रविवार, 7 मार्च 2010

सर्फिंग में सुरक्षा ?






इंटरनेट सर्फिग के दौरान भी ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ वाला फार्मूला अपने रंग दिखाता है। न जाने किस साइट से और किस मेल के रूप में वॉयरस आपके कंप्यूटर को हानि पहुंचा दे, इससे हर कदम पर सावधान रहने की जरूरत है। हालांकि सर्फिग के दौरान जो सामान्य सर्चइंजन और साइट्स आप इस्तेमाल करते हैं उनकी तरफ से भी अपनी साख और ग्राहकी बनाए रखने के लिए काफी इंतजाम किए जाते हैं।

साखदार सर्च इंजन में तो नुकसान की आशंका वाली हर घातक साइट के बारे सूचना आपको दे दी जाती है कि यह साइट आपके कंप्यूटर को हानि पहुंचा सकती है। ऐसे में यह आप पर है कि उन साइट्स के आकर्षक होने और उपयोगी लगने पर भी आप संकट में फंसने से खुद को बचाएं।

पॉपअप ब्लॉक करे: इसी तरह पॉपअप के जरिए या थर्ड पार्टी डिमांड को बाधित करके भी आप अपने कंप्यूटर लैपटॉप और मोबाइल को हानिकारक साइटों के प्रकोप से बचा लकते हैं।

फिशिंग फिल्टर: एक अन्य उपाय यह है कि आपके इंटरनेट एक्सप्लोरर पर फिशिंग फिल्टर की व्यवस्था रहे जिससे हर खुलने वाली साइट या नेट पन्ने के फालतू पॉपअप से आप अपने कंप्यूटर को सुरक्षित रख सकें।

लोकप्रिय नामों से बचें : हाल ही में कैटरिना और एसआरके जैसे नामों की खोज के दौरान हानिकारक वॉयरस ने बहुत से कंप्यूटरों को अपना निशाना बनाया था। यह वॉयरस इतना खतरनाक था उसने पूरी हार्डडिस्क क्षतिग्रस्त कर दी। गूगल की गलत स्पैलिंग या एमएसएन से मिलते-जुलते नाम से धोखा देते सर्चइंजन भी ईसर्फिग के दौरान हानि पहुंचाने का काम कर सकते हैं। इनसे परहेज करना चाहिए।

आकर्षण गेम्स और चित्रों का: देखने में आया है कि ज्यादातर कंप्यूटरों में बेहद लुभाते गेम्स, लुभावने चित्रों और एडल्ट मैटिरियल में रुचि दिखाने के दौरान लोगों के कप्यूटर में खतरनाक वायरस आया। इनसे बचने में ही भलाई है।

रक्षक बने भक्षक: इंटरनेट सर्फिग के दौरान आपके कंप्यूटर को हानिकारक वॉयरस से बचाने का दावा करते पॉपअप भी सामने आते हैं। ये आपके कंप्यूटर को खतरे में बताते हुए संकटमोचक के रूप में एंटीवॉयरस प्रोग्राम मुफ्त डाउनलोड करने का न्योता देते हुए अवतरित होते हैं। इस बारे में हमारी सलाह यही है कि इनका कतई भरोसा न करें। ये आपके कंप्यूटर को हैक करने का काम भक्षक बन कर करते हैं।

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