सोमवार, 22 मार्च 2010

है कोई जो इस पहली को सुलझाए ?

अरे दोस्तों आप तो अचानक ही बड़े परेशां हो गए , भाई  बात ये है की मै आप को एक कहानी बताता हू , अगर आप के पास उस पहली का कोई जवाब है तो जरुर बताना , 
तो  कहानी सुरु होती हैएक शहर से जहा  एक लड़का और एक लड़की अचानक ही मिलते है ,विनय और ऋतू ,दोनों जब मिले तो दोनों ही अपनी पारिवारिक सामाजिक समस्या से  परेशान थे ,विनय ने जब ऋतू को पहली बार देखा तो उसे लगा की ये लड़की उन के जीवन में उन का साथ ईमानदारी से दे सकती है , उसे उस लड़की की  जिंदगी का कुछ भी नहीं पता था ,विनय ऋतू दोनों ही अपने अपने profession  में अच्छे  थे ,विनय ने अपने आप को स्थापित करने के लिए न जाने क्या क्या किया था , उस की मासिक आमदनी कितनी थी उस  ने  कभी  ध्यान  ही  नहीं  दिया  , क्योकि  वो  अपने  साथ  के  दोस्तों  से  बहुत  आगे  जा  चूका  था  , विनय  ने  कभी  भी  नहीं  तो  पैसो  का  दिखावा  करना  पसंद  किया  , ना   ही  कभी  वो अपनी मन की बाते ,दर्द ,कभी किसी को कह पाया , बस चुप हो कर उन बातों के दर्द को अपने सीने  में दबा कर हर किसी से मुस्कुराते हुए ही मिलता था ,ऋतू  ने भी अपने काम के लिए मेहनत कर के वो मुकाम हासिल कर लिया था जो शायद उस के परिवार मे आज तक किसी ने भी हासिल नहीं किया था 
 दोनों जब पहली बार मिले तो दोनों ने ही अपनी जिन्दगी की सब बाते आपस मे बता दी , और अपनी जिन्दगी की शुरुआत एक सच के साथ किया , ऋतू की जिन्दगी मे जो पहले लड़का था उस ने ऋतू को वापस पाने के लिए हार तरह की कोशिश की यहाँ तक की वो ऋतू के घरवालो को भी भड़काने से बाज नहीं आया , ऋतू ने शायद कभी नहीं सोचा था की वो विनय को कभी भी किसी भी मोड  पर कोई दुःख देगी , लेकिन कभी कभी वो बातो ही बातो मे विनय को पैसो के बारे मे कोई बात कहती थी , जो की विनय चुप चाप सुन लेता और कभी भी ऋतू को इस बारे मे नहीं कहता , विनय हमेशा कोशिश करता  की ऋतू को कभी भी किसी भी तरीके की परेशानी ना हो , शायद यही कारण था की उस के लिए ऋतू की पिछली जिन्दगी की कोई भी बात बेमानी थी , अब पहली  ये है की आप  बताओ की  विनय अपने दर्द को कैसे ख़तम करे , या सारी जिन्दगी इस दर्द के साथ रहे , ऋतू को वो कुछ कह सकता नहीं ,ऋतू अपने आप ना जाने कब समझे जी , रिश्ता की इस नाजुक कड़ी को वो एक मजबूत  बंधन  कैसे बनाय?

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