रविवार, 8 नवंबर 2009

एक दर्द ये भी

किसी मर्द के आगोश में-

कोई लड़की चीख उठी

जैसे उसके बदन से कुछ टूट गिरा हो

थाने में एक कहकहा बुलंद हुआ

कहवाघर में एक हंसी बिखरी

सड़कों पर कुछ हॉकर फिर रहे हैं

एक एक पैसे में खबर बेच रहे हैं

बचा खुचा जिस्म फिर से नोच रहे हैं....

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