मंगलवार, 12 जनवरी 2010

तलाक को फिर शादी मे बदलने की कोशिश - भाग 1

आज अपनी होने वाली पत्नी के साथ उस की दोस्त से मिला , बातो ही बातो मे पाता चला की उस की दोस्त भी डॉक्टर है , मिलने के बाद महसूश हुआ की दिव्या बड़ी ही मिलन सार थी , उस का बेबी भी आछा था , पर मै उस से मिला नहीं ,
तलाक के बाद , वो अपनी जिन्दगी अपने बच्चे के साथ एक अजीब सी तन्हाई मे गुजार रही है , वो बातो मे बात करते करते अचानक ही आखो के किसी कोने मे तनहाई की तड़प का उभर आना , और बड़ी सफाई से उस तड़प को छीपा जाना , लगता है की ज़माने से मिले हुए दर्द को मेरी इस नै दोस्त ने अपने सीने मे ना जाने किस कोने मे छिपा कर , उस पर मुस्कराहट का lamination कर दिया है , एक सवाल ना जाने क्यों मेरे मान मे अब भी मेरे इस दोस्त के लिए बार बार आ रहा है , की क्या तलाक लेने के बाद क्या ये वापस उस ही को अपना जीवन साथी नहीं बना सकती , जिस के साथ दिव्या ने प्यार किया फिर शादी की , फिर अपने प्यार से प्यार का तोहफा यानि मातृत्व पाया , एस्सा क्या हुआ की दो प्यार करने वाले , एक दुसरे पर जान देने वाले अचानक ही इतने अजनबी हो गाये , क्या इन सब मे इन दोनों के vayvhaar का हाथ था , या दोनों की family का कोई हाथ था ,, मै तो चाहता हु की दिव्या फिर से अपनी खुशियो को पा ले , दिव्या आप अपने पति को शायद अभी भी इतना की प्यार करते हो जितना पहले , की जब करते थे , रेनू ने मुझे बताया था की आप के बेटे की शकल बिलकुल आप के पति पर है

लाख कोशिश करो हमे भुलाने की ,
हम तुम्हे याद तो आते तो होगे ,
वो प्यार के लम्हे तुम्हे याद तो आते होगे ,
हम जो रोकते आये अपने आसुओ के सैलाब को ,
वो तुम्हारी आखो से बहते तो होगे


दिव्या आप अपने पति को ये जरूर लिखना ,
शायद आप अपने पति को फिर से पा लो ,
मेरी शुभ कामनाए आप के साथ है

1 टिप्पणी:

  1. हमारी भी शुभकामनायें हैं दिव्या जी के साथ
    कि उनकी रूठी हुई खुशियां लौट आयें

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