सोमवार, 19 अप्रैल 2010

आत्महत्या के कारण जो शोक पैदा होता है - क्या आप उसे जानते है ? -1


पने किसी निकट सम्बंधी को खोने से अत्यधिक दुख और शोक होता है। आत्महत्या के जरिए किसी की मृत्यु होने पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं एव भावनाएं व्यक्त की जाती हैं। आत्महत्या का शोक लम्बे समय तक रहता है। सदमा, सामाजिक अलगाव एवं अपराध-बोध की भावना अक्सर अधिक होती है तथा किसी भी विकल्प के बारे में सोचने से दर्दनाक प्रश्न उभरकर सामने आते हैं।
आप निम्न मे से कुछ अथवा सभी बातों का अनुभ कर सकते हैं:

गहरा सदमा

इस प्रकार की मृत्यु के परिणामस्वरूप सदमे और अविश्वास की भावना बहुत गहरी हो सकती है। इस शोक का एक सामान्य पहलू यह है कि मौत की छवि बार-बार दिमाग में आती है, चाहे आपने इसे अपनी आंखों से न भी देखा हो। लाश को देखना एक और दर्दनाक एवं दिमाग से न मिटने वाली घटना हो सकती है। मौत की इन अत्यधिक डरावनी एवं दर्दनाक छवियों का बार-बार दिमाग में उतरना तथा इनसे उत्पन्न भावनाएं एक स्वाभाविक बात होती है।

मन में प्रश्न उठना - क्यों?

आत्महत्या के जरिए शोक में व्यक्ति अक्सर लम्बे समय तक इस दुखद घटना के स्पष्टीकरण ही ढूंढता रहता है। कई लोग अंततः इस बात को स्वीकार कर लेते हैं कि वे यह कभी नहीं जान पाएंगे कि ऐसा क्यों हुआ। स्पष्टीकरणों को ढूंढने के दौरान उसी परिवार के विभिन्न सदस्यों के इस बारे में अलग-अलग विचार होते हैं कि यह मौत क्यों हुई। यह परिवार के सम्बंधों पर एक बोझ बन सकता है, विशेष रूप से जहां किसी पर दोष लगाने की बात शामिल हो।

मन में प्रश्न उठना - क्या इसे रोका जा सकता था?

यह सामान्य बात है कि दिमाग में प्रश्न उठता रहता है कि अपने प्रियजन की मौत को कैसे रोका जा सकता था और उसके जीवन को कैसे बचाया जा सकता था। अतीत में जाएं तो यह लगता है कि सब कुछ संभव हो सकता था। 'यदि ऐसा करते तो यह नहीं होता'जैसी बातों का कोई अंत नज़र नहीं आता हैं। जो कुछ भी हुआ है, उन घटनाओं को दोहराना इस शोक से उबरने का एक स्वाभाविक और आवश्यक तरीका होता है। इस संबंध में हुए अनुसंधान से पता चला है कि आत्महत्या के कारण शोकसंतप्त लोग, किसी अन्य तरीके से शोकसंपप्त लोगों की तुलना में अधिक अपराध-बोध महसूस करते हैं, स्वयं को दोषी मानते हैं और स्वयं से प्रश्न करते हैं।

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