शुक्रवार, 3 अप्रैल 2009

बहका जो कदम बाली उमर मे ..........................

टीन एज में अक्सर किशोर बहक जाते हैं और प्यार, दोस्ती व नए संबंधों के चक्कर में उलझ जाते हैं। एक ओर पढाई का तनाव होता है तो वहीं दूसरी ओर प्रियतम को अपना बनाने की लालसा मन में हिलोरे लेने लगती है।

इस उम्र में जो कुछ भी होता है वो अनुभवों से कम और परिवेश से अधिक सीखा जाता है। यदि इस उम्र में आपके कदम बहकने से संभल गए तो आपका भविष्य सुनहरा हो सकता है।
रहता है कि 'अब आगे मैं क्या करूँ' अपने करियर पर ध्यान दूँ या चोरी-छिपे जिए जा रहे इस नए रिश्ते को दुनिया में एक पहचान दूँ। देखिए, प्यार करना बुरी बात नहीं है परंतु यदि आप अपने पैरों पर खड़े नहीं हुए तो आपका भविष्य अंधकारमय हो सकता है।

ऐसे में आप न तो अपने जीवनसाथी का साथ निभा पाएँगे ना ही उसे खुशियाँ दे पाएँगे। आज के जमाने में दौलत है तो सब कुछ है अन्यथा कुछ भी नहीं।
हर निर्णय के लिए एक सही उम्र होती है इसलिए जल्दबाजी में लिया गया निर्णय भविष्य में आपके लिए पछतावे का कारण बन सकता है। आपको पूरा हक है अपने हाथों से अपने सपनों को संजोने का। परंतु ऐसा न हो कि अपने एक गलत निर्णय के कारण आपका प्यार लंबी दूरी तक आपका साथ नहीं निभा सके। इसलिए जो कुछ भी करे सोच समझकर करें।

कैसे ले सही फैसला :-
* सबसे पहले अपनी पढाई पर ध्यान दें क्योंकि वो जीवनभर आपका साथ निभाएगी।
* लोगों के बहकावे में न आए। स्वविवेक से निर्णय ले।
* आपका वि‍वेक काम ना करें तो विश्वसनीय मित्र की सलाह लें।
* आपका एक गलत कदम आपके व आपके परिवार के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
* अवयस्कता की उम्र में उठाया गया कोई भी गलत कदम आपके लिए मुश्किलों का कारण बन सकता है।
* अपने दिल की बात अपने परिवारवालों से शेयर करें।

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