सोमवार, 2 मार्च 2009

मिर्जा ग़ालिब -१ ( दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है )

दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है
आखिर इस दर्द कि दवा क्या है

हम है मुश्ताक और वो बेज़ार
या ईलाही! ये माजरा क्या है

हम भी मुहँ मे जबान रखते हैं
काश पूछो कि मुद्दा क्या है

जब की तुझ बिन नही कोई मौजूद
फिर ये हंगामा ऐ खुदा क्या है

ये परी-चेहरा लोग कैसे है
गमज़ा-ओ-इश्वा-ओ-अदा क्या है ...................

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