गुरुवार, 7 मई 2009

दर्द की शायरी -१६ शिप्रा के लिए

तमाम उमर ज़िन्दगी से दूर रहे ,
तेरी खुशी के लिए तुझ से दूर रहे ,
अब इस से बड़कर वफ़ा -ऐ -सजा क्या होगी ,
की तेरे होकर भी तुझ से दूर रहे ..

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