शुक्रवार, 24 अप्रैल 2009

रोये हम जार जार

यादें तेरी आज फिर आई हैं बार बार
पुकारा तुमको और फिर रोये हम जार जार
चांदनी रातों मैं हम तुम मिला करते थे
पहरों बैठकर बातें किया करते थे
यादो का करब कर गया आंखें अश्कबार
पुकारा तुमको और फिर रोये हम जार जार
बुलाएं किस तरह तुमको ,
कहाँ तुम खो गए जिस्म तड़पता है यहाँ ,
रूह साथ ले गए Teesh उठती है ,
और उतर जाती है दिल के पार
पुकारा तुमको और फिर रोये हम जार जार
इश्क को समझा इबादत ,
क्या यह उसकी सज़ा है
जिंदगी भी तो नहीं ,
फिर क्या यह काजा है
दिल बेकस आरजुओं का है
जीता जागता मजार
पुकारा तुम को और फिर रोये हम जार जार
यादें तेरी आज फिर आई हैं
बार बार पुकारा तुमको और फिर रोये हम जार जार .............................

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