शुक्रवार, 31 जुलाई 2009

मुझे फिर से मुस्कुराने दो ज़रा


मूरत बना बिठाया तुमने कही मुझे,
जैसे दिल ही नही सीने मे धड़कता है,

मे पत्थर हू, तुम जिसको सज़ाते हो,
मुझे एक सजावटी चीज़ बनाते हो,

क्या तुमने कभी सुना ही नही,
दिल भी है मेरा जो धड़कता भी है,

कुछ अहसास रखता भी है,
बस तुमने इसमे से जान निकाली है,

एक पत्थर की तबीयत इसमे डाली है,
जिस्म जैसे पत्थर ही हो चला है,

अहसास मर जाए ना कही इसके,
इसमे इंसानी फ़ितरत आने दो ज़रा,

मुझे फिर से मुस्कुराने दो ज़रा,
सुनो एक बार मुस्कुराने दो ज़रा.....................

गुरुवार, 30 जुलाई 2009

बुधवार, 29 जुलाई 2009

अमित की कलम से





अब इस चाहत का क्या करू ,
हर वक्त तेरी जरूरत हो गई ,

हिटलर क्या बोला

मंगलवार, 28 जुलाई 2009

अमित की शायरी - नए रूप मे




सोमवार, 27 जुलाई 2009

आत्महत्या के पर्यास की सजा क्या ये देना ठीक है ?

अदालत में सरकारी वकील ने कहा: ' योर ऑनर , मुलजिम खुदकुशी की कोशिश करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। आत्महत्या करना संगीन जुर्म है। इसके लिए मुलजिम को कम से कम फांसी की सजा दी जानी चाहिए ताकि आइंदा कोई भी व्यक्ति सुइसाइड जैसा जुर्म करने से पहले 100 बार सोचे। '

हसी नम्बर ३ समझोता

शादी की 50 वीं सालगिरह पर किसी ने मेजबान से कहा : ' देख रहा हूं , आप पति - पत्नी काफी खुश हैं। क्या कभी आप दोनों का झगड़ा नहीं हुआ ? कभी घर छोड़ कर जाने का खयाल नहीं आया ?'

' कई बार खयाल आया लेकिन बरसों पहले हम दोनों में एक समझौता हुआ था। '

' कैसा समझौता ?'

' हमारे 11 बच्चे हैं , उनके 25 बच्चे हैं। हम सभी इस बड़े मकान में रहते हैं। हम पति - पत्नी में समझौता यह हुआ था कि दोनों में से जो कोई घर छोड़ कर जाना चाहे , उसे इन सभी को अपने साथ लेकर जाना होगा। '

मेरा स्टेटमेंट

' बचपन में एक बार मैं एक ट्रक के नीचे गया था। '

' और बच गए ?'

' ठीक से याद नहीं। बहुत पुरानी बात है। '

हसी नम्बर 2

एक रात मूसलाधार बारिश हो रही थी। रह-रह कर बिजली कड़क रही थी। किसी ने डॉक्टर के मकान का दरवाजा खटखटाया। डॉक्टर ने दरवाजा खोला तो सामने एक आदमी खड़ा था। लंबी दाढ़ी, बड़ी-बड़ी आंखें, ऊबड़खाबड़ दांत। चेहरा झुर्रियों से भरा था।

डॉक्टर ने मुआयना करने के बाद कहा: 'आपकी हालत तो काफी नाजुक है। मैं हैरान हूं कि आप जिंदा कैसे हैं?'

मरीज हंसने लगा: 'लेकिन मुझे तो मरे हुए 150 साल हो चुके हैं।'

अमित का जोक

भारत में आए एक विदेशी ने सुन रखा था कि योगियों की यादाश्त बहुत तेज होती है। वह हिमालय में गया। एक जगह एक योगी ध्यान मग्न था। विदेशी ने नमस्कार किया और बोला: 'महाराज, क्या आप आलू खाएंगे?'
जवाब मिला: 'खा लेंगे, बच्चा।'
विदेशी साल बाद फिर आया और सीधा योगी जी के पास पहुंचा। हाथ जोड़े और पूछा: 'किस तरह के?'
योगी ने आंखें खोलीं: 'उबले हुए बच्चा, उबले हुए!'

शनिवार, 25 जुलाई 2009

मेरी महबूबा के नाम ब्लॉग से चिठ्ठी


मिज़ाज पूछने आए, मिज़ाज करते हैं
हसीन कैसे कैसे देखो नाज़ करते हैं

चोट करते हैं दिल पे इस तरह से वो यारो
चोट करते हैं मगर बेआवाज़ करते हैं

अजब अंदाज़ इनके और अज़ब इनकी अदा
दिल वालों पे इस तरह राज करते हैं

हुस्नो-शबाब रब ने बख्शा इनको ऐसा ’अमित ’
आशिक-मिज़ाज कुर्बां तख़्‍तो-ताज़ करते हैं

दर्द भी देते हैं फिर दर्दे-दवा देते हैं

खूब एहसान का ये ढंग निकाला उनने
करते गुमराह और फिर राह बता देते हैं

ख़्‍वाब में आते हैं आने का करते हैं वादा
वादा करते हैं फिर वादा भुला देते हैं

प्यार करना कोई ग़ुनाह तो नहीं है यारो
प्यार किया है हमने उसकी सज़ा देते हैं

हमें तड़पाते हैं, तरसाते हैं क्योंकर वो ’अमित ’
सताने वालों को भी हम तो दुआ देते हैं।

एक सिसकती नारी की जबानी


घर में तलाश कर लिये मौके शिकार के
बनते हैं तीसमार खाँ बीवी को मार के

लगता है उसकी दाल में काला जुरूर है
डब्बे बहुत मँगाए हैं उसने आचार के।

इस ज़िन्दगी में कद्र की आपने मेरी
फोटो लगेंगे देखना मेरे मजार के

पगड़ी, कुलाह और ये दस्तार ही नहीं
रखदी है उनके सामने विग भी उतार के

उनको मेरी मुक्ति की दुआ भी रही याद
खा पी के चल दिये मेरे घर से डकार के


जहा पर बोने भी लंबे दिखाई देते है

हमारी घात में बैठे दिखाई देते हैं
हर एक मोड़ पे कुत्ते दिखाई देते हैं

मैं राजनीति का लेता हूँ जायज़ा जिस दम
लिबास वाले भी नंगे दिखाई देते हैं

शरारतों का वो तूफ़ान लेके चलते है
किसी
शरीफ़ के बेटे दिखाई देते हैं

ये कुर्सियों से चिपक कर जराईम पेशा भी
बड़े शरीफ़ और सच्चे दिखाई देते है



खुदा के पास जाता हूं अदब से सर झुकाता हूं
भर के आंख में आंसू मैं हाले दिल सुनाता हूं

नहीं हसरत मेरी अब कुछ सिवाए मौत के अल्लाह
सफ़ीना में फंसी कश्ती नहीं दिखता कोई मल्लाह

बहारों की जो थी दुनिया बसी है अब वीरानों में
खुशी भी आज रोती है सिसकते गम के गानों में

तमन्नाओं का मेरा चांद जब आंसू बहाता है
मेरा टूटा हुआ दिल और थोड़ा टूट जाता है

जिस्म तो खाक में है मिल चुका बस रूह ज़िंदा है
यह किस्मत का हुआ मारा कटे पर का परिंदा है

चुभोए हैं मुझे नश्तर ज़माने ने बहुत चुनकर
खुदा भी आज रोएगा मेरे इस दर्द को सुनकर

कार्टून लैला मजनू और २००९

कार्टून- मिशन -स्कूल दाखिला

स्मार्ट हो तो स्मार्ट जोक्स भी सुनो


लडकी : क्या तुम मुझे शादी के बाद भी इसी तरह प्यार करोगे?
लड़का : हाँ अगर तुम्हारा पति इजाजत देगा तो



लड़का: चलो किसी वीरान जगह चलते हैं!
लडकी: तुम ऐसी-वैसी हरकत तो नही करोगे?
लड़का: बिल्कुल नही!
लडकी: तो फिर रहने दो...



लड़का: तुम गाना बहुत अच्छा गाती हो...
लडकी: नहीं, मैं तो सिर्फ बाथरूम सिंगर हूं..
लड़का: तो बुलाओ ना कभी, महफिल जमाते हैं...

नोकझोक


  1. बॉस अपनी सेक्रेटरी से- तुम आज फिर आधे घंटे देर से आयी हो, क्या तुम्हें मालूम नहीं कि यहां पर काम कितने बजे से शुरू होता है?
    सेक्रेटरी बोली- मालूम नहीं सर, जब भी मैं यहां आती हूं तो लोगों को काम करते हुए ही पाती हूं।
  2. रमेश ने अपने बॉस से कहा, "सर, मुझे छुट्टी चाहिए ताकि मैं अपनी बीबी के काम में हाथ बंटा सकूं."
    बॉस ने कहा, "मुझे अफसोस है मगर अभी कोई छुट्टी नहीं मिलेगी.. "
    रमेश - "धन्यवाद सर, मैं जानता था कि मुसीबत में आप ही मेरी मदद करेंगे।"
  3. बॉस ग़ुस्से में: तुमने कभी उल्लू देखा है?
    कर्मचारी (सर झुकाते हुए): नहीं सर .
    बॉस: नीचे क्या देख रहे हो ? मेरी तरफ देखो.

शुक्रवार, 24 जुलाई 2009

दिल एक पल को भी तुझ से जुदा नही होता


तुने गर प्यार से इसे संवारा नही होता .

की है मोहब्बत हमने ,तुझसे इस कदर ,
तू न मिले ये हमको अब गवारा नही होता ।

न देखा होता यूँ प्यार से तुमने कभी ,
तो यह दिल हमारा , कभी तुम्हारा नही होता .

यह इश्क क्या बला है ,बता दे ए खुदा ,
क्यूँ दिल सबके लिए एकसा हमारा नही होता .

झुकती -उठती नज़रें कह देती है हाल -ऐ -दिल ,
यह जज्बा होठों से बयां नही होता …

सब कुछ छोड़ दिया तुझपे ए खुदा ,
तेरे बगैर अब कोई सहारा नही होता .

करके इश्क मोल ले लिया दर्द -ऐ -बे रहम
कैसा है यह दरिया ,जिसका कोई किनारा नही होता

खो जाता ग़म के दामन में मै गर ,
मिला नही मुझको तेरी यादो का सहारा होता ,

फासले हैं इतने दरमयान हमारे ,। पर

जोक और गाना साथ साथ

गुरुवार, 23 जुलाई 2009

टूटने के दर्द से पूरी तरह मार देना

मेरी दोस्त ने ये एक कविता लिखी अपने एक बेवफा दोस्त के लिए

जान कर मेरी बाहों को फूलो की डाली
जब तुमने थाम ही लिया है तो
सुनो इसे छोड़ना मत
की फूल नाज़ुक है इक झटके से टूट जाएँगे
और ये डाली भी टूट जाएगी
नाज़ुक है कितनी तुम खुद जानते हो

हां जब हाथ मेरा भारी लगने लगे
तुमपे बोझ कुछ और बढ़ने लगे
या तुम्हारी राहो मैं काँटे बिछाने लगू
या मेरा बजूद तुम्हारी राह मे अड़ने लगे

तुम मेरे बदन से इक इक फूल हटाते रहना
बस जहा तक हो रब्त का बोझ उठाते रहना
ये फूल तुम्हारी ही मोहब्बत मैं तुम्हारे लिए खिले है
जहाँ ज़रूरत हो इन्हे अपने काम मॅ लाते रहना

मगर जब तुम्हारी नज़र मेरे लिए तंग हो जाए
मेरा बदन बिना फूल का कुरूप बेरंग हो जाए
जब मेरा होना तुम्हारे किसी काम का ना रहे
कोई और राह-ए-जीस्त मैं तुम्हारे संग हो जाए

अपनी सहूलत के लिए अपनी खुशी की खातिर
बेशक़ मुझे पल्ला अपना झाड़ देना
बस इतना करना की छोड़ने से पहले मुझे
टूटने के दर्द से पूरी तरह मार देना
पूरी तरह मार देना.....................

मेरा नया हडेर,कैसा है ?

लम्हे अगर रुक जाते




लम्हे अगर रुक जाते
तुम ज़रा ठहर जाते …

बातें तोह बहुत करनी थी तुमसे
तुम ज़रा देर से घर जाते …

फूल तोह बाग मे कितने सरे है
तुम ज़रा तोड़ के मेरे हाथ मे दे जाते …

हवा भी कम नही चल रही
तुम ज़रा मेरे चेहरे पे बाल लहरा जाते ….

आज फिर शाम सुहानी हो गई होती
तुम ज़रा देर को छत पे आ जाते ….

मेरा दिल जल रहा है








आज
न जाने क्यो मेरा दिल जल रहा है ,
कोई प्यार को कर रहा है बदनाम ,
कर के ख़ुद ही ग़लत काम ,
न जाने क्यो प्रमिका के बाप को कर रहा है बदनाम ,
आज न जाने क्यो मेरा दिल जल रहा है ,
चाहे अगर दूसरी को तो ,
क्यो कर रहा है रिस्तो को बर्बाद ,
देख कर अख़बार ,
आज मेरा दिल जल रहा है .
किसी भी साईट पर जाओ ,
दिख रहा है ,
लड़की का सिर्फ़ जिस्म ,
हया कहा गई ?,
आज न जाने क्यो मेरा दिल जल रहा है ,
कोई मुझे भी जला दो ,
न निकल सकगी भड़ास ,
न जाने क्यो मेरा दिल जल रहा है ....

बुधवार, 22 जुलाई 2009

अमित की शायरी - दर्द का मारा

हैं सब कुछ वही , नही कुछ कमी …
फ़िर किस वास्ते हैं आँखों में नमी ..

वही रात हैं , फ़िर वही चाँद हैं ,
तो क्या चाहती है , ये मन की जमी ,

किस अक्स को हर शय ढूँदती हैं नज़र ,
क्यों दिल में हैं इतनी ये उलझन भरी …

क्यों सोचता हैं दिल उसको ,
नही जिनको आने की आदत पड़ी …..

शुक्रवार, 17 जुलाई 2009

अमित की शायरी - दिल का हाल उन के बाद

कभी हम भी उनसे निगाहें मिलाया करते थे ,
उन्हें राहो में छेड़ जाया करते थे …
खवाब देखते थे , उन्हें अपने बहो में भरने की .
लेकिन उनके मम्मी पापा से कतराया करते थे …

अमित की कविता --मेरा बचपन कहा गया ?

वो भी क्या दिन थे जब बस खिलोने टुटा करते थे ,
गिरते थे आंसू , पर दो पल को रूठा करते थे …

खिलखिला कर हंसती थी खुशियाँ ,
अलविदा कह कर भी कहाँ छूटा करते थे …

बरस के सावन हमे हंसाया करता था ,
प्यारा सा बचपन हरदम खुशिया लुटाया करता था …

पापा के कंधो पर बैठ देखते थे दुनिया ,
सारा जमाना हम पर सर झुकाया करता था ….

वोह दिन वो बचपन बहुत याद आता है ,
वोह जिंदगी फ़िर जीने को दिल ललचाता है …

सवाल तुझसे ए खुदा ! और नियति से भी ,
क्यो इतनी जल्दी एक बच्चा बड़ा हो जाता है …

गुरुवार, 16 जुलाई 2009

पार्किंग का नया तरीका चालान से बचने के लिए

बंताः अरे संता तुम अपने आटो रिक्शा से एक पहिया निकाल क्यों रहे हो?
संताः वह बोर्ड नहीं देखा...
...लिखा है यहां सिर्फ टू-व्हीलर ही पार्क कर सकते हैं।

दवाई खाने का नया तरीका

संताः काम वाली शांति को बुलाऊं?
पत्नीः क्यों?
संताः डॉक्टर ने कहा है, रात में दवा खाने के बाद शांति के साथ सो जाना।

नाराजगी मत लेना गब्बर

'शोले' फिल्म की बहुत तारीफ सुनकर सड़क पर घूमने वाले दो कुत्ते भी फिल्म देखने पहुंचे।
मगर फिल्म पूरी खत्म होने से पहले ही वे नाराज होकर चले आए।
बाहर उनके एक साथी कुत्ते ने पूछा, 'क्या हुआ? पूरी फिल्म क्यों नहीं देखी?'
'यार, फिल्म का हीरो कह रहा था- बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना।'

चालाकी ?

रमेशः तुम तो कहते हो कि तुम्हारा कुत्ता तुमसे ताश में बहुत कम हारता है... लेकिन अब तो वह तुमसे लगातार हार रहा है।
सुरेश: अब मैं इसे चालाकी से हराता हूं।
रमेशः वह कैसे?
सुरेशः यह अच्छे पत्ते आते ही पूंछ हिलाने लगता है....

मंदी की मर न जाने क्या क्या करवाए

सर्किटः भाई, बोले तो पहले तो सिर्फ रात को ही मच्छर काटते थे,
अब तो दिन में भी काटने लगे हैं।
मुन्नाभाईः अबे सर्किट,
तूने ये रिसेशन के बारे में नहीं सुना क्या?
पूरे वर्ल्ड में मंदी की मार ऐसी है कि इंसान तो क्या,
अब मच्छरों को भी दिन-रात काम करना पड़ रहा है।

भटकते मन की भटकती कविता

हर दिन,
हर पल,
निराशाओं का शून्य
निगल जाता है
मेरी आशा का
इक और सूरज!
और व्यथित सा मेरा मन
उद्विग्न हो,
कल्पना में,
ढूँढता ही रह जाता है
शून्य में
प्रफुल्लता का
एक पल!
और दिन-प्रतिदिन
बढ़ता ही जाता है आकार
इस शून्य का!
और मुझे इन्तज़ार है
उस दिन का
जब लील जायेगा
मुझे ये शून्य…!
और मेरी आशाएँ-निराशाएँ
इक-दूसरे में विलीन हो
मुक्त कर देंगी मुझे
और मैं स्वछन्द हो
विचरूँगा
शून्य में ही!!

बुधवार, 15 जुलाई 2009

एक विचार

सफलता ही हृदय एवँ मनुष्य के भाग्य का निर्माण करती है । असफल होने पर उसी को बर्बर, डाकू, अराजक, राज्यद्रोही तथा हत्यारे के नामों से विभूषित किया जाता है । सफलता उन्हीं सब नामों को बदल कर दयालु, प्रजापालक, न्यायकारी, प्रजातन्त्रवादी तथा महात्मा बना देती है ।


श्री शिवाजी डाकू एवँ लुटेरे समझे जाते थे । पर समय आया जब कि हिन्दू जाति ने उन्हें अपना शिरमौर बना,गौ एवँ ब्राह्मण-रक्षक छत्रपति शिवाजी बना दिया । भारत सरकार को भी अपने स्वार्थ के लिये छत्रपति के स्मारक निर्माण कराने पड़े । क्लाइव एक उददण्ड विद्यार्थी था । जो अपने जीवन से निराश हो चुका था । समय के फेर ने उसी उददण्ड विद्यार्थी को अंग्रेज जाति का राज्य स्थापनाकर्ता लार्ड क्लाइव बना दिया । श्री सनयात सैन चीन के अराजकवादी पलायक भागे हुये थे । समय ने उसी पलायक को चीनी प्रजातन्त्र का सभापति बना दिया ।

ग़ाज़ी मुस्तफा कमालपाशा जिस समय तुर्की से भागे थे, उस समय केवल इक्कीस युवक आपके साथ थे कोई साजोसामान न था, मौत का वांरट पीछे-पीछे घूम रहा था । पर समय ने ऐसा पलटा खाया कि उसी कमाल ने अपने कमाल से संसार को आश्चर्यान्वित कर दिया । वही कातिल कमालपाशा टर्की का भाग्य निर्माता बन गया । लेनिन को एक दिन शराब के पीपों में छिप कर भागना पड़ा था, नहीं तो मृत्यु में कुछ देर न थी । वही लेनिन रूस के भाग्य विधाता बने ।




राम परशाद बिस्मिल की डायरी से कुछ पन्ने

आज 17 दिसम्बर 1927 ई0 को निम्नलिखित पक्तियों का उल्लेख कर रहा हूं, जब कि 19 दिसम्बर 1927 ई0 सोमवार पौष कृष्ण 11 सम्वत् 1984 को 6 बजे प्रातःकाल इस शरीर को फांसी पर लटका देने की तिथि निश्चित हो चुकी है । अतएव नियत समय पर यह लीला संवरण करनी होगी ही । यह सब सर्वशक्तिमान प्रभु की लीला है । सब कार्य उसके इच्छानुसार ही होते है । यह परम पिता परमात्मा के नियमों का परिणाम है कि किस प्रकार किस को शरीर त्यागना होता है ।

मृत्यु के सकल उपक्रम निमित्त मात्र है । जब तक कर्म क्षय नहीं होता, आत्मा को जन्म-मरण के बन्धन में पड़ना ही होता है, यह शास्त्रों का निश्चय है । यद्यपि यह, वह परमब्रह्म ही जानता है कि किन कर्मों के परिणाम स्वरूप कौन सा शरीर इस आत्मा को ग्रहण करना होगा, किन्तु अपने लिये ये मेरा दृढ़ निश्चय है कि मैं उत्तम शरीर धारण कर नवीन शक्तियों सहित अति शीघ्र ही पुनः भारतवर्ष में ही किसी निकटवर्ती सम्बन्धी या इष्ट मित्र के गृह में जन्म ग्रहण करूंगा, क्योंकि मेरा जन्म जन्मान्तर यही उद्देश्य रहेगा कि मनुष्य मात्र को सभी प्राकृतिक पदार्थों पर समानाधिकार प्राप्त हो

कोई किसी पर हुकूमत न करें । सारे संसार में जनतन्त्र की स्थापना हो । वर्तमान समय में भारतवर्ष की बड़ी सोचनीय अवस्था है । अतएव लगातार कई जन्म इसी देश में ग्रहण करने होंगे और जब तक कि भारतवर्ष के नर-नारी पूर्णतया सर्वरूपेण स्वतन्त्र न हो जावेंगे, परमात्मा से मेरी यही प्रार्थना होगी कि वह मुझे इसी देश में जन्म दें, ताकि मैं उसकी पवित्र वाणी वेद वाणी का अनुपम घोष मनुष्य मात्र के कानों तक पहुंचाने में समर्थ हो सकूं ।

सम्भव है कि मैं मार्ग निर्धारण में भूल करूं, पर इसमें मेरा कोई विशेष दोष नहीं, क्योंकि मैं भी तो अल्पज्ञ जीव मात्र ही हूं । भूल न करना केवल सर्वज्ञ से ही सम्भव है । हमें परिस्थितियों के अनुसार ही सब कार्य करने पड़े और करने होंगे । परमात्मा अगले जन्म में सुबुद्धि प्रदान करें कि मैं जिस मार्ग का अनुसरण करूं, वह त्रुटि रहित ही हो ।

अब मैं उन बातों का भी उल्लेख कर देना उचित समझता हूं जो काकोरी षड्यन्त्र के अभियुक्तों के सम्बन्ध में सेशन जज के फैसला सुनाने के पश्चात घटित हुई । 6 अप्रैल सन 27 ई को सेशन जज ने फैसला सुनाया था। 18 जुलाई सन 27 ई0 को अवध चीफ कोर्ट में अपील हुई । इसमें कुछ की सजायें बढ़ी और एकाध को कम भी हुई । अपील होने की तारीख से पहले मैं ने संयुक्त प्रान्त के गवर्नर की सेवा में एक मेमोरियल भेजा था, जिसमें प्रतिज्ञा की थी कि अब भविष्य में क्रान्तिकारी दल से कोई सम्बन्ध न रखूंगा । इस मेमोरिलय का जिक्र मैंने अपनी अन्तिम दया प्रार्थना पत्र में जो मैं ने चीफ कोर्ट के जजों को दिया था, उसमें कर दिया था, किन्तु चीफ कोर्ट के जजों ने मेरी किसी प्रकार की प्रार्थना न स्वीकार की। मैंने स्वयं ही जेल से अपने मुकदमें की बहस लिखकर भेजी, जो छापी गई ।

जब यह बहस चीफ कोर्ट के जजों ने सुनी, तो उन्हें बड़ा सन्देह हुआ कि वह बहस मेरी लिखी हुई न थी। इन तमाम बातों का यह नतीजा निकला कि चीफ कोर्ट अवध से मुझे महा भयंकर षड्यन्त्रकारी की पदवी दी गई । मेरे पश्चाताप पर जजों को विश्वास न हुआ और उन्होंने अपनी धारणा का प्रकाश इस प्रकार किया कि यदि यह रामप्रसाद छूट गया तो फिर वही कार्य करेगा । बुद्धि की प्रखरता तथा समझ पर कुछ प्रकाश डालते हुए निर्दयी हत्यारे के नाम से विभूषित किया गया । लेखनी उनके हाथ में थी, जो चाहे सो लिखते, किन्तु काकारी षड़यन्त्र का चीफ कोर्ट आद्योपान्त, फैसला पढ़ने से भली भांति विदित होता है कि मुझे मुत्युदण्ड किस ख्याल से दिया गया ।

यह निश्चय किया गया कि रामप्रसाद ने सेशन जज के विरूद्ध अपशब्द कहे है, खुफिया विभाग के कार्यकर्ताओं पर लांछन लगाये हैं अर्थात अभियोग के समय जो अन्याय होता था, उसके विरूद्ध आवाज उठाई है, अतएव रामप्रसाद सबसे बड़ा गुस्ताख मुलजिम है । अब माफी चाहे वह किसी भी रूप में मांगे, नहीं दी जा सकती । चीफ कोर्ट से अपील खारिज हो जाने के बाद यथानियम प्रान्तीय गवर्नर तथा फिर वाइसराय के पास दया प्रार्थना की गई । रामप्रसाद बिस्मिल, राजेन्द्र लहरी, रोशनसिंह तथा अ्शफ़ाक़उल्ला खां के मृत्यु दण्ड को बदलकर अन्य दूसरी सजा देने की सिफारि्श करते हुए मेम्बरों ने हस्ताक्षर करके निवेदन पत्र दिया । मेरे पिता ने ढाई सौ रईस, आनरेरी मजिस्ट्रेट तथा जमींदारों के हस्ताक्षर से एक अलग प्रार्थना पत्र भेजा, किन्तु श्रीमान सर बिलियम मेरिस की सरकार ने एक भी न सुनी ।

उसी समय लेज़िस्लेटिव एसेम्बली तथा कौंसिल आफ स्टेट के 78 सदस्यों ने भी हस्ताक्षर करके वाइसराय के पास प्रार्थना पत्र भेजा कि काकोरी षड़यन्त्र के मृत्युदण्ड पाये हुओं को मृत्युदण्ड की सजा बदलकर दूसरी सजा कर दी जावे, क्योंकि दौरा जज ने सिफारिश की है कि यदि यह लोग पश्चाताप करें तो सरकार दण्ड कम कर दें । चारों अभियुक्तों ने पश्चाताप प्रकट कर दिया है ।

किन्तु वाइसराय महोदय ने भी एक न सुनी । इस विषय में माननीय पं. मदनमोहन मालवीय जी ने तथा अन्य एसेम्बली के कुछ सदस्यों ने भी वाइसराय से मिलकर भी प्रयत्न किया था कि मृत्यु दण्ड न दिया जावे । इतना होने पर सबको आ्शा थी कि वायसराय महोदय अवश्यमेव मृत्युदण्ड की आज्ञा रदद कर देंगे । इसी हालत में चुपचाप विजयाद्शमी से दो दिन पहले जेलों को तार भेज दिये गये, कि दया नहीं होगी । सब को फांसी की तारीख मुकर्रर हो गई ।

जब मुझे सुपरिन्टेन्डेण्ट जेल ने तार सुनाया, मैंने भी कह दिया कि आप अपना कार्य कीजिये । किन्तु सुपरिन्टेन्डेण्ट जेल के अधिक कहने पर कि एक तार दया प्रार्थना का सम्राट के पास भेज दो, क्योंकि यह उन्होंने एक नियम सा बना रखा है कि प्रत्येक फांसी के कैदी की ओर से जिसकी दया भिक्षा की अर्जी वाइसराय के यहां से खारिज हो जाती है, वह एक तार सम्राट के नाम से प्रान्तीय सरकार के पास अवश्य भेजते हैं कोई दूसरा जेल सुपरिन्टेन्डेण्ट ऐसा नहीं करता । उपरोक्त तार लिखते समय मेरा कुछ विचार हुआ कि प्रिवीकौंसिल इग्लैण्ड में अपील की जावे । मैंने श्रीयुत मोहनलाल सक्सेना वकील लखनउ को इस प्रकार की सूचना दी ।

बाहर किसी को वाइसराय की अपील खारिज होने की बात पर विश्वास भी न हुआ । जैसे तैसे करके श्रीयुत मोहनलाल द्वारा प्रिवीकौंसिल में अपील कराई गई । नतीजा पहले से ही मालूम था। वहां से भी अपील खारिज हुई । यह जानते हुए कि अंगेज सरकार कुछ भी न सुनेगी, मैंने सरकार को प्रतिज्ञा पत्र ही क्यों लिखा ? क्यों अपीलों पर अपीलें तथा दया प्रार्थनायें की ? इस प्रकार के प्रश्न उठते हैं, मेरी समझ में सदैव यही आया है कि राजनीति एक शतरंज के खेल के समान है ।


मंगलवार, 14 जुलाई 2009

शैतान की कहानी - अमित जैन जोक्पीडिया

एक बार शैतान का मन अपने काम से ऊब गया — सोचा, कि इस काम से सन्यास लिया जाये। उसने अपनी सारी सम्पत्ति बेचना शुरू कर दी। हाट के दिन झुण्ड के झुण्ड लोग आये और उन्हें खरीदने लगे।

नशेबाजी, चुगली, ईर्ष्या, बेईमानी, कुढन, क्रोध, जल्दबाजी, बदहवासी जैसी चीज़ें लोगों को बहुत पसन्द आयीं। उन्होंने मुँहमाँगे दाम देकर इन्हें खरीद लिया। जो न खरीद सके वे हाथ मलते रह गये।

देखते-देखते शैतान का सारा सामान बिक गया। एक चीज को उसने कपड़े से ढाँक कर रखा था क्योंकि वह उसे बेचना नहीं चाहता था। खरीददारों में से एक ने पूछा — जब सब कुछ बेचकर धन्धा छोड़ रहे हो तो इस एक चीज़ से इतना मोह क्यों? इसे भी बेचिये और निश्चिंत हो जाइये।

शैतान ने उत्तर दिया— नहीं, भाइयो! इसे मैं नहीं बेच सकता। यह मेरी सबसे प्रिय और करामाती चीज है। इसके जरिये तो मैं अपनी बेची हुई सारी चीजें वापस ले सकता हूँ। यदि सन्यास में मन नहीं लगा और फिर से मुझे अपना धन्धा शुरू करना पड़े, तो इसके सहारे अपना कारोबार फिर से शुरू कर सकता हूँ। इसको यदि बेच दिया तो मेरा अस्तित्व ही खतरे में पड़ जायेगा! न भाई न, इसे मैं नहीं बेच सकता — किसी भी कीमत पर नहीं।

लोगों के मन में उस चीज़ को देखने की उत्सुकता हुई। एक ने शैतान से कहा, नहीं बेचना तो कोई बात नहीं। परन्तु एक बार दिखा तो दो कि वह चीज़ है क्या! तब शैतान ने ऊपर से ढाँक रखे कपड़े को हटा दिया और बड़े गर्व से बोला, भाइयो! देखो, ये है आलस्य! इसके रहते मुझे वह सब कुछ मिलता रहेगा जो मैं चाहता हूँ और मेरा धंधा फिर जोर शोर से शुरू हो जायगा।

अमित जैन का जोक्पीडिया -6

संता : यार , मैं अपने पिता की तरह करोड़पति बनने के सपने देखता हूं।
बंता : क्या तुम्हारे तुम्हारे पिता करोड़पति हैं ?
संता : नहीं यार वह भी सपने देखा करते थे।

अमित जैन का जोक्पीडिया

संता: मुझमे और बिल गेट्स में क्या समानता हैं?
बंता: मुझे नही पता.
संता: अच्छा में बताता हूँ... न वो मेरे घर आता हैं और न में उसके घर जाता हूँ!

अमित जैन का जोक्पीडिया

संता- मैं एक फिल्म बना रहा हूँ, तू उसमें काम करेगा।

बंता- मेरा रोल क्या होगा?

संता- उसमें तुझे सौ फीट ऊपर से स्वीमिंग पूल में कूदने का रोल दूँगा।

बंता- लेकिन भाई मुझे तैरना नहीं आता।

संता- चिंता मत कर, स्वीमिंग पूल में पानी नहीं होगा!

अमित जैन का जोक्पीडिया

लेटेस्ट जोक्स है भाई

सरदार की मौत बिजली गिरने से हो गई।
उसकी लाश मुस्कराते हुए मिली।
भगवान ने पूछा- ऐसा क्यों?
तो सरदार बोला- मैनू लगा कि कोई फोटो खींच रहा है।...

अमित जैन का ( जोक्पीडिया)

संता बंता से- चलते चलते कहीं रूक जाता हूँ मैं...
बैठे बैठे कहीं सो जाता हूँ मैं...
क्या यह‍ी प्यार है...
क्या यह‍ी प्यार है....।

बंता- नहीं यार! डॉक्टर के पास जा तुझे कमजोरी आ गई है।॥

अमित( जोक्पिडिया)

एक बार संता सिंह की 20 लाख की लॉटरी निकली। संता सिंह लॉटरी वाले के पास गया।
नंबर मिलाने के बाद लॉटरी वाले ने कहा- ठीक है सर, हम आपको अभी 1 लाख रुपए देंगे और बाकी के 19 लाख आप अगले 19 हफ्तों तक ले सकते हैं।
संता - नहीं, मुझे तो पूरे पैसे अभी चाहिए नहीं तो आप मेरे 5 रुपए वापस कर दीजिए।

रविवार, 12 जुलाई 2009

अमित की भूली बिसरी शायरी , आज मेरे प्यार ने मुझ को दी......


मै किसी को हु चाहता ,
पर नही जनता ,
कैसे है उसे बताना ,
अगर कोई है इस बात को जनता ,
तो मुझ को जरूर बताना ,
अगर हो गया मेरा कामयाब उस को पटाना ,
तो मै जरूर दुगा उस को उस की मनमर्जी का नजराना ,
भूल न जाना ,
आप को जरूर है मेरी नया को पार लगना ,
नया नया शायर हु बना ,
उस की मोहबत मे ,
माफ़ करना यदि लिखा हो कोई ग़लत ,
अपने दिल का फ़साना .............

कॉकरोच सिर कटने के बाद भी कई सप्ताह तक जिंदा रह सकता है

कॉकरोच सिर कटने के बाद भी कई सप्ताह तक जिंदा रह सकता है। दरअसल वह सिर कटने से नहीं, भूख से मरता है।

बीबी - किसी को तलती है किसी को खाती है ..........

चोर - तुम्हारी जेब में जो कुछ है फटाफट निकाल दो ।

संता - भाईसाहब, ऐसा मत कीजिए। अगर मैं खाली जेब लेकर घर गया तो मेरी बीबी मुझे कच्चा चबा जाएगी।

चोर - और अगर मैं खाली हाथ घर पहुंचा तो मेरी बीबी क्या मुझे तल के खाएगी ,,,,, ?

आदमी शादी क्यों करता है ?


आदमी शादी इसलिए करता है ताकि मरने के बाद यदि वह स्वर्ग में जाए तो अच्छा अनुभव करे और यदि नर्क में जाए तो अपने घर जैसा अनुभव करे .....

अमित की अटपटी शायरी

लोग कहते हैं..

प्यार इतना भी मत करो
कि गर्लफ्रैंड सर पर सवार हो जाये...

हम कहते हैं कि प्यार करो इतना कि
गर्लफ्रैंड की फ्रैंड भी...



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तुम्हारे साथ फरार हो जाये..!!

कुछ अन्दर की बात हो जाए

सास : आने दो मेरे बीते को , उससे बैठ कर समझाऊगी तुम्हारी सारी करतूत .

बहु : कोई फायेदा नहीं है

सास : क्यूँ ?

बहु : क्यूँ की तुम बैठ के समझाओ गी और मै लेट के ।

किसी की आदत अगर किसी से मिलती हो तो ................

संता हवाईजहाज में सफर कर रहा था। एयरहोस्टेस ने मुस्कुराकर उसका अभिवादन किया। अभिवादन का प्रत्युत्तर देते हुए संता ने कहा - आपकी शक्ल मेरी बीबी से काफी मिलती है।
इस बात पर एयरहोस्टेस ने उसे एक तमाचा जड़ दिया। गाल सहलाते हुए संता ने कहा - शक्ल ही नहीं, आदत भी मिलती है ....

क्या आप मरने के बाद जिन्दा होना चाहते है ?

मरीज : डॉक्टर साहब, क्या कोई ऐसी दवाई नहीं बनी है कि मैं मर भी जाऊं तो बाद में जीवित हो जाऊं ?

डॉक्टर : दवाई तो नहीं बनी है, पर आप एकता कपूर से कान्टेक्ट कर सकते हैं ।

ज्यादा खुश मत हो

एक शिकारी जंगल में रास्ता भूल गया। भटकते-भटकते वह एक जगह पहुंचा जहां एक आदमी केंप लगाए रह रहा था। उसे देखकर उसकी जान में जान आई।
- तुम्हें देखकर बड़ी खुशी हुई। मैं तीन दिनों से भटका हुआ हूं।
- ज्यादा खुश मत हो। मैं तीन महीनों से भटका हुआ हूं और अब तक निकलने का रास्ता नहीं मिला ।
आदमी ने जवाब दिया।

एक नम्बर का झूठा

एक दुकान के बाहर लिखा था - इन्सानों की तरह बात करने वाला कुत्ता बेचना है, सम्पर्क करें।

एक आदमी ने दुकानदार से कहा - खरीदने से पहले मैं उस कुत्ते को देखना चाहता हूं।

दुकानदार आदमी को कुत्ते के पास ले गया। आदमी ने कुत्ते से पूछा - क्यों भई, क्या कर रहे हो ?

कुत्ता बोला - कुछ खास नहीं । बस इसकी दुकान की रखवाली करता रहता हूं। वैसे पहले मैं अमरीकी सरकार के खुफिया विभाग में था। मैंने कई बड़े बड़े आतंकवादियों को पकड़वाया था। उसके बाद मैं ब्रिटेन के रक्षा विभाग में तैनात कर दिया गया। अब वहां से रिटायर होकर इधर आ गया हूं।

आदमी ने दुकानदार से पूछा - इतने गुणवान कुत्ते को आप बेचना क्यों चाहते हैं ?

दुकानदार ने जवाब दिया - अरे आप इसकी बातों का भरोसा मत कीजिए।कमीना एक नम्बर का झूठा है













एक नया सच

प्रेमिका - ''प्रिये, अगर मैं तुम्हारे साथ शादी न करूं तो क्या तुम आत्महत्या कर लोगे ?''
प्रेमी - ''इसमें पूछने की क्या बात है ! मैं तो हमेशा यही करता हूं।''

एक और हसी

उपदेशक - ''तुम लोगों को मालूम है कि एक बार के चुम्बन से चालीस हजार प्राणघातक कीटाणु एक दूसरे के मुख में चले जाते हैं।''
प्रेमी युगल - ''जी, पर उसके लिये हम चालीस लाख बार मरने के लिये तैयार हैं।''

पुरी रचना ही चुरा लो


शुक्रवार, 10 जुलाई 2009

कल हमारे मोहल्ले मे कुछ ये भी हुआ


लड़का लड़की से : तुम टूटे दिल से प्यार करोगी या दिल टूटने के बाद ?
लड़की लड़के से : तुम टूटे चप्पल से मार खाओगे या चप्पल टूटने तक।

पत्निया ध्यान दे - मैं आज तक एक ही औरत को प्यार करता आ रहा हूं। '


देखो यार , मेरी शादी को 20 साल हो गए और मैं आज तक एक ही औरत को प्यार करता रहा हूं। '
' यह तो बड़ी अच्छी बात है। '
' और खतरनाक भी , अगर मेरी पत्नी को पता चल गया तो मुझे जान से मार देगी। '

कल ही मेरे दोस्त ने बताया ..... समझ गई न या और समझाऊ ...

अगर आप की किसी से लडाई हो जाए तो मन की भड़ास कैसे निकले ?

संता और बंता की आपस में लड़ाई हो गई तो संता ने बंता की फोटो कब्रिस्तान पर लगे पेड़ पर लटका दी .. और नीचे लिख दिया कमिंग सून।


समझ गए की और समझाऊ ..............;)

गुरुवार, 9 जुलाई 2009

लड़की को पटाने का सबसे आसन तरीका - पिटने पर हमारी कोई जिमेदारी नही

आप राह चलती लड़की से बोलो : तुम बिल्कुल मेरी तीसरी बीवी की तरह लगती हो ?
लड़की बोलेगी : आपकी कितनी बीवियां हैं ?
तो आप बता देना जो सच है : दो।


आगे आप की किस्मत

एक जोक ये भी है

मालकिन : जब मैं बाज़ार गई थी तुम्हारी कलाइयों में 8 चूड़ियां थी अब 6 कैसे रह गईं ?
नौकरानी : जी काम करते हुए टूट गईं।
मालकिन : अच्छा , भला पलंग पर तुम क्या काम कर रही थी ?

बन्दर - अभिनेता

बुधवार, 8 जुलाई 2009

अगर मर्द इसे से एस्सा हो जाए तो ?