सोमवार, 2 फ़रवरी 2009

मेरी टूटी फूटी शायरी -नम्बर का पत्ता नही

आज मन बहुत दुखी है ,
जो पास नही है वो दूर भी नही ,
जिस्म उसका न जाने कहा है ,
आवाज उस की न जाने कहा है ,
पर यादे उस की यही है ,
आज मन बहुत दुखी है ,
जो पास नही वो दूर भी नही ,
कल तक हम आप के अपने थे ,
पैसा अपनी जेब मे था तो हम आप के सपने थे ,
जब थोडी सी मुसीबतों का झोका आया
आप हमारी डाल पर न हो किसी और की डाल पर थे ,
क्या यही प्यार था ,
या ओरो की तरह आप का मन भी पैसो का यार था ,
दुआ करते है हम खुदा से की आप को पैसे मे तोल दे ,
हर तरफ़ आप को पैसा ही पैसा दे ,
बस आप के मन की खुशी का एक पल भी न दे ,
जो बीत रही है हम पर बस उस के कुछ पल आप को तोहफे मे दे ...........

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