सोमवार, 31 अगस्त 2009

प्यार में क्या चाहती है स्त्री ?

प्यार एक ऐसा खूबसूरत एहसास है, जो हर इंसान के दिल के किसी न किसी कोने में बसा होता है। इस एहसास के जागते ही कायनात में जैसे चारों ओर हजारों फूल खिल उठते हैं जिंदगी को जीने का नया बहाना मिल जाता है। स्त्री के जीवन में प्यार बहुत मायने रखता है। प्यार उसकी सांसों में फूलों की खुशबू की तरह रचा-बसा होता है, जिसे वह ताउम्र भूल नहीं पाती।

शायद जब इस संसार की रचना हुई होगी और धरती पर पहली बार आदम और हौवा ने धरती पर कदम रखा होगा, तभी से औरत ने आदमी के साथ मिलकर जिंदगी़ मुश्किलों से लडते हुए साथ मिलकर रहने की शुरुआत की होगी और वहीं से उसके जीवन में पहली बार प्यार का पहला अंकुर फूटा होगा। प्रेम एक ऐसी अबूझ पहेली है, जिसके रहस्य को जानने की कोशिश में जाने कितने प्रेमी दार्शनिक, कवि और कलाकार बन गए। एक बार प्रेम में डूबने के बाद व्यक्ति दोबारा उससे बाहर नहीं निकल पाता। स्त्रियों का प्रेम पुरुषों के लिए हमेशा से एक रहस्य रहा है। कोई स्त्री प्यार में क्या चाहती है, यह जान पाना किसी भी पुरुष के लिए बहुत मुश्किल और कई बार तो असंभव भी हो जाता है।

व्यक्तित्व की जटिलता

शायद रहस्य को ढूंढने के उधेडबुन से परेशान होकर ही किसी विद्वान पुरुष ने संस्कृत के इस श्लोक की रचना की होगी- स्त्रियश्चरित्रं पुरुषस्य भाग्यं दैवो न जानाति कुतो मनुष्य:।

पुरुषों के बीच प्रचलित यह पुराना जुमला- प्रेम के मामले में औरत के ना का मतलब हां होता है, भी पुरुषों द्वारा स्त्री के व्यक्तित्व को न समझ पाने की व्यथा को ही दर्शाता है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर स्त्रियां के मन की थाह लेना पुरुषों के लिए इतना मुश्किल क्यों है? इस संबंध में मनोवैज्ञानिक डॉ. अशुम गुप्ता कहती हैं, दरअसल स्त्री का मनोविज्ञान कुछ ऐसा होता है कि वह अपनी भावनाओं का इजहार करने के प्रति अत्यधिक सचेत होती है। इसकी सबसे बडी वजह यह है कि भारतीय समाज बचपन से ही लडकियों की परवरिश इस तरह की जाती है कि वे अपने व्यवहार की छोटी-छोटी बातों को लेकर बहुत सतर्क रहती हैं। उन्हें बचपन से कम बोलना सिखाया जाता है। इस वजह से ज्यादातर लडकियां अंतर्मुखी और शर्मीली होती हैं और प्यार के मामले में भी वे स्वयं अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने के बजाय वे इस बात की उम्मीद रखती हैं कि उनका ब्वॉय फ्रेंड या प्रेमी स्वयं उसकी भावनाएं समझने की कोशिश करे।

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