रविवार, 7 जून 2009

शायरी- २०

भीगी आँखों से मुस्कुराने मे मज़ा और है ,
हस्ते हस्ते पलके भीगने मे मज़ा और है ,
बात कहने की तो कोई भी समझे ,
खामोशी को कोई समझे तो ही मज़ा और है ……….

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