शनिवार, 21 नवंबर 2009

दर्द दिल का -26

इस शाम मेरे लब पर तेरा नाम ना आए ,
खुदा करे ऐसी शाम ना आए ....
ए जान -ऐ -अमित कभी मुमकिन ही नहीं ,
मैं ग़ज़ल लिखूं और तेरा नाम ना आए .

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