बुधवार, 6 जनवरी 2010

रूठी महबूबा मानाने का १५१ शेर - शेर नंबर -2

बड़ी मुदत से चाहा है तुझे
बड़े दुओं से चाहा है तुझे
तुझे भूलने की सोचु कैसे
किस्मत की लकीरों से चुराया है तुझे

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