रविवार, 21 जून 2009

अमित की शायरी -4

एक आरजू हैं
उनसे मुलाक़ात करने की
प्यार के दो अल्फाज़ सुनने की
आरजू हैं
उनसे शिकायत करने की
इन्तेज़ार इस तरह कराने की
तेरे चाहने वाले हैं
यह बयान करने की
एक आरजू हैं बेपनाह मोहबत करने की .......

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