गुरुवार, 10 दिसंबर 2009

देख तो लो -अमित का दर्द चाँद

चाँद, तारे, फूल, खुश्बू से सुनिए
सबको पता है नाम आपका किसी से सुनिए

दर्द अगर महसूस हो तो मूड कर देखना
डॉवा क्या होगी, उस दर्द से सुनिए

आँखों में नामी का समंदर है तो
मुस्कुराहट क्या चीज़ हैं,अश्कों से सुनिए

ख्वाबों में हो उनका दीदार जिनकी कमी है तो,
उनका क्या मुकाम है, उन ख्वाबों से सुनिए

तन्हाई क्या मर्ज़ है, गर नही मालूम तो
हमने कटी है सारी ज़िंदगी तन्हा, हमसे सुनिए……


तुम को फ़ुर्सत हो मेरी जान तो इधर देख तो लो
चार आँखें ना करो, एक नज़र देख तो लो…

बात करने के लए, कौन तुम्हें कहता है
ना करो हमसे कोइ बात मगर देख तो लो..

1 टिप्पणी:

  1. वाह
    अत्यंत उत्तम लेख है
    काफी गहरे भाव छुपे है आपके लेख में
    .........देवेन्द्र खरे
    http://devendrakhare.blogspot.com

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