रविवार, 3 मई 2009

दिल का दर्द (अमित )- 7

रोये हैं बहोत
तब ज़रा करार मिला है ,
इस जहाँ में किसे भला सच्चा प्यार मिला है ,
गुज़र रही है ज़िन्दगी इम्तेहान के दौर से ,
एक ख़तम हुआ तो दूसरा तैयार मिला है ........................

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