मंगलवार, 3 मार्च 2009

दर्द दिल का -1

अब रोके से कब रुकती है फ़रयाद किसी की
नश्तर की तरह चुभने लगी याद किसी की

थम-थम के बरसती हैं घटाओं पे घटाऎं
रेह-रेह के रुलाती है मुझे याद किसी की

मैं मिट गया लेकिन न मिटा इश्क़ किसी का
दिल मिट गया लेकिन न मिटी याद किसी की

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