शनिवार, 10 जनवरी 2009

दिल मे क्या है सरफिरो कुछ तो कहो

दिल में क्या है सरफिरो कुछ तो कहो
सर का सौदा मत करो, कुछ तो कहो।
आँख सूरज से मिलाते क्यों नहीं रात के जादूगरो,
कुछ तो कहो।
आदमी पर क्यों नहीं जादू चला वक्त के पैगम्बरो,
कुछ तो कहो।
किन चिरागों की नजर तुमको लगी शाम से जलते घरो,
कुछ तो कहो।
मेरे छूने से बने हो देवता वरना क्या थे पत्थरो,
कुछ तो कहो।
बाप को बेटी ने खत में क्या लिखा धुँधले-धुँधले अक्षरो,
कुछ तो कहो।
और कितने वस्त्र त्यागे रुपसी रूप के सौदागरो,
कुछ तो कहो।
आप तो कहते थे मंजिल आ गई फिर लुटे क्यों रहबरो,
कुछ तो कहो।
आँख क्या झपकी जरा तुम चल दिए कब मिलोगे अवसरो,
कुछ तो कहो

1 टिप्पणी:

  1. aap chinta na kare is tarah ka koi virus nahin hota.or agar hai bhi sahi to aapke blog ko koi nuksan nahin hai.
    njoyyyyyyyyyyy

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