बुधवार, 29 दिसंबर 2010

प्यार सा शेर प्यारी सी लड़की के लिए


अब तो आजा मेरे भोले क़ातिल,
तेरे बिन जीना भी दुश्वार हुआ,

चैन मिलता नही कही भी मुझे,
बाग बान भी आज खार हुआ,

क्या मोहब्बत इसी को कहते है,
एक पल जीना भी दुश्वार हुवा,

चला भी आए तू आज दिल की तड़प मेरी,
अमित का मरना भी दुश्वार हुआ.

गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

देल्ही में लखनऊ के नवाब वाजिद अली साह के वंश के आखरी राजकुमार का महल जानते हो कहा है ?

दिल्‍ली के सरदार पटेल मार्ग स्थित रिज में पहाडी पर स्थित है एक महल, जहां जाने की इजाजत किसी को नहीं है । उस महल तक पहुंचने के एक मात्र रास्‍ते पर लगा है लोहे का ग्रिल, जिस पर हल्की-सी आहट होते ही कई कुत्‍ते भौंकना  शुरु कर देते हैं । चारों ओर कंटीली तार के बाड़े से घिरे उस महल के प्रवेश द्वार पर लगे पत्थर पर लिखा है, 'रूलर्स ऑफ अवध: 'प्रिंसेस विलायत महल'...
जी हां, आपको आश्चर्य होगा, लेकिन नवाब वाजिद अली शाह के वंश की आखिरी निशानी अवध के राजकुमार रियाज व राजकुमारी सकीना दशकों से वहां रह रहे हैं । यह उनका एक ऐसा द्वीप है, जहां बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं ।  उनका खाना, पीना, रहना-सब एक रहस्य है...

नवाब वाजिद अली शाह के वंशज हैं रियाज व सकीना
औपनिवेशिक शासक काल का अवध, आज का लखनऊ है । अवध के आखिरी शासक नवाब वाजिद अली शाह काफी रंगीन मिजाज बादशाह थे। उनके हरम में कई रानियां थी, लेकिन उनकी सबसे चहेती रानी का नाम हजरत महल था वाजिद अली शाह को अंग्रेजों ने 1856 में कलकत्‍ता में नज़रबंद कर दिया था । उस दौरान हजरत महल ने लखनऊ की सत्‍ता पाने की काफी कोशिश की थी । उन्होंने अंग्रेजों को अपने नाबालिग बेटे बिरजिस कदर को गद्दी सौंपने को कहा था । हजरत महल के अनुरोध को अंग्रेजों ने ठुकरा दिया था । बिरजिस के जीवन पर भी खतरा मंडरा रहा था । इसलिए हजरत महल अपने बेटे बिरजिस कदर के साथ छिपते-छिपाते नेपाल भाग गई । बाद में वह कभी हिंदुस्‍तान नहीं लौट सकी । मां-बेटे की मौत नेपाल में ही हो गई । वाजिद अली शाह के अन्‍य बेगम व उनके बच्‍चे बच्चे बच गए थे, जिसमें से एक बेटे की शादी बेगम विलायत महल से हुई थी । रियाज व सकीना इसी विलायत महल के बच्‍चे हैं ।

विलायत महल, रियाज और सकीना अपना गुजारा चलाने के लिए विलायत महल के पति सरकारी मुलाजिम बन गए । पति की मौत के बाद विलायत महल ने अंग्रेजों से लखनऊ की रियासत में हिस्‍सेदारी मांगी, लेकिन अंग्रेजों ने उन्‍हें मना कर दिया । सन 1947 में देश आजाद हो गया । आजाद भारत के गृहमंत्री सरदार वल्‍लभ भाई पटेल की कोशिशों से देश की 565 रियासतों का भारत गणराज्‍य में विलय हो गया ।  लेकिन रियासतों के राजा, रानी, नवाब आदि को अंग्रेजी शासन काल की ही तरह पेंशन की सुविधा मिलती रही । बेगम विलायत महल को 500 रुपए प्रति माह पेंशन मिलता था । मालचा महल में रहने वाले राजकुमार रियाज व व राजकुमारी सकीना इसी विलायत महल के बच्चे हैं ।

पेंशन खत्‍म होने पर, नई दिल्‍ली स्‍टेशन पर डाला डेरा
जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी तो उन्‍होंने सारे राजे-महाराजे की पेंशन सहित सभी तरह की सुविधाएं समाप्‍त कर दीं । जो राजे-महाराजे शक्तिशाली थे वे राजनीति के मैदान में उतर पड़े और जो कमजोर थे उनकी दशा दयनीय हो गई । विलायत महल के दो छोटे बच्‍चे थे और वह मजबूत भी नहीं थी इसलिए उनके साथ संकट उत्‍पन्‍न हो गया । कोई उपाय न देखकर विलायत महल ने सन 1975 में अपने दोनों बच्‍चे रियाज व सकीना सहित , 12 कुत्‍तों और और पांच नौकरों के साथ लखनऊ से दिल्‍ली की ओर रुख किया और यहां के नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन के एक प्‍लेटफॉर्म पर डेरा डाल दिया । बाद में वह अपने कुनबे के साथ प्‍लेटफॉर्म से उठकर वीआईपी वेटिंग लांज पहुंची और वहां कब्‍जा कर लिया ।

विलायत महल अपने कुनबे के साथ नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन पर करीब नौ वर्ष तक रहीं, जिसमें से लगातार तीन वर्ष धरना देकर अपने अपने अधिकार की मांग करती रहीं । उनके धरने की खबर तत्‍कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कानों तक पहुंची । जिस वर्ष इंदिरा गांधी की हत्‍या हुई उसी वर्ष इंदिरा गांधी विलायत महल व उनके बच्‍चों के हालात का जायजा लेने नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन पहुंची ।  इंदिरा गांधी को देखते ही विलायत महल फट पड़ी । किसी तरह उन्‍हें शांत किया गया । इंदिरा गांधी ने उन्‍हें कहीं और रहने के लिए ठिकाना उपलब्‍ध कराने का वचन दिया । विलायत महल की मांग थी कि उन्हें रहने के लिए ऐसी जगह मुहैया कराई जाए, जहां आम आदमी उनकी जिंदगी में ताक-झांक न कर सके । जगह की तलाश खत्म हुई सरदार पटेल मार्ग स्थित सेंट्रल रिज एरिया में ।
सेंट्रल रिज एरिया में मालचा महल स्थित है, जो ऊंची पहाड़ी पर तो स्थित है ही, जंगल से भी घिरा है ।  यह एक अनजान स्‍मारक है, जहां के बारे में आज भी दिल्‍ली के अधिकांश निवासी नहीं जानते हैं । जानकारी के मुताबिक इंदिरा गांधी की मौत के बाद वर्ष 1985 में उनके बेटे व तत्‍कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने विलायत महल को मालचा महल में रहने के लिए स्‍वीकृति पत्र प्रदान किया था, जिसमें उन्हें नवाब वाजिद अली शाह का वंशज बताया गया था ।

मालचा महल और विलायत महल की आत्‍महत्‍या
करीब 700 वर्ष पुराने लाल-भूरे पत्‍थर से निर्मित मालचा महल को फिरोजशाह तुगलक के शिकारगाह के रूप में जाना जाता है । इस महल में 20 दरवाजे हैं, जिसकी वजह से इसे 'बिस्‍तदरी महल'  भी कहा जाता है ।  लेकिन इसके एक भी दरवाजे पर किवाड़ नहीं लगा है । 10 सितंबर 1993 में दोपहर 2.40 बजे बेगम विलायत महल ने आत्‍महत्‍यार कर ली थी। कहा जाता है कि वह अपने जीवन के अकेलेपन से ऊब गई थी और अपने हीरे की अंगूठी को तोड़कर खा लिया था, जिससे उनकी मौत हो गई । मां की मौत के बाद से रियाज व सकीना बिल्‍कुल अकेले हैं ।
वर्तमान में राजकुमार व राजकुमारी की दुनिया
राजकुमार रियाज व राजकुमारी सकीना की उम्र 50 वर्ष से अधिक है । बाहरी दुनिया से दोनों का कोई संपर्क नहीं है । मालचा महल में न तो बिजली कनेशन है और न ही पानी की पाइप लाइन, लेकिन एमटीएनएल का टेलीफोन कनेक्‍शन उन्होंने जरूर ले रखा है । एमटीएनएल के लाइन मैन महेन्द्र के अनुसार, दोनों की दुनिया बड़ी रहस्यमयी है । फोन खराब हो जाए तो फोन को बाड़े के अंदर से ही सरका देते हैं, लेकिन हमें अंदर नहीं आने देते । उनकी हालत खास्‍ता है । ढंग के कपड़े भी उनके शरीर पर नहीं होता, लेकिन राजकुमार के पास रिवाल्‍वर जरूर है । उसके पास एक टूटी साइकिल भी है । वह खुद के लिए राशन लाने और अपने कुत्‍तों के लिए मीट लाने के लिए लुंगी व शर्ट पहने बाहर निकलता है और किसी द्वारा कुछ पूछने की कोशिश करने पर रिवाल्‍वर तान देता है । गेट पर आहट होते ही उसके कुत्‍ते भौंकने लगते हैं । अब तो कुत्‍ते भी शायद एक या दो ही बचे हैं । राजकुमार रियाज की अंग्रेजी बहुत अच्‍छी है । उसने विदेश से पढ़ाई की है ।

आज भी अकड़ बरकरार हैमालचा महल के पास ही अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र(इसरो) का दफ्तर है । इसरो दफ्तर की दीवार के पास और बाड़े के अंदर एक पानी की टंकी लगी है । इसरो से एक पानी की पाइप लाइन निकली है, जो उस टंकी से जुड़ी है । इसरो के एक कर्मचारी ने बताया कि दिन में एक बार टंकी भर देते हैं । राजकुमार बाल्‍टी से उससे पानी निकाल-निकाल कर पानी अंदर ले जाता है । आज भी रियाज की अकड़ पहले वाले राजकुमार की तरह है । वह हिंदी की बजाय फर्राटेदार अंग्रेजी में बात करना पसंद करता है । वह चाहता है कि लोग उससे 'हुजूर' कह कर बोलें और अदब से पेश आएं । राजकुमारी भी अकड़ में रहती है, लेकिन वह कभी बाहर नहीं निकलती ।

मंगलवार, 21 दिसंबर 2010

लड़की पटाने के 151 तरीके - तरीका नंबर 21

 दोस्तों जो भी तरीके लड़की पटाने के आप को इस ब्लॉग में मिल रहे है वो जरा प्यार से इस्तमाल करना , कोई जोर जबरदस्ती प्यार जैसे रिश्ते को एक  मिनट  में तोड़ देती है , और जो प्यार करो तो उसे जिंदगी भर निभाना ,
तो दोस्तों जानते है लड़की पटाने का तरीका नंबर 21 -


अगर आप की होने वाली दोस्त फिल्मो की शोकीन है तो कोशिश कीजिये उस से अक्सर फिल्मो के बारे में ही बात करे , इस से वो आप से अपनी  feeling  बटकर खुश भी होगी और  impress  भी होगी

शनिवार, 18 दिसंबर 2010

भूत की फोटो के लिए कब्रिस्तान में नंगा हुआ

यूएस के मिसिसीपी में एक चर्च के कब्रिस्तान से पुलिस ने पूरी तरह नग्न अवस्था में खड़े राबर्ट हर्स्ट को गिरफ्तार किया है। रॉबर्ट का कहना है कि वह यहा

ं आत्माओं की तस्वीरें लेने की कोशिश कर रहा था।
47 साल के रॉबर्ट का कहना है कि उसने अपने कपड़े सिर्फ इसलिए उतारे थे कि कि आत्माओं को आकर्षित करने का सबसे तरीका है। उसने बताया कि उसका मकसद तो सिर्फ अपनी कमीज उतारना था लेकिन आगे बढ़ते बढ़ते उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए और बेवकूफ बन गया। असल में अधिकारियों ने कब्रिस्तान में जगह जगह सिक्योरिटी के लिए मोशन कैमरे लगाए थे। जिसका मकसद था कि कब्रिस्तान में होने वाली किसी भी अलग तरह की गतिविधियों को कैद करना।

पर्ल रिवर काउंटी के डिप्टी चीफ शेन टकर ने बताया कि इसी कैमरे में रॉबर्ट नग्न अवस्था में कैद हो गया, जिससे सतर्क अधिकारियों ने उसे पकड़ लिया। हालाकि पूछ ताछ में पता चला कि रॉबर्ट का मकसद कुछ गलत करने का नहीं था। रॉबर्ट को 500 डॉलर जुर्माने के बाद छोड़ दिया गया।

 अब पता चला पागल हमारे देश में ही नहीं सारे जहा में भरे पड़े है ......:)

क्या आप को भी जवान रहने का नुस्खा पता है ?

औरत : तुम्हें हमेशा जवान दिखने का राज पता है ?
लड़की : अपनी त्वचा का ख्याल रखना ...
औरत : नहीं। जवां दिखने के लिए भरपूर नींद लेना , जवां लोगों के साथ घूमना , सही डाइट लेना और हमेशा कम उम्र बताना।

शुक्रवार, 17 दिसंबर 2010

मजेदार sms

संता के पास एक ब्लैंक मेसेज आया। उसने मेसेज भेजने वाले को फोन करके कहा :' तुम्हारा मेसेज पढ़ नहीं पाया। लगता है , तुम्हारे मोबाइल की इंक खत्म हो गई है। फिर से भरवाओ..

गूगल ने मरवाया

संता- यार , भलाई का जमाना ही नहीं है। पड़ोसी का बच्चा गुम हो गया था। मैंने खोजने का मशविरा दिया तो मुझे बहुत मार पड़ी।
बंता- तुमने कहा क्या था !
संता- मैंने कहा था कि गूगल पर सर्च कर लो , शायद मिल जाए।

मंगलवार, 7 दिसंबर 2010

क्या आपके बाथरूम में भगवान है ?

नर्सरी क्लास में छोटे बच्चों से पूछा गया , " भगवान कहां है ?"
एक बच्चे ने हाथ उठा कर कहा , " मुझे पता है!!"
टीचर बोलीं ," अच्छा बताओ।"
बच्चा बोला ," हमारे बाथरूम में..."
हैरान टीचर ने पूछा ," तुम्हें कैसे पता ?"
बच्चा बोला , " रोज सुबह जब पापा उठते हैं तो बाथरूम का दरवाजा पीटते हुए कहते हैं- हे भगवान! तुम अब तक अंदर ही हो!"

शनिवार, 4 दिसंबर 2010

कितने शनिदेव ?

पिछले हफ्ते शिरडी जाना हुआ। हम तीन लोग थे। लौटते वक्त तय किया कि 70 किलोमीटर दूर ही शनिशिंगणापूर है, इसलिए वहां

भी हो आया जाए। यह बेहद प्रसिद्ध मंदिर है। मान्यता है कि यहां शनि की शिला प्रकट हुई थी। इस जगह के बारे में कहा जाता है कि यहां घरों में दरवाजे नहीं हैं। हम कुछ तय करते, तब तक एक कैब वाले ने आकर पूछा- शनिशिंगणापूर जाना है? बस 130 रुपये, आने-जाने का 100 रुपया। यहीं छोड़ देंगे। हमने हामी भर दी। कैब में पहले से दो परिवार थे। जैसे ही हम शिरडी से चले, हमारी मुसीबतों का सफर शुरू हो गया। कैब वाला बेहद खराब रास्ते से ले गया। गड्ढों में हिचकोले खाते हम लोगों ने 2 घंटे का सफर साढ़े तीन घंटे में पूरा किया। खराब रास्ते से जाने का कारण पूछा तो ड्राइवर ने बताया कि इन कैब्स पर बैन है।

शनिशिंगणापूर में जैसे ही कैब रुकी, एक युवक धोतियां ले आया और बोला कि इन्हें बांधकर स्नान कर लें। गीले बदन मंदिर में जाएं। हमें बताया गया कि धोती, प्रसाद, नहाने-धोने का कोई पैसा नहीं लगेगा। महिलाएं मंदिर में जा सकती हैं, प्रतिमा के पास नहीं। नहाकर जैसे ही हम गाड़ी के पास लौटे, उसी लड़के ने एक टोकरी आगे बढ़ा दी। इसमें कुछ फूल, काला कपड़ा, चांदी का दिखने वाला सिक्का, शनि यंत्र और शनि की कपड़े की प्रतिमा थी। हमसे 351 रुपये मांगे गए। हमने कम करने को कहा तो उसमें से सिक्का और शनि यंत्र हटाकर 251 रुपये मांगे। कुछ और कम करने को कहा तो जवाब मिला, यहां क्या लेने आए हो? उसकी बदतमीजी से हम सन्न थे। हमने कहा कि हमें नहीं करनी पूजा। इस पर जवाब मिला, नहीं करनी तो धोती खोल दो। हमने धोती लौटानी चाही तो हमसे नहाने के सवा दो सौ रुपये मांग लिए गए।

तब तक 10-15 लड़के वहां आ गए जो हम पर रुपये देने का दबाव बनाने लगे। एक हमारे पास आकर बड़बड़ाया - सही सलामत लौटना है तो रुपये दे दो। मैंने गाड़ी में रखा अपना फोन उठाना चाहा तो उनमें से एक ने अपना फोन आगे बढ़ा दिया और कहा- पुलिस को फोन करना है तो इससे कर ले। बाकी लोगों ने रुपये दे दिए, मैं अड़ा रहा। लग रहा था कि मैं एक लफ्ज भी और बोलूंगा तो वे हम पर अटैक कर देंगे। हमारे कपड़े, पर्स, मोबाइल सब लगभग उनके कब्जे में थे।

हालात की नजाकत समझते हुए हमने तीन लोगों के सौ रुपये दे दिए। मंदिर जाकर फटाफट गाड़ी पर लौटे और कपड़े पहने। वे लोग हर आने वाले को इसी तरह लूट रहे थे। शनिदेव की छवि जो भी हो, लेकिन मुझे वहां साक्षात कई शनि नजर आ रहे थे। दिल्ली लौटते वक्त इत्तफाक से ट्रेन में मेरी मुलाकात अकाउंटेंट गजानन गलगले से हुई जो अहमदनगर जिले के ही निवासी हैं। मुझसे यह किस्सा सुन वह आहत हुए और कहा- आपसे पहले भी यह कई लोगों से सुन चुका हूं। लोगों ने वहां जाना कम कर दिया है। थोड़े से लोग हमारे देवस्थानों को बदनाम कर रहे हैं। मैं चुप था।

ये खबर आज जब से पढ़ी है जब से मन कर रहा है की अपने मन की भड़ास कहा निकालू , 
उन १५ लडको को क्या वह का प्रशासन काबू नहीं कर सकता ,?

गुरुवार, 2 दिसंबर 2010

मुन्नी बदनाम हुई..

इस्लामाबाद।। पाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी लाहौर में 2 बच्चों की मां मुन्नी आज-कल अपनी छोटी सी दुकान खोलने से हिचक रही है। ऐसी बात
नहीं है कि उनकी दुकान में ग्राहकों का टोटा हो गया है। वह जब भी दुकान खोलती हैं सड़क छाप लड़कों की भीड़ जुट जाती है, जो सलमान खान की फिल्म दबंग के ' मुन्नी बदनाम हुई... ' गीत से उसे छेड़ने-चिढ़ाने का कोई मौका नहीं गंवाते। गौरतलब है कि पाकिस्तान में यह गीत सुपरहिट है।

पहले सिर्फ पड़ोस के टपोरी लड़के थे, जिनसे मुन्नी को निबटना पड़ता था। वे उसके सामने यह गीत गाना नहीं भूलते। फिर लोगों को सलमान खान की फिल्म के इस सुपरहिट गीत की भनक लगी और उनके होठों पर यह गीत चढ़ा। दूध से ले कर बिस्किट की तलब उन्हें सताती और वे उनकी दुकान पहुंच जाते। वहां वह 'मुन्नी बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिए...' के बोल गुनगुनाना नहीं भूलते। बहरहाल, मामला बस लाहौर की इस मुन्नी की नहीं है। पाकिस्तान में मुन्नी एक लोकप्रिय नाम है और कमोबेश सभी को लगता है कि काश यह गीत कभी नहीं लिखा गया होता और अगर लिखा गया तो इस कदर लोकप्रिय नहीं होता।

अगर पाकिस्तान में यह गीत ' मुन्नी बदनाम हुई... ' सुपरहिट हुआ है , तो उसका कारण भी है। माना जाता है कि यह पाकिस्तानी गीत ' लड़का बदनाम हुआ तेरे लिए ...' की नकल है। यह उमर शरीफ के 1992 के एक फिल्म का गाना है।

फिल्म में की रील लाइफ के रूप में मलायका अरोड़ा खान ने लोकप्रियता तो हासिल की है, लेकिन रियल लाइफ की कई मुन्नियां इससे आजिज हैं।
अब  आप का क्या कहना है इस के बारे में , इस खबर का स्रोत्र  यहाँ है

बुधवार, 1 दिसंबर 2010

देल्ही में बारात का बैंड बजाने पुलिस आएगी

अरे क्या कहा चोक गए नहीं जी ये बात सोलह आने सच है , आप को यकीं नहीं होता , तो ये खबर पढ़ लीजिए , फिर तो यकीन आ जायेगा न जी ,

नई दिल्ली ।। अगर आपकी फैमिली में किसी की शादी होने वाली है और आप धूमधाम से बैंड-बाजे के साथ बारात लेकर द

िल्ली की सड़कों पर निकलना चाहते हैं, तो जरा सावधान हो जाइए। कहीं ऐसा न हो कि रास्ते में आपका सामना पुलिस से हो जाए और बारात थाने पहुंच जाए।

दिल्ली पुलिस अब सड़क पर बारात निकालने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने जा रही है। इसके तहत न सिर्फ ऐसे लोगों का चालान काटा जाएगा, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। दिल्ली पुलिस एक्ट में तो इसका प्रावधान है ही, अदालत ने भी इस बारे में आदेश जारी कर रखा है।

जॉइंट कमिश्नर (ट्रैफिक) सत्येंद गर्ग ने बताया कि राजधानी में ज्यादातर लोग सड़क पर बैंड-बाजे के साथ बारात निकालते हैं और उसकी वजह से कई जगहों पर लंबा जाम लग जाता है। इससे आम लोग तो परेशान होते ही हैं, कई बार एंबुलेंस, पीसीआर वैन और फायर ब्रिगेड जैसे इमर्जेंसी वीइकल भी जाम में फंस जाते हैं। ऐसे में किसी की जान भी जा सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने फैसला किया है कि अब सड़क पर बारात निकालने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि सोमवार की रात सड़क पर निकल रही बारातों की वजह से ही एनएच-8 पर भारी जाम लग गया था और लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी। कई लोग दो घंटे तक जाम में फंसे रहे थे। शादी के सीजन में राजधानी के उन इलाकों में ट्रैफिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है जहां बड़ी तादाद में मैरिज हॉल, मैरिज गार्डन या फार्म हाउस हैं। महरौली, कापसहेड़ा, द्वारका लिंक रोड, पंजाबी बाग, अलीपुर, राजौरी गार्डन, नजफगढ़, छतरपुर, आई.पी. एक्सटेंशन सहित कई जगहों पर हर दिन जाम लग रहा है।

इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए बुधवार से पुलिस मुहिम शुरू करने जा रही है। जॉइंट कमिश्नर ने कहा कि इस मुहिम में लोकल पुलिस और ट्रैफिक पुलिस मिलकर एक्शन लेगी। ट्रैफिक पुलिस शादी के आयोजन स्थल के आसपास अवैध तरीके से पार्क की गई गाडि़यों को या तो क्रेन से उठवा लेगी या उनका चालान काटेगी। लोकल पुलिस सड़क पर बरात निकालने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी।
इस  खबर का स्त्रोत्र (कायदा तोड़ा तो पुलिस बजाएगी बारात का बैंड) यहाँ है

मंगलवार, 30 नवंबर 2010

संसार का सबसे छोटा और कामयाब परवचन सुना है ?

पुलिस : कहां जा रहा है ?
शराबी : दारू पीने से होने वाले नुकसान पर प्रवचन सुनने !

पुलिस : इतनी रात को कौन प्रवचन देगा ?
शराबी : मेरी बीवी !

सोमवार, 29 नवंबर 2010

"प्रणाम शहिदां नू".

ये लिखा था उस ट्रक के पीछे जिसने कई आदमियों को मारा था,

तुलसीदास ने की साहित्यिक चोरी - रामचरितमानस

क्या आप जानते है की हमारे देश में ही ये संभव है की कोई सिरफिरा प्रोफेसर JNU पढ़ा रहा है ,अगर आप को विश्वाश नहीं तो ये खबर पढ़ लो 
पटना ।। अगर तुलसीदास ने रामचरित मानस आज लिखी होती तो वह साहित्यिक चोरी के मामले में जेल चले गए होते। उनकी रचना और कुछ नहीं बल्कि वाल्

मीकि रामायण की नकल है।

यह बात जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के प्रफेसर तुलसीराम ने दलित साहित्य पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में कही। सेमिनार का आयोजन साहित्य अकादमी और पटना यूनिवर्सिटी हिन्दी विभाग ने संयुक्त रूप से किया है।

तुलसीराम ने कहा कि नकल होने के बावजूद तुलसीदास की रामचरित मानस काफी लोकप्रिय हुई। कट्टर हिंदू समाज ने इसे इसलिए लोकप्रिय बनाया क्योंकि इसे लिखने वाले तुलसीदास ब्राह्मण थे जबकि वाल्मीकि के दलित होने की वजह से उनकी रचना को अनदेखा कर दिया गया।
खबर  का लिंक यहाँ है

रविवार, 28 नवंबर 2010

मेट्रो में हुई पिटाई , पत्रकारों को लगी मिर्ची ?



अरे भाई इन जाबाजो को जो लेडिज कोच में अपनी बहादुरीके साथ उन के पल्लू से लिपटने की कोशिश में थे , जब इस नामुराद पुलिस ने उन्हें खीच कर लेडिज कोच से निकला और उन की उन के तरीके से जलील किया ,तो पत्रकार भड़क गए , ऐसा क्यों किया ? 
उन्हें तो प्यार से उतरना था , २०० रुपे की पर्ची आदर के साथ देनी चाहिए थी 

अब  आप लोग क्या कहेगे ,इस पत्रकारिता पर ?




मंगलवार, 26 अक्तूबर 2010

क्या आप का भी किसी ने छाता उधर लिया है ?

छाता ?
             जय भगवान किसी से कह रहे थे ,
' कौन सा छाता ?
पहली बात तो यह कि मैंने कभी भी तुमसे छाता मांगा ही नहीं और अगर मांगा भी होगा तो मैंने लिया नहीं होगा। अगर तुमसे लिया भी होगा तो लौटा दिया होगा और अगर लौटाया नहीं होगा तो अब लौटाऊंगा भी नहीं , क्योंकि मौसम का कुछ पता नहीं कि कब बारिश हो जाए।

बुधवार, 29 सितंबर 2010

रविवार, 26 सितंबर 2010

मजिस्ट्रेट की पारखी निगाह का क्या कहना ?

'क्या बात है, बहुत परेशान नजर आ रहे हो?'
'क्या बताऊं, कुछ दिन पहले मैंने गलती से युवती का हाथ पकड़ लिया था। उसने शोर मचा दिया। आज अदालत में पेश हुआ तो मैंने अपनी गलती मान ली। इस पर मजिस्ट्रेट ने 500 रुपए जुर्माना कर दिया।'
'तुम्हें किए की सजा मिलनी ही चाहिए थी।'
'हां, लेकिन उसके फौरन बाद वह लड़की अदालत में हाजिर हो गई। मजिस्ट्रेट ने उसे देखकर मुझ पर 500 रुपए का एक और जुर्माना कर दिया कि तुम जरूर नशे में थे।'

रविवार, 19 सितंबर 2010

कैसे छुपाएं ऑफिस का रोमांस

आपका अपने ऑफिस में किसी के साथ चक्कर चल रहा है, परन्तु डरते हैं कि आपकी कहीं जाब न चली जाए? लेकिन चिंता की कोई बात नहीं अब आप कुछ टिप्स का पालन करके अपनी इस दिक्कत से निजात पा सकते हैं.

Lifestyle Blogअपनी दिनचर्या को ना बदलें

अपना ऑफिस रोमांस छुपाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपनी दिनचर्या में कुछ भी बदलाव ना लाएं. “कुछ भी बदलना नहीं चाहिए”. क्योंकि लोग हमेशा कुछ भी महत्वपूर्ण परिवर्तन को महसूस कर लेते हैं, खासकर वह लोग जो अफवाहें फैलाते हैं अतः साधारण से बाहर कुछ भी करने से बचें. इसका अर्थ यह भी है कि अपने नए साथी के साथ लंच में ना जाएं और विशेष रूप से तब जब आप इससे पहले अपने साथी के साथ कभी भी बाहर नहीं गए हों.

किसी को ना बताएं

आप जहाँ काम करते हैं वहॉ आपके कुछ खास दोस्त होंगे जिनको आप अपनी सभी बातें बताते होंगे खासकर अपने नए रिश्ते के बारे में परन्तु अगर आप अपना नया रिश्ता छिपाना चाहते हैं तो एक महत्वपूर्ण बात जान लें कि अपने रिश्ते के बारे में किसी को ना बताएं. हाँ आप किसी को बताना चाहते हैं तो आप अपने घर वालों को और उन लोगों को बता सकते हैं जो आपके साथ काम नहीं करते.

Metro Lifeसंवादों से बचें

अगर आप ऑफिस कार्य के समय अपने साथी के साथ संवाद करना चाहते हैं लेकिन डरते हैं कि यह बात किसी को पता ना चल जाए तो कृपया अपने ऑफिस के मेल का प्रयोग ना करें. इसके लिए आप अपने निज़ी मेल आईडी का प्रयोग कर सकते हैं. यह इसलिए भी ज़रुरी है क्योंकि बहुत से ऑफिस के अपने निज़ी सर्वर्स होते हैं और अगर आईटी विभाग के किसी भी व्यक्ति ने इसे देख लिया तो आप के लिए मुसीबत हो सकती हैं.

इसके अलावा अपने आपको मोबाइल फोन और वॉइस मेल का प्रयोग करने से रोकें क्योंकि इसके द्वारा आप अपने साथियों की नज़र में आ सकते हैं.

कार्यालय के सामाजिक सम्मेलनों में एक साथ भाग ना लें

एक समस्या जो ऑफिस की क्रिसमस पार्टी और स्थानीय बार की पार्टी के साथ जुड़ी है वह “शराब और गपशप” क्योंकि जहाँ शराब होगी वहाँ गपशप ज़रूर होगी. अधिकतर ऐसे सम्मेलनों में ज्यादातर यह देखा गया है कि लोग आपसे कुछ पूछते हैं और आप उसका उत्तर भी देते हैं परन्तु लोग उसका मतलब कुछ और निकालते हैं.

Office Gossipsआपके कार्य में कोई फर्क न आए

आप अपने साथी को एक अच्छा सा प्यार भरा एसएमएस ज़रूर भेजें पर ध्यान दें कि इससे आपका कार्य ना प्रभावित हो मतलब पहले ऑफिस का कार्य फिर दूसरे कार्य के बारे में सोचें. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो इससे आपका कार्य अधूरा रह जाएगा जिसके कारण शायद आपका भविष्य प्रभावित हो सकता है. अगर आप कुछ कर सकते हैं तो ज़्यादा मेहनत करें जिससे शायद आपकी तरक्की हो.

9 से 5 के बीच का प्यार

एक समय था जब ऑफिस रोमांस को निषेध की वस्तु के तौर पर देखा जाता था परन्तु आजकल ऑफिस रोमांस आम होता जा रहा है. लेकिन इसके बावजूद भी ऑफिस में बहुत सी ऐसी चीजें हैं जिससे आप परहेज़ रखें और ऑफिस में इश्क लड़ाना इसके अंतर्गत आता है. अगर आप इससे बचना चाहते हैं तो यह ज़रुरी हो जाता है कि आप सावधानी
रखें.

शुक्रवार, 17 सितंबर 2010

संदेशे आते हैं, हमें फुसलाते हैं!

एक जमाने में ईश्वर से जो चीज़ें मांगा करता था, आज वो सब मेरी चौखट पर लाइन लगाए खड़ी हैं। कभी मेल तो कभी एसएमएस
से दिन में ऐसे सैंकड़ों सुहावने प्रस्ताव मिलते हैं। लगता है कि ईश्वर ने मेरा केस मोबाइल और इंटरनेट कंपनियों को हैंडओवर कर दिया है। पैन कार्ड बनवाने से लेकर, मुफ्त पैन पीत्सा खाने तक के न जाने कितने ही ऑफर हर पल मेरे मोबाइल पर दस्तक देते हैं! इन कंपनियों को दिन-रात बस यही चिंता खाए जाती है कि कैसे मेरा  भला किया जाए?

कुछ समय पहले ही किन्हीं पीटर फूलन ने मेल से सूचित किया कि मेरा ईमेल आईडी दो लाख डॉलर के इनाम के लिए चुना गया है। हफ्ते भर में पैसा अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। सिर्फ दो हज़ार डॉलर की मामूली प्रोसेसिंग फीस जमा करवा मैं ये रक़म पा सकता हूं। ये जान मैं बेहद उत्साहित हो गया। कई दिनों से न नहाने के चलते बंद हो चुका मेरा रोम-रोम, इस मेल से खिल उठा। इलाके की सभी कोयलें कोरस में खुशी के गीत गाने लगीं, मोर बैले डांस करने लगे। मैं समझ गया कि मेरी हालत देख माता रानी ने स्टिमुलस पैकेज जारी किया है।

पहली फुर्सत में मैंने ये बात बीवी को बताई। मगर खुश होने के बजाए वो सिर पकड़कर बैठ गई। फिर बोली...मैं न कहती थी आपसे कि अब भी वक़्त है... संभल जाओ....मगर आप नहीं माने...अब तो आपकी मूर्खता को भुनाने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशें भी शुरू हो गई हैं।

मैंने वजह पूछी तो वो और भी नाराज़ हो गईं। कहने लगी कि आज के ज़माने में दुकानदार तक तो बिना मांगे आटे की थैली के साथ मिलने वाली मुफ्त साबुनदानी नहीं देता और आप कहते हैं कि किसी ने आपका ई-मेल आईडी सलेक्ट कर आपकी दो लाख डॉलर की लॉटरी निकाली है! हाय रे मेरा अंदाज़ा...आपकी जिस मासूमियत पर फिदा हो मैंने आपसे शादी की थी, मुझे क्या पता था कि वो नेकदिली से न उपज, आपकी मूर्खता से उपजी है!

दोस्तों, एक तरफ बीवी शादी करने का अफसोस जताती है तो दूसरी तरफ हर छठे सेकंड मोबाइल पर शादी करने के प्रस्ताव आते हैं। बताया जाता है कि मेरे लिए सुंदर ब्राह्मण, कायस्थ, खत्री जैसी चाहिए, वैसी लड़की ढूंढ ली गई है। बंदी अच्छी दिखती है और उससे भी अच्छा कमाती है। सेल के आख़िरी दिनों की तरह चेताया जाता है कि देर न करूं। मगर मैं बिना देर किए मेसेज डिलीट कर देता हूं। ये सोच कर ही सहम जाता हूं कि बिना ये देखे कि मेसेज कहां से आया है, अगर बीवी ने उसे पढ़ लिया तो क्या होगा?

और जैसे ये संदेश अपनेआप में तलाक के लिए काफी न हों, अब तो सुंदर और सेक्सी लड़कियों के नाम और नम्बर सहित मेसेज भी आने लगे हैं। कहा जा रहा है कि मैं जिससे,जितनी और जैसी चाहूं, बात कर सकता हूं। बिना ये समझाए कि सुंदर और सेक्सी लड़की के लालच का भला फोन पर बात करने से क्या ताल्लुक है। साथ ही मुझे बिकीनी मॉडल्स के वॉलपेपर मुफ्त में डाउनलोड करने का अभूतपूर्व मौका भी दिया जाता है। मानो, इस ब्रह्माण्ड में जितने और जैसे ज़रूरी काम बचे थे, वो सब मैंने कर लिए हैं, बस यही एक बाकी रह गया है!

दोस्तों, ऐसा नहीं है कि ये लोग मेरा घर उजाड़ना चाहते हैं। इन बेचारों को तो मेरे घर बनाने की भी बहुत फिक्र है। नोएडा से लेकर गाज़ियाबाद और गुडगांव से लेकर मानेसर तक का हर बिल्डर मैसेज कर निवेदन कर कर रहा है कि सिर्फ मेरे लिए आख़िर कुछ फ्लैट बाकी हैं। ये सोच कभी-कभी खुशी होती है कि इतने बड़े शहर में आज इतनी इज्ज़त कमा ली है कि बड़े-बड़े बिल्डर पिछले एक साल से सिर्फ मेरे लिए आख़िर के कुछ फ्लैट खाली रखे हुए हैं।

पिछली दिवाली पर शुरू किए सीमित अवधि के डिस्काउंट को सिर्फ मेरे लिए खींचतान कर वो इस दिवाली तक ले आए हैं। उनके इस प्यार और आग्रह पर कभी-कभी आंखें भर आती हैं। मगर मकान भरी आंखों से नहीं, भरी जेब से खरीदा जाता है। मैं खाली जेब के हाथों मजबूर हूं और वो मेरा भला चाहने की अपनी आदत के हाथों।

वो संदेश भेज रहे हैं और मैं अफसोस कर रहा हूं। मकान से लेकर जैसी टीवी पर देखी, वैसी सोना बेल्ट खरीदने के एक-से-एक धमाकेदार ऑफर हर पल मिल रहे हैं। कभी-कभी सोचता हूं कि सतयुग में अच्छा संदेश सुन राजा अशर्फियां लुटाया करते थे, ख़ुदा न ख़ास्ता अगर उस ज़माने में वो मोबाइल यूज़ करते, तो उनका क्या हश्र होता!

बुधवार, 8 सितंबर 2010

मेरी मौत का आखरी पैगाम---------

युवक आखिरी सांसें ले रहा था। उसने अपने छोटे भाई से चिट्ठी लिखवाई और बोला , ' यह खत उमा को दे देना। ' चिट्ठी में लिखा था : ' आखिरी वक्त में भी मुझे तुम्हारी याद आती रही। '
फिर करवट बदलकर बोला : ' इसकी एक कॉपी मोनिका , रजनी , नीरू , कविता , बबिता ,रेशमा , नसरीन , रश्मि , पूजा , सोनू , सखी ,शालू,  मीनू और रोजी को भी भेज देना।

पति और पत्नी लिवर और किडनी

पति और पत्नी लिवर और किडनी की तरह होते हैं।
पति लिवर और पत्नी किडनी जैसी।
अगर लिवर फेल हो जाए तो किडनी भी बेकार हो जाती है।
लेकिन अगर किडनी फेल हो जाए तो लिवर दूसरी किडनी से काम चला लेता है।

रविवार, 5 सितंबर 2010

कारोबार बदलना हो तो क्या करे ?

Closing or Changing a Business
Closing or Changing a Business
किसी व्‍यवसाय किस्‍म को परिवर्तित करना
कंपनी व्‍यवसाय के प्रयोजनार्थ निर्मित एक स्‍वैच्छिक व्‍यक्ति संघ है जिसका एक सुभिन्‍न नाम तथा सीमित देयता है। यह न्‍यायिक व्‍यक्ति है जिसका उन सदस्‍यों से पृथक विधिक अस्तित्‍व हैं जो इसका संघटन करते हैं, वह अपने स्‍वयं के अधिकारों तथा कत्तव्‍यों के लिए सक्षम है तथा उसके पास निरंतर अनुक्रमण की संभाव्‍यता है।
भारत में, कंपनी अधिनियम, 1956 , में कंपनी के गठन, निदेशकों एवं प्रबंधकों की शक्तियों एवं उत्‍तरदायित्‍वों, पूंजी जुटाने, कंपनी की बैठकों का आयोजन करने, कंपनी लेखों के अनुरक्षण तथा लेखा-परीक्षा कंपनी के कार्यों के निरीक्षण की तथा जांच पड़ताल की शक्तियों तथा कंपनियों के अन्‍य कार्यकलापों के लिए प्रावधान किया गया है। यह अधिनियम सूंपर्ण भारत पर तथा सभी प्रकार की कंपनियों पर प्रयोज्‍य हैं चाहे वे इस अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत हो या किसी पूर्ववर्ती अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत हो।
कंपनी अधिनियम को कंपनी कार्य मंत्रालय तथा कंपनी रजिस्‍टार के कार्यालयों , सरकारी परिसमापकों , सरकारी न्‍यासी, कंपनी विधि बोर्ड , निरीक्षण निदेशक इत्‍यादि के माध्‍यम से केंद्रीय सरकार द्वारा प्रशासित किया जाता है। कंपनी रजिस्‍टार नई कंपनियों के निगमन तथा चल रही कंपनियों के प्रशासन के कार्य को नियंत्रित करता है। कंपनी अधिनियम के अंतर्गत, उद्यमी दो प्रकार की कंपनियों का निर्माण कर सकता है नामत: एक निजी कंपनी अथवा एक सरकारी कंपनी।
निजी कंपनी वह कंपनी है जिसके अनुच्‍छेदों के निम्‍नलिखित प्रतिबंध निहित हैं :-
  • अंशपूंजी को ऐसी राशि तक प्रतिबंधित किया जाए जो निर्धारित की गई है किन्‍तु जो एक लाख रुपए से कम नहीं होगी;
  • अपने शेयरों को अंतरित करने के सदस्‍यों के अधिकारों को, यदि कोई हैं, पतिबंधित करें;
  • कंपनी के विगत या वर्तमान कर्मचारियों को छोड़कर जो कंपनी के सदस्‍य हैं, इसके सदस्‍यों की संख्‍या को पचास तक सीमित करें;
  • कंपनी के किन्‍हीं शेयरों या ऋणपत्रों में अभिदान करने के लिए जनता को किसी आमंत्रण को प्रतिसिद्ध करें;
  • अपने सदस्‍यों, निदेशकों या उनके संबंधियों को छोड़कर किन्‍हीं अन्‍य व्‍यक्तियों से जमाराशियां आमंत्रित अथवा स्‍वीकार न करे।
साथ ही, निजी कंपनियों में सदस्‍यों की न्‍यूनतम संख्‍या दो है तथा ऐसी कंपनी के नाम के अंतिम भाग में 'प्रा. लि.' शब्‍द लगाए जाएगें।
कंपनी अधिनियम में यथा परिभाषित सार्वजनिक कंपनी की निम्‍न विशिष्‍टताएं हैं :-
  • इसके शेयर मुक्‍त रूप से अंतरणीय हैं;
  • इसकी सदस्‍यता की कोई उच्‍चतम सीमा नहीं हैं;
  • यह आम जनता को अपने शेयरों में अभिदान करने के लिए आमंत्रित कर सकती हैं;
  • इसकी न्‍यूनतम प्रदत्‍त पूंजी 5 लाख रुपए की या ऐसी उच्‍चतर प्रदत्‍त पूंजी है जो निर्धारित की जाए;
  • यह एक निजी कंपनी है जो किसी सरकारी (सार्वजनिक) कंपनी की सहायक कंपनी है।
साथ ही सार्वजनिक कंपनी में सदस्‍यों की न्‍यूनतम संख्‍या सात है तथा ऐसी कंपनी के नाम के अंतिम भाग में 'लिमिटेड' शब्‍द लगाया जाएगा। कंपनी के गठन के पश्‍चात, उद्यमी अपने व्‍यवसाय संगठन की किस्‍म को सार्वजनिक से निजी में या विपर्ययेन बदल सकता है। कंपनी अधिनियम में भी ऐसे रूपांतरणों के लिए प्रावधान निहित हैं।
  Business निजी कंपनी को सार्वजनिक कंपनी में रूपांतरित करना
  Business सार्वजनिक कंपनी को निजी कंपनी में रूपांतरित करना
     

नाबालिग बेटी को छेड़ते देखा तो मार डाला

नव भारत times में आज खबर क्या आप को कुछ सोचने पर मजबूर नहीं कर रही , , क्या आप भी अपनी बहन बेटी के साथ इस तरह का सलूक करने वाले का यही हश्र करना चाहते है , और करना भी चाहए

शुक्रवार, 3 सितंबर 2010

हेल्पलाइन – एक ब्लॉग पर सारी जानकारियां

 अमित जैन आपके लिए लाया है एक ऐसा पन्ना जहां आपको हर तरह की जानकारी एक क्लिक पर मिल जाएगी। पासपोर्ट के लिए अप्लाइ करना हो या बर्थ सर्टिफिकेट बनवाना हो या क्रेडिट कार्ड के फ्रॉड की शिकायत करनी हो, हर जानकारी का सोर्स है यहां। आपको साइट-दर-साइट भटकने की या सर्च करने की ज़रूरत नहीं है। । यह लिस्ट दिन-ब-दिन बढ़ती रहेगी

ड़े वक्त में काम आने वाले नंबर


टैक्स


अपना कारोबार


कैसे और कहां अप्लाइ करें?


कैसे/कहां शिकायत करें


कैसे रजिस्टर कराएं?


कैसे जांचें/पता करें?


कैसे बुक/जमा करें?


कैसे पाएं?


विभिन्न राज्यों की पुलिस वेबसाइट

गुरुवार, 2 सितंबर 2010

पेट्रोल पंप का पंगा

मिंटो रोड पर रहने वाले सतेंद्र शर्मा अपनी नई गाड़ी लेकर कनॉट प्लेस के पेट्रोल पंप पहुंचे। उन्होंने टैंक फुल करने को कहा और मीटर के हिसाब
से 40 लीटर पेट्रोल के पैसे दे दिए। हफ्ते भर बाद दोस्तों से उन्हें पता चला कि उनकी गाड़ी के टैंक की कुल कपैसिटी 35 लीटर है। कार कंपनी से पेट्रोल टैंक की कपैसिटी कन्फर्म करने के बाद शर्मा पेट्रोल पंप के मैनेजर के पास शिकायत करने पहुंचे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। शर्मा जी के पास पेट्रोल की रसीद नहीं थी।

पेट्रोल भरवाते वक्त आपके साथ भी कई बार ऐसा होता होगा। कई बार पता नहीं चलता होगा कि पेट्रोल कम दिया गया है। कभी सुविधाएं नहीं, तो कभी पेट्रोल भरने वाले पाइप में लीकेज। आमतौर पर हमें पता नहीं होता कि ऐसी दिक्कतों की शिकायत कहां की जाए। आइए आपको विस्तार से बताते हैं:

सतर्क रहें

- पेट्रोल भरवाने से पहले गाड़ी का इंजन बंद कर दें।

- पंप का मीटर चेक कर लें कि वह जीरो पर है कि नहीं। हालांकि ज्यादातर पंपों पर सेल्समैन खुद ही मीटर चेक करने को कहते हैं।

- मीटर पर पेट्रोल या डीजल का रेट भी डिस्प्ले किया जाता है। उसी के हिसाब से पेमेंट करें।

- चेक करें कि मीटर पर डिस्प्ले किया गया रेट, पंप के बोर्ड के रेट से मेल खाता है या नहीं।

- पेट्रोल भरवाने के बाद रसीद जरूर लें। याद रखें बिना रसीद के आपकी सुनवाई ठीक ढंग से नहीं हो पाएगी।

- पेट्रोल पंप पर अगर कोई कर्मचारी आपसे बदसलूकी करे, टैंक में पेट्रोल डालने वाले ट्यूब में लीकेज हो या फिर ऐसी ही कोई और दिक्कत हो तो मैनेजर से शिकायत करें। अगर मैनेजर मौजूद नहीं है तो कंप्लेंट बुक में एंट्री करें।

जानकारी जरूरी है

- किसी भी पेट्रोल पंप पर पीने का साफ पानी और टायरों में हवा भरने के लिए प्रेशर पंप का होना जरूरी है। इन दोनों सुविधाओं के लिए चार्ज नहीं किया जा सकता।

- ग्राहकों की सुविधा के लिए पेट्रोल पंप चलाने वाले खाने-पीने की दुकान, रिपेयर शॉप या फिर फोन बूथ जैसी एक्स्ट्रा सुविधा दे सकते हैं।

- पेट्रोल पंप पर फर्स्ट-एड बॉक्स और शिकायत-सुझाव पुस्तिका का होना जरूरी है।

-सभी पेट्रोल पंप मालिकों के लिए जरूरी है कि वे उपलब्ध स्टॉक की जानकारी के साथ-साथ प्रॉडक्ट्स की कीमतें भी डिस्प्ले करें।

- दिल्ली में पेट्रोल पंप आमतौर पर सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक खुलते हैं। हर पंप के लिए यह जरूरी है कि वे अपने वर्किंग आवर्स डिस्प्ले करें। सभी पेट्रोल पंपों पर संबंधित ऑयल कंपनी के अधिकारियों (एरिया मैनेजर आदि) के फोन नंबर डिस्प्ले होना जरूरी है।

- पंप में मिलने वाले प्रॉडक्ट्स की क्वॉलिटी के लिए सिर्फ पंप मालिक ही नहीं, तेल कंपनी भी जिम्मेदार है।

- पेट्रोल पंप के कर्मचारी आपसे यह नहीं कह सकते कि हमारे यहां सिर्फ प्रीमियम पेट्रोल/डीजल ही है।

कैसे करें मिलावट की जांच

- अगर पेट्रोल/डीजल में पानी की मिलावट का शक हो, तो पंप पर उपलब्ध 'वॉटर फाइंडिंग पेस्ट' यूज करें। वॉटर फाइंडिंग पेस्ट का रंग हरा होता है। इस पेस्ट को टैंक से पेट्रोल/डीजल नापने वाली रॉड के एक सिरे पर लगाकर टैंक की निचली सतह से टच करते हैं। चूंकि पानी पेट्रोल/डीजल से भारी होता है इसलिए टैंक की निचली सतह पर ही जमा होता है। रॉड के एक सिरे पर लगा पेस्ट पानी के संपर्क में आते ही गुलाबी हो जाता है। अगर मिलावट कन्फर्म हो जाए, तो पंप के मैनेजर और ऑयल कंपनी को सूचित करें।

- पेट्रोल में मिट्टी के तेल आदि की मिलावट चेक करने का सबसे आसान तरीका है फिल्टर पेपर टेस्ट। यह पेपर सभी पंपों पर होता है। फिल्टर पेपर पर एक बूंद पेट्रोल नॉजल से डालें। अगर दो मिनट में पेट्रोल उड़ जाता है और कोई धब्बा नहीं उभरता, तो कोई मिलावट नहीं है। पेट्रोल उड़ने के बाद अगर गुलाबी रंग के अलावा कोई और धब्बा रह जाता है, तो मिलावट है।

- पेट्रोल/डीजल की मात्रा चेक करने के लिए पेट्रोल पंप पर पांच लीटर का यंत्र होना जरूरी है। इस पर राज्य सरकार के माप-तौल विभाग की सील लगी होनी चाहिए।

- शक होने पर आप पेट्रोल/डीजल की मात्रा चेक कराने के लिए कह सकते हैं।

ऐसे चेक करें पेट्रोल पंप

जिस पेट्रोल पंप से आप पेट्रोल लेते हैं, उसे चेक करने का एक तरीका है। इसके लिए सबसे पहले ऐसा पंप चुनें, जहां 'ऑटो कट ऑफ नॉजल' हो। अपनी गाड़ी का टैंक फुल कराएं और जैसे ही ऑटो कट ऑफ हो, सप्लाई रोक दें। टैंक में जबर्दस्ती तेल न डलवाएं। अब अपनी गाड़ी की मीटर रीडिंग नोट कर लें। कुछ दिन बाद फिर उसी पंप से ऑटो कट ऑफ टैंक फुल कराएं। मसलन पिछले समय आपकी मीटर रीडिंग 5000 थीऔर अब 5500 है। इस बार के ऑटो कट ऑफ में 30 लीटर तेल आया, तो 500 को 30 से भाग करें। इससे आपकी गाड़ी का ऐवरेज 16.66 किमी/लीटर आता है। इस तरह यही प्रक्रिया दूसरे पंप पर भी आजमाएं। जिसका ऐवरेज बेहतर आए, वहीं से तेल डलवाएं।

कहां और कैसे करें शिकायत (हेल्पलाइन)

अगर आपको पेट्रोल की क्वॉलिटी, सर्विस या फिर सेल्समैन के बर्ताव से संबंधित किसी भी पॉइंट पर दिक्कत आती है, तो सबसे पहले पंप मैनेजर से शिकायत करें या फिर कंप्लेंट बुक में लिखें। बात न बने तो फिर आजमाएं ये तरीके :

इंडियन ऑयल और आईबीपी

- इंडियन ऑयल और आईबीपी के ग्राहक इस टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज करवाएं : 18002333555 (यह लाइन सातों दिन और 24 घंटे काम करती है)। खत लिखकर या फोन से यहां भी की जा सकती है शिकायत : चीफ डिविजनल मैनेजर, रिटेल सेल्स (दिल्ली डिविजन), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, बाबर रोड, नई दिल्ली-110001, फैक्स : 011-23414861, फोन : 11-23411545 - वेबसाइट पर जाकर भी दर्ज कर सकते हैं शिकायत : www.iocl.com पर 'राइट टु अस' ऑप्शन पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करें।

हिंदुस्तान पेट्रोलियम

हिंदुस्तान पेट्रोलियम के उपभोक्ता इस टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें : 60506050 (यह लाइन सातों दिन और 24 घंटे काम करती है।)

- यहां भी की जा सकती है शिकायत : चीफ रीजनल मैनेजर, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, दिल्ली रिटेल ऑफिस, सातवीं मंजिल, स्कोप मीनार, लक्ष्मी नगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर, दिल्ली-110092, फैक्स: 011-22010616, फोन: 22010615

वेबसाइट : www.hindustanpetroleum.com

वेबसाइट के 'रिटेल' ऑप्शन में जाकर 'राइट टु अस' में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

भारत पेट्रोलियम

- भारत पेट्रोलियम के ग्राहक इस टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें : 1800222725 (यह लाइन सातों दिन और 24 घंटे काम करती है)

- यहां भी की जा सकती है शिकायत : सीनियर मैनेजर (जन शिकायत), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, बिजवासन, नई दिल्ली-110061

फोन : 011-28062163/28063416

वेबसाइट : www.bharatpetroleum.com

इस पर कंप्लेंट/फीडबैक ऑप्शन में जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

कॉमन हेल्पलाइन नंबर : किसी भी पेट्रोल कंपनी के ग्राहक कहीं से भी टोल-फ्री नंबर 155233 डायल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

फिर भी न बने बात तो

अगर आप ऑयल कंपनी की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं, तो पेट्रोलियम मंत्री या सचिव, भारत सरकार को इस पते पर लिखें : जन शिकायत, पेट्रोलियम मंत्रालय, जी-18, शास्त्री भवन, नई दिल्ली-110001

वेबसाइट : www.pgportal.gov.in


कौन सी कंपनियां देती हैं तेल

पब्लिक सेक्टर में चार तेल कंपनियां हैं : इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और इंडियन ब्रिटिश पेट्रोलियम (आईबीपी)। आईबीपी का अधिग्रहण इंडियन ऑयल ने कर लिया है। इस साल के आखिर तक आईबीपी के सभी पेट्रोल पंपों पर इंडियन ऑयल के बोर्ड नजर आएंगे।

रविवार, 15 अगस्त 2010

आशिक की जबानी -२

गम की एक काली घटा ,
खुशियों के सूरज पर भारी होती है ,
अपनों की एक चोट ,
गैरो के हर सितम से करारी होती है .............................

आशिक की जबानी -१

सूरज ने इतना न कभी जलाया ,
जितना चांदनी ने जलाया है ,
ओरो ने इतना गम नहीं दिया है कभी ,
जितना अपनों ने रुलाया है .........................................

शनिवार, 31 जुलाई 2010

भगवान के नाम पर

भिखारीः हलो , ताज होटल।
ताज होटल का कर्मचारीः हां जी।
भिखारीः एक बर्गर , एक बिरयानी और एक रसमलाई भेज दो।
ताज होटल का कर्मचारीः किसके नाम से भेजूं सर।
भिखारीः भगवान के नाम पर भेज दो |

लड़की पटाने का शेर -नंबर 15

क्या सोच कर तेरे हुस्न की तामीर की होगी,
क्या सोच कर खुदा ने तुझको बनाया होगा.
बड़ी प्यारी लगी होगी उसको भी तेरी सूरत,
जब जब नक़ाब तेरे रुख़ से हवा ने हटाया होगा.

मत सता लड़की को - जोके

लड़की लड़के से : मत सता लड़की को पाप होगा , तू भी किसी दिन किसी लड़की का बाप होगा।
लड़का लड़की से : भगवान करे तेरा कहा सच्चा हो , जो मुझे बाप कहे वो आपका ही बच्चा हो।

नहीं पता था जानू तुम इतनी जल्दी बदल जाओगे

सोचा था आप की बाहों में सोयेगे , मगर तकिये से काम चलाना पद्फ्ता है ,मुआ ये  pc  न हुआ मेरी सोतन हो गया , और ये तुमहरा  ब्लॉग , तो मेरी जान का दुश्मन हो गया है ,क्यों चिपके रहते हो इस से सारे दिन , पहले कहते थे , मै हू और तुम हो , अब तो ये  pc  रह गया हम बिन , आज इस डिब्बे को गुल न किया तो मेरी २ साडी की जगह एक ही धो देना , 


अरे  अरे भाई डरो मत , अब मै रोज यही सुनता हू , आप भी बताओ क्या ये आप के साथ भी होता है , और इस से बचने का तरीका जरूर बताना

शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

गुम होती प्‍यार की मिठास

एक समय था जब लड़का किसी लड़की को मन की मन महीनों तक प्यार करता रहता था। लेकिन उसे कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था। प्यार तो प्यार ही होता है। लाख छुपाए नहीं छुपता। जिस लड़की को वह चाहता था वह लड़की भी लड़के की भावना को समझ लेती थी, लेकिन कहने से शर्माती थी। आज समय बिलकुल बदल गया है। आज दोनों के पास धैर्य की कमी होती जा रही है। दो दिन निगाहें मिली नहीं कि तीसरे दिन प्‍यार का इजहार हो जाता है । यह इजहार, इजहार न होकर अश्‍लीलता का प्रदर्शन लगता है। यह प्रेम, प्रेम से अधिक शरीर की प्‍यास बुझाने का अवसर लगता है ।
आज की युवा पीढ़ी पहली बार में ही सारे हदें पार कर जाने की सोंच के साथ प्‍यार की पींगें बढ़ाती है । पहले एक लड़का जब एक लड़की से प्यार का इजहार करता था, तो लड़की शर्माकर सिर झुका लेती थी। यदि उसे लड़के का प्यार कबूल भी होता था तो अपने दोनों हाथों की ऊंगलियों से दुपट्टे को लपेटते हुए शर्माकर चली जाती थी। लड़का बेसब्री से दूसरे दिन तक उसके जवाब का इन्तजार करता था। उस इन्तजार में जो मिठास होती थी, उसका स्वाद तो दूर अब उसका अंश भी नहीं दिखता है। करवटे बदलते हुए रात गुजारने के बाद लड़का अपनी जवाब पाने के लिए उत्सुक रहता था। लड़की आती और थोड़ी बातें करने के बाद उसके प्यार को स्वीकार कर लेती थी। फिर दोनों का गला मिलने का सुख मन की मुराद पूरी होने जैसा था। आज कालचक्र ने जिस गति से करवट लिया है, उसमें युवा पीढ़ी को पलक झपकते ही प्यार होता है। वह अपने प्यार का इजहार भी करता और लड़की उसके इजहार को इस तरह लपकती है, जैसे क्रिकेट के मैदान में बल्लेबाज के द्वारा मारे गए शॉट पर उछला गेंद हो। लड़की का प्यार पाकर लड़कों की भी मुराद पुरी होती है। लेकिन यह मुराद उसके मन की नहीं, तन की होती है। पहले जैसे अब प्रेमी-प्रेमिका एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर नहीं चलते, बल्कि कमर से लिपटते, बदन से चिपटते प्‍यार का भोंडा प्रदर्शन करते चलते हैं । उनका प्यार, प्यार के लिए नहीं बल्कि एक-दूसरे का शरीर भोगने के लिए होता है ।
दोनों एक-दूसरे को इस तरह से चुंबन लेते हैं जैसे मीलों पैदल चलने के बाद किसी प्यासे को पानी मिला हो। आज का प्यार और उसके इजहार का तरीका जिस तरीके से अश्‍लील होता जा रहा है, वह सोचने पर मजबूत करती है कि प्‍यार और उसकी मिठास अभी बची भी है या नहीं । शायद यही वजह है कि आजकल के प्रेम विवाह कुछ दिन बाद ही कच्‍चे धागे की तरह टूट रहे हैं । दिल्‍ली जैसे महानगर को तलाक की राजधानी कहा जाने लगा है। प्‍यार की न वह भावना है और न ही वह समर्पण... है तो बस उच्‍छृंखलता, अश्‍लीलता, वासना और एक-दूसरे को जीतने की चाह । जीत लेने के बाद यही प्‍यार फीका लगता है और रिश्‍ते टूट जाते हैं ।

आप सभी के मन में भी इस तरह कुछ न कुछ कभी न कभी आया होगा , यदि हा तो अपनी भावनाओ को अबिव्यक्त भी करे ,

तकरार के बाद करो प्यार का इजहार

लड़ाई करने के बाद आपने भी अपने पति को मनाने की कोशिश जरूर की होगी । वैसे शायद ही ऐसे कोई पति-पत्नी होंगे जिनके बीच छोटी-मोटी नोंक-झों न चलती हो । इतना तो आखिर हर प्यार में जायज है । इन छोटे-छोटे झगड़ो से ही तो असल में प्यार बढ़ता है । आप रूठ जाएंगे, फिर वह आपको मनाएंगे । उनके मनाने की अदा पर ही बई बार न चाहते हुए भी प्यार उमड़ पड़ता है और आप हंस देते हैं । आपको कितना ही गुस्सा आ रहा हो और मन में ठान भी लिया हो कि अब चाहे कुछ भी हो जाए पर इस बार नहीं मानेगें लेकिन क्या करे प्यार है ही ऐसी गजब की चीज कि फिर सारे गिले-शिकवे आप भूल जाते हैं । पर यह लड़ाई बढ़ने नहीं चाहिए नहीं तो आपके रिश्ते में खटास भी पैदा हो सकती है।

कई बार ऐसा होता है कि गलती आपकी नहीं होती और आप यह सोचकर कि मैं माफी क्यूं मांगू जब मेरा कोई कसूर ही नहीं है लड़ाई को और तूल दे देती हैं । पर आप शायद यह नहीं जानती कि गलती न होने पर भी मनाने की आपकी यही अदा उन्हें घायल कर सकती है । कई बार देखने में आया है कि आपस में तकरार बहुत सी बेवजह बातों को लेकर होती है । जैसे जूते गलत जगह उतार दिए, कपड़े कैसे अस्त-व्यस्त रख दिए, रिमोट मुझे चाहिए, मुझे फोन क्यों नहीं किया, आज कहीं जाने का प्लान था तो मना कर दिया वगैरह..वगैरह । लेकिन इन झगड़ो में भी कहीं न कहीं प्यार ही छुपा होता है । यह तो बात हुई छोटे-मोटे झगड़ो से निपटने की । पर अगर कभी आपकी लड़ाई बढ़ जाए तो फिर आप उन्हें कैसे मनाती हैं। मनाने के बहुत से नुस्खे हैं । कोमल कहती हैं कि उनकी शादी को पांच साल हो चुके हैं और ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब वह लड़ते न हों लेकिन फिर वह आपस में जल्दी ही मान भी जाते हैं । हां अगर लड़ाई ज्यादा ही बढ़ जाती है तो फिर वह उस दिन उनका मनपसन्द खाना बनाती हैं । जिसे वह खास अन्दाज में पेश करती हैं । कोई तोहफा देकर उन्‍हें मनाती हैं । वहीं नवविवाहिता सलोनी की शादी को अभी एक ही महीना हुआ है लेकिन उनके पति को अकसर बाहर जाना पड़ता है । ऐसे में सलोनी कोशिश करती हैं कि जब भी उनके पति बाहर जाएं तो वह कुछ ऐसा करें कि उन्हें अपनी पूरी ट्रिप में उनकी याद आती रहे । मसलन उनकी शेविंग किट में बहुत सी चॉकलेट डाल देना, उनके लगेज बैग में कपड़ो के साथ अपनी फोटो रख देना, किसी जगह पर कोई प्यार से लिखा खत डाल देना । शालू कहती हैं जिस दिन उनके पति को गुस्सा आ जाता है उस दिन वह उन्हें सबसे पहले देर से उठाती हैं । उन्हें खूब सोने देती हैं और उठने के बाद बिना नहाए नाश्ता देती हैं । पूरे दिन टीवी का रिमोट उनके हाथ में होता है और अगर वह कोई न्‍यूज चैनल देखते हैं तो वह भी उनके साथ देखने लगती हैं। रात को कहीं बाहर घूमने जाते हैं और डिनर करते हैं ।

रविवार, 25 जुलाई 2010

50/= के नोट से पप्पी तो नहीं , चाटा जरूर मिल गया

अरे भयो आज आपको एक मजेदार किस्सा सुनाता हू , मेरे दोस्त  छगनलाल को टीवी का बहुत शोंक है , बेचारा हर बात को सच समझ लेता है ,एक दिन बेचारे ने  MAC DONAAAALD  का एक विज्ञापन बड़े शौक से देखा , और बड़ा खुश हुआ ,
लड़की की पप्पी और वो भी 50/= में . भाई ने किसी तरह अपने मोहल्ले की कन्या पटी और फिर उसे  MAC D   ले कर चला गया , वह बड़ी ही खुशी से अपनी मेहनत के 100/=  में २ BURGER  खुश होते हुए लिए , बस फिर क्या था , वो तो सपनो में उड़ने लगा , बस अब पप्पी मिलेगी , अब पप्पी मिलेगी , बस अब मिली ,अब मिली , लेकिन लड़की ने शायद वो विज्ञापन नहीं देखा था , वो तो खाने के बाद कड़ी हुई और बोली चलो , हमारे छगनलाल  को गुस्सा आ गया और बोला ,ये क्या हमने तुम्हे 50/= का  BURGER  खिलाया और तुमने पप्पी भी नहीं दी , और ये क्या हमारे छगनलाल को पप्पी तो नहीं ,चाटा जरूर मिल गया , अब आप ही बताए की यहाँ गलती किस की है , छगनलाल की , लड़की की , या MAC -D  की

शनिवार, 24 जुलाई 2010

क्या आप ने चलान भुगता है ?

राहुल भैंस के ऊपर बैठ कर घूम रहा था।
रमेश : तेरा चालान होगा।
राहुलः क्यों ?
रमेशः हेलमेट नहीं पहना है इसीलिए !
राहुलः जरा , नीचे देख , मैं फोर वीलर चला रहा हूं।

शुक्रवार, 23 जुलाई 2010

बडो मह्गो है भाई ये नर्सिंग होम

अरे  भाई आज एक गजब और देख लियो जिंदगी में , अब पूछ भी लो , क्या देख लिया मैंने एस्सा , आज मेरी बीवी की तबियत थोड़ी नासाज हो गई , खुद भी डॉ है , पर नहीं नर्शिंग होम का भूत सवार था , हम ने भी एक मजा ले लिया , कहा खुद को डॉ नहीं बताओ गी तो ही नर्सिंग होम में  check  karauga  बस यही मात खा  गया , अब पहुचे हम कृष्णा नगर के ..............नर्शिंग होम में , वाह जी बड़ी चका चूक सफाई ,जाते ही नंबर आ गया , और डॉ........ ने बड़ी मीठी मीठी बाते कर के तुरंत अपने नुर्शिंग होम में ही   ultra sound  करवाया ,और तुरंत 600/=  झटक लिए   साथ में 500/=  का  injection ,  450/=  की दवाई लिखी , जो उन्होंने अपने नुर्शिंग होम हो चेमिस्ट खोल राखी है , वाही से लेने के लिए कहा ,वो  injection   wholesale market me 125/= और दवाई 225 /=  की थी , बाहर पता करने पर पता चला की यहाँ सब के साथ यही होता है ,

क्या ये सज्जन लूट खसोट नहीं है , क्या कोई गरीब व्यक्ति इस तरीके से इलाज करवा सकता है , क्या गरीबो को जीने का हक नहीं है , हमारी सरकार इस पार्कर के निरंकुश डॉ पर लगाम क्यों नहीं लगाती , उन्हें मनमाफिक फीस और चिकित्सा व्यवसाय में इस तरीके का  profit  पर लगाम लगाती

शनिवार, 17 जुलाई 2010

अरे आज मेरा ब्लॉग मेरी ताजी ताजी बीवी ने पढ़ लिया

अब अपने दिलके उप्पर क्या क्या बिता क्या क्या बताऊ भयो , आज सुबह सुबह मेरा  pc  महाराज खुले रह गए और मेरी किस्मत ही खराब थी की मेरा ब्लोग भी खुला रह गया  था ,कल रत ही अपने मन की भाडास ब्लॉग पर लिख मरी थी , वो उस के हाथो पड गई , यार सुबह से चाय पानी तो दूर की कोड़ी नजर आ रही है , उस ने बात भी बंद कर दी है , और मै एक याचिकाकरता की तरह उस के समक्ष नतमस्तक मुद्रा में सुबह से खड़ा हू , कोई भगवन से प्राथना करो की वो कम से कम एक कप चाय (ठंडी भी चलेगी ) देने की किरपा करे , यार बड़ा मन जलता है जब वो मुझे चिडा चिडा कर चाय के साथ बिस्कुट खा रही है   ,

बाकि शाम को ................

लो जी मैंने भी प्रेम विवाह कर ही लिया

यारो बड़े दिन हो गए कुछ भी नहीं लिखा , कोई बात नहीं निकली मन से , कोई हँसी नहीं आई , कोई मजा नहीं लिया , किसी लड़की को पटाने का कोई तरीका भी नहीं लिखा , किसी को कुछ भी नहीं किया , 
अब  ये तो बता दू मैंने एस्सा क्यों किया , 
अब  क्या बताये भाई , लड़की पटाने का तरीका बताते बताते हम ने भी एक छोरी पसंद कर ली और अपने तरीको में से कुछ बाण उस पर चला दिए , अब क्या करू भयो ,मै तो फसगयो भाई , मेरे को उससे घना ही प्यार हो गयो , फिर के था , घर मे जब बताया तो पहली बार पता चलो की भूकंप किसी कहवे है , क्या क्या गली पड़ी , वाह मजा ही आ गयो . अब उस के घर की बात लोजी , वह का हाल भी यही था , शायद दोनों के घर वाले यो न समझ पायो की अरे तुम ने इन्हें डाक्टरी पड़वा दी ,तो बाल्कन को क्या अपने अछे बुरे की समझ न आवेगी , पर नहीं हिटलर फिर जिन्दा हो गया , कोई बात न , हम भी लगे रहे अपने काम में और २ दिन में ही सारा इंतजाम कर के शादी कर ही ली ,इस विवाह में हमारा साथ दिया हमारे ५ परम मित्रों ने ,
आज एक हरयान्वी भाई से मुलाकात हुई थी , तो मैंने सोचा क्यों न कुछ कुछ इस मीठी सी भाषा में लिख दू , कैसी लगी महारी हरयान्वी , अभी नयो नयो हू , कही न कही गलती हो गयी हो तो , उसे मत सोच्यो

शुक्रवार, 16 जुलाई 2010

क्या आप को भगवन का भरोसा है ?

पंडित जी : भगवान , अगर तुम मुझे 100 रुपये दो , तो 50 रुपये मैं मंदिर में दूंगा।
थोड़ी दूर जाने के बाद पंडित को 50 रुपये का नोट मिल गया।
पंडित डी : वाह भगवान , इतना भी भरोसा नहीं , अपने पैसे पहले ही काट लिए

सोमवार, 12 जुलाई 2010

म्हारी ताई ने देखी पिक्चर - कुकर यो भी जान लो

एक बार इक ताई पिक्चर देखन गई तो फिर एक छोरे ने पूछा , रे ताई पिकचर देख आई कै ?
ताई बोली
, रे छोरे के बताउ थारे को..
छोरा बोला , के बात होली ताई ?
ताई बोली , बात के हॉणी हे.. जब मैं फिलम देखण लगी तो फिलम में मेरे जेठ जेसे एक मरद था। फिर के होणा था सारी फिलम में घुघट काढ़ कर बेठी रई।