी है।
आप यदि बेतरतीबी से हारमोनियम के स्वर दबाएं
तो कर्कश शोर ही सुनाई देगा,
वहीं यदि क्रमबद्ध दबाएं तो मधुर संगीत गूंजेगा।
यही समरसता प्यार है,
जिसके लिए सामंजस्य बेहद ज़रूरी है।........
बस मेरी नजर मे यही प्यार है अगर आप की नजर कुछ और कहती है तो उसे भी बताय

1 टिप्पणी:

  1. ap ne sahii kha pyaar ak tarah se hum kah sakte h ki ye " ak soft music ki tarah jis se inssan bor nahi hota"

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