मंगलवार, 23 जून 2009

अमित के लिए शायरी -७ (शिप्रा की लिखी )

इन आंखों मैं जाने क्या राज़ हैं छुपे ,
जाने कैसे कैसे इनमें अंदाज़ हैं छुपे ,

शोखियाँ भी हैं , और शरारतें भी ,
जाने कैसे कैसे इनमें ख्वाब हैं छुपे ,

संवर जाती हूँ जब देखते हैं वोह मुझे ,
जाने कैसे कैसे इनमें जज़्बात हैं छुपे ,

सिखाया हैं इन्होने मुझे ख्वाब देखना ,
जाने कैसे कैसे इनमें ख्वाब हैं छुपे ,

इलाही इन आंखों को दूर नहीं करना मुझ से ,
मेरी जिंदगी के सारे इनमें जवाब हैं छुपे .

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