मंगलवार, 16 फ़रवरी 2010

रूठी महबूबा को मानाने के लिए शेर -नंबर ४


मिटा दी निशानिया प्यार की तुमने,
एक चीज़ तुम मिटा नही सकते,
दिल में है तस्वीर तुम्हारी,
जिसे तुम मिटा नही सकते.


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