बुधवार, 26 अगस्त 2009

अमित की शायरी - दोस्तों के लिए

ज़रूरत ही नही अल्फाज़ की
दोस्ती तो चीज़ है बस एहसास की
पास होते तो मंज़र ही क्या होता
दूर से ही ख़बर है हमें
आपकी हर साँस की ...........

5 टिप्‍पणियां:

  1. dost hi dosto ka sath diya karty hai
    dost hi dosto ka gam liya karty hai
    jindgi mai kutch pal aisy bhi hoty hi
    jab doat hi dosto ko badnam kiya karty hai

    from kamal negi

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  2. क्या बात है अमितजी .... बहुत खूब

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  3. dost hi dosto ka gam liya karty hai
    jindgi mai kutch pal aisy bhi hoty hi
    jab doat hi dosto ko badnam kiya karty hai

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