गुरुवार, 7 मई 2009

दर्द की शायरी -१७ ( शिप्रा के लिए )

हम मिटटी के आशियाने बनाते चले गए ,
बना बना के उन्हें मिटते चले गए ,
हमें किसी ने ना अपना बनाया ,
हम हर किसी को अपना बनाते चले गए ......

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