शुक्रवार, 26 मार्च 2010

रिश्तों को तोडती कुछ बात -१

रिश्तों में दरार डालती हुई कुछ बाते यदि हम समझ ले तो शायद  हमारे रिश्ते चाहे कोई भी , किसी भी तरीके का हो कभी भी नहीं टूट सकता , कही बार देखा गया है कि पति और पत्नी दोनों की कामकाजी होते है , अगर दोनों कामकाजी है तो ये जरुरी होगा की दोनों कार्य  छेत्र मे उनके सहयोगी भी होगे , और जब आप किसी के साथ रोजाना बैठते है तो , आप और आप के सहयोगी में एक आत्मीय रिश्ता भी बन जाता है ,जिसे हम दोस्ती कहते है , यहाँ तक सब सही रहता है , रिश्तों  में मुश्किल जब शुरू होती है जब कोई पति या पत्नी अपने जीवन साथी के साथ अपने सहयोगी के सामने बात करे और उन बातों में ये महसूश कर वाने  की कोशिश करे की वो ही घर में ,  profession  में senior  है , उस की ही बात हर समय चलती है , आमतोर पर सभी इन बातों को बहुत हलके रूप में लेते है , लकिन कभी कभी ये बाते अचानक ही किसी भी पक्ष के मन में तीर की तरह चुभ जाती है ,जिसे वो बोल कर नहीं बता सकता लकिन उस के व्यवहार में वो बाते झलकने लगती है , तो मेरे पाठकों , दोस्तों बस एक छोटी सी बात को अपने मन में बसा ले की कभी भी आप अपने सहकर्मियों के सामने अपने पति या पत्नी को बातों में ये अहसाश मजाक में भी नहीं कर वायेगे की वो आप से छोटा  या छोटी है , बस इतना सा करने पर आप अपने ववाहिक जीवन का पूर्ण रूप से खुशी के साथ आनंद ले

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें