शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2010

दर्द दिल का -४


एक है सपना है तुझे अपना बनाने का,
चिराग भी तू है रचना मेरे घराने का,
बड़ा बोझ है मेरे सीने मैं तेरी जुदाई का,
आकर क्या लोगे तुम यह गम मिटाने का.





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