रविवार, 21 जून 2009

इसका फैसला आप पाठकों पर छोड़ता हूं. .........

बहुत पहले एक बहुत शक्तिशाली राजा था...उसके कुछ तरीके अपने समय से आगे थे लेकिन कुछ से लोगों की परेशानियों का कारण बनते थे. राजा के न्याय करने का तरीका भी अदभुत था..कोई अपराधी है या निर्दोष इसका निर्णय भाग्य करता था. किसी व्यक्ति पर अभियोग लगने की हालत में उसके भाग्य का फैसला सार्वजनिक स्थल पर होता था.

एक बड़े सभागार में ढेर सारे लोग एकत्रित होते थे और राजा अपने बड़ी सी कुर्सी पर आसीन होता था. उसकी कुर्सी के नीचे एक दरवाजा था जो उसके संकेत पर खोला जाता था. इससे आरोपी व्यक्ति को बाहर आना होता था...उसके बाद आरोपी को दूसरी ओर बने दो दरवाजों में से किसी एक खोलने का विकल्प होता था...एक दरवाजे से भूखा बाघ निकलता था जो आदमी को मारकर खा जाता था...जबकि दूसरे दरवाजे से एक सुंदर स्त्री निकलती थी...आरोपी के स्त्री वाला दरवाजा खोलने को उसकी निर्दोषिता का प्रमाण मान कर उस सुंदर स्त्री से धूमधाम से उसका विवाह करा दिया जाता था...यदि आरोपी पहले से बाल बच्चों वाला भी होता था तो भी कोई अंतर नहीं पड़ता था...काफी उपहारों के साथ उसकी शादी करा दी जाती थी...और दर्शक प्रसन्न मन से उसे घर तक छोड़कर आते थे...लेकिन शेर वाला दरवाजा खोलने की हालत में बहुत से लोग भारी ह्रदय के साथ लौटते थे...

आरोपी के पास जानने का कोई जरिया नहीं था कि किस दरवाजे के पीछे क्या है क्योंकि शेर कभी एक और कभी दूसरे दरवाजे के पीछे रखा जाता था.

राजा की एक अत्यधिक सुंदर बेटी भी थी...और वो एक अत्यधिक वीर और सुंदर युवक से प्यार करती थी...लेकिन वो युवक किसी राजपरिवार में नहीं बल्कि साधारण परिवार में पैदा हुआ था. लेकिन राजा को इस प्रेम प्रसंग का पता चल गया...तो उसने युवक को तत्काल गिरफ्तार करवा लिया. उसने तत्काल इसी तरीके से न्याय करने का फैसला किया...क्योंकि उसे पता था दोनों में कोई भी दरवाजा खोलने पर युवक को दण्ड मिलना तय था..या तो उसे शेर खायेगा...या फिर किसी दूसरी स्त्री से उसकी शादी होगी...

दूर-दूर से लोग मुकाबले को देखने के लिये जुटे...बहुतों ने इतना सुंदर युवक पहली बार देखा था...लोगों की आंखे युवक पर लगी हुई थी...जबकि युवक की आंखें...राजा के बगल में बैठी उसकी बेटी पर टिकी थीं...क्योंकि उसे विश्वास था की राजा की बेटी को जरूर मालूम होगा की किस दरवाजे के पीछे क्या है. और राजा की बेटी ने पहले से इसका पता करके भी रखा था. उसे मालूम था कि एक दरवाजे के पीछे राज्य की सबसे सुंदर स्त्रियों में से एक थी...राजकुमारी ने अपने प्रेमी को कई बार उससे प्रेम पूर्वक बातें करते भी देखा था...इसी वजह से राजकुमारी उससे बेहद नफरत करती थी...

राजकुमारी के प्रेमी ने एक तनाव भरे इशारे से राजकुमारी से पूछा कि कौन सा दरवाजा खोलना है...और राजकुमारी ने हाथ के छोटे से इशारे से एक झटके में उसे एक दरवाजे को खोलने का संकेत कर दिया...इस को भीड़ में मौजूद कोई समझ भी नहीं पाया...

संकेत समझने के बाद वह नौजवान आश्वस्त कदमों से एक दरवाजे की ओर चल दिया...सभी की धड़कनें थम गईं...कि अब क्या होगा...

बड़ा प्रश्न ये है कि नौजवान ने जो दरवाजा खोला उससे क्या निकला भूखा शेर या फिर सुंदर स्त्री ?

हम जितना इस प्रश्न के बारे में सोचते हैं उतना ज्यादा उलझ जाते हैं...इसके लिये मनुष्य की भावनाओं को समझने की जरूरत है...इसका जवाब उत्तर देने वाले पर निर्भर करता है...लेकिन गुस्सैल राजकुमारी की बात की जाये तो साफ है कि कोई भी दरवाजा खुलने पर वो प्रेमी को खो देगी...लेकिन क्या उसका प्रेमी किसी और को मिलना चाहिये. उसने बहुत बार डरावने सपनों में देखा कि उसके प्रेमी को शेर खा गया लेकिन उससे भी ज्यादा उसने देखा कि उसके प्रेमी की दूसरी स्त्री से शादी हो गई और वो फूलों की बरसात के बीच उसे लेकर जा रहा है...और वो अकेली इस तकलीफ को सहन कर रही है...फिर उसने सोचा कि क्यों न किसी दूसरी स्त्री को मिलने के बजाय उसका प्रेमी शेर के हाथों मारा जाये...और दूसरी दुनिया में हमेशा के लिये एक हो जाने के लिये उसका इंतजार करे.

राजकुमारी का निर्णय मौके पर लिया गया हुआ दिखता है लेकिन इसके पीछे लंबा सोच विचार छुपा हुआ है. उसने पहले ही तय कर रखा था उसे क्या करना है. उसके क्या निर्णय लिया होगा इसको सोचने में जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है....और मैं इसका निर्णय नहीं करूंगा कि उसने क्या किया होगा...मैं इसका फैसला आप पाठकों पर छोड़ता हूं.

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