शुक्रवार, 10 अप्रैल 2009

गर्भपात की अनुमति किन हालात में? आप की क्या राय है ?

निकिता मेहता को अपने 24 हफ़्ते के भ्रूण के गर्भपात की अनुमति नहीं मिली।उनका तर्क था कि डॉक्टरों के अनुसार बच्चे को दिल की बीमारी है और उसे आजीवन पेसमेकर लगाए रखना पड़ सकता है।निकिता और उनके पति हरेश का कहना था कि वे इस समस्या से मानसिक और आर्थिक रूप से जूझने में स्वयं को असमर्थ पा रहे हैं।लेकिन अदालत ने उनकी दलील को ठुकराते हुए आदेश दिया कि 20 हफ़्ते से अधिक के गर्भ को तभी गिराया जा सकता है जबकि माँ की जान को ख़तरा हो.अदालत का यह भी कहना था कि इस बारे में आगे चल कर क़ानून बनाया जा सकता है लेकिन फ़िलहाल ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.
आप इस निर्देश से सहमत हैं?
क्या बच्चे के विकलांग होने की स्थिति में उसे गर्भ में ही नष्ट कर दिया जाना चाहिए चाहे उसकी आयु कितनी भी हो?
क्या इस मामले में डॉक्टरों की राय सर्वोपरि होनी चाहिए? क्या इस तरह के क़ानून की ज़रूरत है?

आप सब इस पर क्या राय रखते है ? अपने विचार जरूर बताय

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