शनिवार, 26 दिसंबर 2009

ईसामसीह ने भारत में बिताए थे 17 साल!

दुनिया भर में क्रिसमस के जश्न के बीच भारत के साथ ईसामसीह के लंबे संपर्क का दावा किया गया है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि ईसामसीह ने अपने जीवन के शुरुआती 17 वर्ष भारत में बिताए थे। उन्होंने 13 से 30 साल की उम्र तक भारत में बौद्ध धर्म और वेदों का अध्ययन किया था।

ब्रिटिश फिल्म निर्माता केंट वाल्विन कहते हैं, 'बचपन में यीशु के परिवार के नाजरेथ [इजरायली शहर] में रहने के प्रमाण मिलते हैं। लेकिन, जब उन्हें दूसरी बार नाजरेथ में देखा गया, तब वह 30 साल के थे। यीशु ने कहा था कि जितने दिन वह गायब रहे उन्होंने अपनी बुद्धि और कद में विकास किया।' वर्ष 2009 का दयावती मोदी पुरस्कार लेने भारत आए वाल्विन की अगली फिल्म 'यंग जीसस: द मिसिंग ईयर्स' यीशु के शुरुआती जीवन पर ही आधारित है।

वाल्विन ने बताया कि उनकी फिल्म एपोस्टोलिक गासपेल्स [ईसामसीह के जीवन पर प्राचीन धार्मिक वर्णन] और अभिलेखीय सामग्री पर आधारित है। गासपेल्स के मुताबिक यीशु को 13-14 साल की उम्र में अंतिम बार पश्चिम एशिया में देखा गया था। वाल्विन का कहना है कि फिल्म का पहला हिस्सा गासपेल्स पर और दूसरा हिस्सा पूरी तरह अभिलेखीय सामग्री पर आधारित होगा, जिसमें यीशु के भारत से संपर्क के कई संदर्भ मिलते हैं।

रूसी चिकित्सक निकोलस नोतोविच की 1894 में आई किताब 'द अननोन लाइफ आफ क्राइस्ट' में भी इसी विषय को उठाया गया है। यह किताब नोतोविच की अफगानिस्तान, भारत और तिब्बत यात्रा पर आधारित थी। उनकी इस किताब में कई ऐसे संदर्भ मिलते हैं, जो बताते हैं कि यीशु भारत आए थे और उन्होंने यहां वेदों व बौद्ध धर्म का अध्ययन किया था।

एक अन्य रूसी लेखक निकोलस रोइरिच के मुताबिक यीशु ने काशी [वाराणसी] समेत भारत के कई प्राचीन शहरों में समय बिताया था। जर्मन विद्वान होल्जर क्रिस्टन की किताब 'जीसस लिव्ड इन इंडिया' के मुताबिक यीशु ने सिंध में बौद्ध धर्म का अध्ययन किया था।


इस जानकारी का स्रोत यहाँ है

1 टिप्पणी:

  1. काश्मीर में ईसा मसीह की कब्र भी है। ऐसा मैनें सुना भी है और पढा भी है। सूली लगने के बाद उनका शरीर गायब या चोरी हो गया था और भारत में लाया गया था।

    प्रणाम स्वीकार करें

    उत्तर देंहटाएं