मंगलवार, 16 जून 2009

अमित की शायरी --3

आफ़ताब वोही पर रौशनी नै
अल्फाज़ वोही पर मायनी नै
शम्मा वोही पर महफिल नई
परवाना वोही पर आशिकी नई

मोहब्बत वोही पर जज्बात नए
बात वोही पर वादे नए
हिम्मत वोही पर इरादे नए
गुलशन वोही पर फूल नए

दोस्त वोही पर दोस्ती नई
फूल वोही पर खुशबू नई
खवाब वोही पर ताबीर नई
शक्ल वोही पर तस्वीर नई

कारवां वोही पर रही नए
बारात वोही पर बाराती नए
चाँद वोही पर चांदनी नई
आप वोही पर खुशियाँ नई

सोंच वोही पर सवाल नए
जिंदगी वोही पर साल नए
प्यार वोही पर अहसास नए
ख्वाहिश वोही पर ख्याल नए

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