गुरुवार, 18 जून 2009

हरियाणा और हरियाणा की बस का जलवा

लाँग रुट की बस का कंडक्टर एक गाँव वालो से बड़ा परेशान था। गाँव वाले हाथ देकर अगले गाँव जाने के लिए भी बस रुकवा लेते थे जबकि वह बस का स्टॉप भी नहीं था। अब बस जा रही है व वह गाँव आने वाला है। कंडक्टर पीछे से ड्राइवर को आवाज लगाता है कि - रै भाई इब के ना रोकिए, कोई रस्ते माँ हो तो सालयाँ ने पेल दिए। ड्राइवर भी जोश में आकर गाड़ी की स्पीड बढ़ा देता है। फिर क्या देखता है की गाँव आने पर एक बुढ़िया एक छोटे से लड़के, जिस ने सिर्फ बुशर्ट ही पहन रखी है, के साथ सड़के के बीचो बीच खड़ी है। ड्राइवर को गाड़ी में ब्रेक लगानी पड़ी जाती है। ड्राइवर थोड़ा सा साइड मार कर अपनी खिड़की से सर निकाल कर गुस्से में पूछता है - रै माई कित जा गी। बुढ़िया - ना बेटे जाणा तो कोनी, बालक रोवे था इसने भोपूं बजा के दिखा दे।


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