गुरुवार, 16 जुलाई 2009

चालाकी ?

रमेशः तुम तो कहते हो कि तुम्हारा कुत्ता तुमसे ताश में बहुत कम हारता है... लेकिन अब तो वह तुमसे लगातार हार रहा है।
सुरेश: अब मैं इसे चालाकी से हराता हूं।
रमेशः वह कैसे?
सुरेशः यह अच्छे पत्ते आते ही पूंछ हिलाने लगता है....

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