गुरुवार, 7 मई 2009

दर्द की शायरी -१८ (शिप्रा के लिए )

क्यों रखु मैं अपनी कलम में स्याही ?
जब कोई "अरमान " दिल में मचलता ही नही
ना जाने क्यों सभी शक करते हैं मुझ पर .
जब कोई सुखा फूल मेरी किताब में मिलता ही नही .
कशिश तो बहुत थी मेरे प्यार में ,
मगर क्या करू कोई पत्थर दिल पिघलता ही नही ।
अगर "खुदा " मिले तो उस से अपना प्यार मांगूंगा ,
पर सुना है के वो मरने से पहले मिलता hi नही ........

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