बुधवार, 15 जुलाई 2009

एक विचार

सफलता ही हृदय एवँ मनुष्य के भाग्य का निर्माण करती है । असफल होने पर उसी को बर्बर, डाकू, अराजक, राज्यद्रोही तथा हत्यारे के नामों से विभूषित किया जाता है । सफलता उन्हीं सब नामों को बदल कर दयालु, प्रजापालक, न्यायकारी, प्रजातन्त्रवादी तथा महात्मा बना देती है ।


श्री शिवाजी डाकू एवँ लुटेरे समझे जाते थे । पर समय आया जब कि हिन्दू जाति ने उन्हें अपना शिरमौर बना,गौ एवँ ब्राह्मण-रक्षक छत्रपति शिवाजी बना दिया । भारत सरकार को भी अपने स्वार्थ के लिये छत्रपति के स्मारक निर्माण कराने पड़े । क्लाइव एक उददण्ड विद्यार्थी था । जो अपने जीवन से निराश हो चुका था । समय के फेर ने उसी उददण्ड विद्यार्थी को अंग्रेज जाति का राज्य स्थापनाकर्ता लार्ड क्लाइव बना दिया । श्री सनयात सैन चीन के अराजकवादी पलायक भागे हुये थे । समय ने उसी पलायक को चीनी प्रजातन्त्र का सभापति बना दिया ।

ग़ाज़ी मुस्तफा कमालपाशा जिस समय तुर्की से भागे थे, उस समय केवल इक्कीस युवक आपके साथ थे कोई साजोसामान न था, मौत का वांरट पीछे-पीछे घूम रहा था । पर समय ने ऐसा पलटा खाया कि उसी कमाल ने अपने कमाल से संसार को आश्चर्यान्वित कर दिया । वही कातिल कमालपाशा टर्की का भाग्य निर्माता बन गया । लेनिन को एक दिन शराब के पीपों में छिप कर भागना पड़ा था, नहीं तो मृत्यु में कुछ देर न थी । वही लेनिन रूस के भाग्य विधाता बने ।




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