रविवार, 27 दिसंबर 2009

प्यार मे ,प्यार के लिए


तेरे हर गुनाह की माफी है,
तू जो रोए तो
बहोत ना इंसाफी है,
तेरी आँखों में ना आए कभी आँसू ,
क्योकी रोने के लिए तो हमारी आँखें ही काफ़ी है.

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