शुक्रवार, 9 जनवरी 2009

depression ?

आपके डिप्रेशन का कारण छोटे होते दिन,
लम्बी रात और कडाके की ठण्ड तो नहीं।
जी हां, इस तरह के मौसम में आप सीजनल
अफेक्टिव डिसऑर्डर यानी सैड बीमारी के शिकार
हो सकते हैं। हालांकि राहत वाली बात यह है कि
भारत में इस बीमारी का आंकडा केवल दो प्रतिशत है,
लेकिन ये बीमारी महिलाओं को अधिक होती है।
जानकारों के मुताबिक सर्दियों का मौसम आते ही
महिलाओं को डिप्रेशन की प्रॉब्लम घेरने लगती है।
इस बीमारी का सबसे अच्छा इलाज सूरज की रोशनी
यानी ज्यादा से ज्यादा धूप का सेवन है।
क्या है सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर
साइकोलॉजिस्ट के अनुसार ये बीमारी विदेशों में ज्यादा होती है।
वहां धूप नहीं निकलने से लोगों को ये बीमारी घेर लेती है।
इसका इलाज सनलाइट देकर किया जाता है।
भारत में मुख्य रूप से महिलाएं इस बीमारी की शिकार होती हैं।
चंचल मन पर बीमारी का घेरा विशेषज्ञों के अनुसार जो लोग
बहुत मूडी किस्म के इंसान होते हैं या जिनका मन बहुत चंचल होता है,
उनमें इस तरह की बीमारी ज्यादा पाई जाती है।
इस बीमारी के कारण शरीर का न्यूरोट्रांसमीटर फंक्शन प्रभावित हो जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक जब हम हंसते हैं तो एंडोरफिन हार्मोन निकलता है। व्यायाम नहीं करने से शरीर में लेक्टिक तत्व जमा होना शुरू हो जाता है, जिससे शरीर तनावग्रस्त महसूस करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक ये परेशानी पुरूषों से ज्यादा महिलाओं में पाई जाती हैं।
पुरूष वर्किग होने के कारण अपनी परेशानियां ऑफिस में शेयर कर लेते हैं,
वहीं महिलाएं घर में अकेली होने के कारण इस बीमारी से ज्यादा ग्रसित होती हैं।

*धूप का साथ: ठंड के मौसम में धूप का सेवन सर्वश्रेष्ठ है।
सूर्य की किरणें कोशिकाओं को क्रियाशील बनाती हैं।

*अंधेरे से दूरी: इस मौसम में अंधेरे में कम रहें क्योंकि इससे शरीर का मिलेनियम हार्मोन बढ जाता है
और सुस्ती ज्यादा आती है।
*भरपूर नींद लें: इस मौसम में कम से कम 8 घण्टे सोएं।
साथ ही सोशल और फिजिकल एक्टिविटी के लिए समय निकालें।

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