शुक्रवार, 11 सितंबर 2009

दिल्ली: भगदड़ में सात छात्राओं की मौत (क्या आप भी दर्द महसूस कर रहे है )

क्या आप भी इस पारकर की घटना से विचलित है ?यदि हां तो अपने मन की बात मन मे रख कर उसे जाहिर करे
नई दिल्ली [जागरण संवाददाता]। छात्रों की शर्मनाक हरकत गुरुवार को राजधानी दिल्ली में एक बड़े हादसे की वजह बन गई। स्कूल में छात्रों द्वारा धर-पकड़ और बदतमीजी से बचने के लिए छात्राओं में भगदड़ मची। भागती छात्राओं का रेला और संकरी सीढ़ी। आपाधापी-धक्कामुक्की में छात्राएं लुढ़कतीं और दबती गई। नतीजतन सात छात्राओं ने दम तोड़ दिया। 31 जख्मी हो गई। इनमें चार की हालत नाजुक है।

उत्तर-पूर्वी जिले स्थित खजूरी खास के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दो पालियों में चलता है। पहली पाली में छात्राएं तो दूसरी पाली में छात्र पढ़ते हैं। लेकिन परीक्षाएं साथ-साथ होती हैं। स्कूल में फ‌र्स्ट टर्म की परीक्षा चल रही है। गुरुवार को पहली पाली में सातवीं, दसवीं, ग्यारहवीं ओर 12 वीं की परीक्षा चल रही थी। लड़कियां प्रथम मंजिल स्थित कमरों में टीचर और अपने पेपर का इंतजार कर रही थीं। लड़के दूसरी बिल्डिंग में ग्राउंड फ्लोर पर थे। बारिश हो रही थी और लड़कों के कमरे में पानी भरने लगा था। इस पर स्कूल प्रशासन ने लड़कों को भी ऊपर के कमरों में जाने की घोषणा कर दी। लड़के प्रथम तल पर आ गए और उन्होंने लड़कियों के नाम पुकार कर छींटाकशी शुरू कर दी।

स्कूल की छात्राएं ज्योति व पिंकी ने बताया कि कुछ लड़कियां छेड़छाड़ से आजिज आकर सीढि़यों की ओर भागीं, लेकिन उन्हें लड़कों ने पकड़ लिया। बदतमीजी शुरू कर दी। कुछ लड़कों ने लड़कियों को क्लास रूम में ही दबोच लिया। फिर तो चारों ओर अफरातफरी मच गई। स्कूल में उस समय ढाई हजार से भी ज्यादा विद्यार्थी थे। भगदड़ ऐसी मची कि छात्राएं बचने के लिए नीचे की ओर भागने लगीं। भागती छात्राओं की संख्या अधिक थी, जबकि सीढ़ी संकरी। इसी आपाधापी में कई छात्राएं नीचे गिरीं। कोई सीढ़ी में तो कोई बरामदे में। तीन दर्जन से ज्यादा छात्राएं नीचे गिर गई और न जाने कितने लोगों ने उन्हें कुचला। जब तक शिक्षक और प्रधानाचार्य मौके पर आए, स्थिति बेकाबू हो चुकी थी। चारों ओर चीख-पुकार मची थी।

घटना की सूचना पुलिस और अन्य महकमों को दी गई। अफरातफरी के माहौल के बीच छात्राओं को गुरु तेग बहादुर एवं जगप्रवेश चंद्र अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें पांच छात्राओं ललिता नागर, अफरोज, मुमताज, मोनिका और आयशा को मृत घोषित कर दिया गया। इसके अलावा 31 छात्राएं घायल हैं, जिनमें से छह की हालत गंभीर है। घटना से गुस्साए लोगों ने पुश्ता रोड पर एक चार्टर्ड बस और दमकल की गाड़ी में तोड़फोड़ की और यातायात जाम कर दिया। घटना के तुरंत बाद किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए स्कूल परिसर के आसपास भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया।

इधर, जीटीबी अस्पताल में भी परिजनों ने जमकर नारेबाजी की। मुख्यमंत्री को नारेबाजी के बीच ही अस्पताल घुसना पड़ा। अस्पताल में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया था तथा अंदर जाने के सभी रास्ते भी बंद कर दिए गए थे। इससे मृतक व घायल छात्राओं के परिजनों को भी भारी परेशानी हुई। वे घंटों बाद अपने नौनिहालों का हाल जान पाए। मुख्यमंत्री के आदेश पर शिक्षा विभाग के दो उपनिदेशक भी अस्पताल में तैनात किए गए जिससे घायल छात्राओं व उनके परिजनों को असुविधा न हो सके।

अव्यवस्था से होते हादसे

दिल्ली के खजूरी खास में भगदड़ के दौरान छात्राओं की मौत ने एक बार फिर स्कूलों की व्यवस्था और सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस तरह के हादसे पहले भी होते रहे हैं। लेकिन सबक लेने की बात चंद दिनों-महीनों बाद बिसरा दी जाती है। अव्यवस्था और घटिया सुविधाओं के कारण हुए हादसों पर एक नजर:

-23 दिसंबर, 1995: हरियाणा के मंडी डबवाली में एक स्कूल के सालाना समारोह के दौरान आग लगने और भगदड़ में 500 से ज्यादा लोग मारे गए जिसमें अधिकांश बच्चे थे।

-16 जुलाई, 2004: तमिलनाडु के कुंबकोणम के एक स्कूल में आग लगने से 90 छात्रों की असमय मौत

-26 जनवरी, 2007: गुजरात के सूरत में आदिवासी लड़कियों के स्कूल की इमारत ढहने से 11 की मौत जबकि 40 मलबे में फंसीं

15 अगस्त, 2008: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान स्कूल की हालिया बनी नई इमारत ढहने से 30 छात्र घायल

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1 टिप्पणी:

  1. जी हाँ। हम भी दर्द महसूस करते हैं। चाहे किसी भी अफ़वाह के कारण ही सही। स्कूल प्रशासन को ये ज़रूरी था कि वो एनाउंसमेंट करते या फ़िर लडकों को अपने टिचर्स रूम में ले जाते।
    आज इस जगह पर हमारी बेटी भी हो सकती है। आपका पोस्ट जाग्रुत करनेवाला है।

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