शुक्रवार, 24 जुलाई 2009

दिल एक पल को भी तुझ से जुदा नही होता


तुने गर प्यार से इसे संवारा नही होता .

की है मोहब्बत हमने ,तुझसे इस कदर ,
तू न मिले ये हमको अब गवारा नही होता ।

न देखा होता यूँ प्यार से तुमने कभी ,
तो यह दिल हमारा , कभी तुम्हारा नही होता .

यह इश्क क्या बला है ,बता दे ए खुदा ,
क्यूँ दिल सबके लिए एकसा हमारा नही होता .

झुकती -उठती नज़रें कह देती है हाल -ऐ -दिल ,
यह जज्बा होठों से बयां नही होता …

सब कुछ छोड़ दिया तुझपे ए खुदा ,
तेरे बगैर अब कोई सहारा नही होता .

करके इश्क मोल ले लिया दर्द -ऐ -बे रहम
कैसा है यह दरिया ,जिसका कोई किनारा नही होता

खो जाता ग़म के दामन में मै गर ,
मिला नही मुझको तेरी यादो का सहारा होता ,

फासले हैं इतने दरमयान हमारे ,। पर

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