रविवार, 28 फ़रवरी 2010

शायरी





बेकदर हो गए हैं कुछ दोस्त हमारे,
जो हमारी ज़रूरत तक महसूस नही करते,
कभी बोहत बाते किया करते थे हम से,
अब तो याद तक नही करते!


1 टिप्पणी:

  1. बहुत अच्छा । बहुत सुंदर प्रयास है। जारी रखिये ।

    हिंदी को आप जैसे ब्लागरों की ही जरूरत है ।


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