मंगलवार, 27 अप्रैल 2010

आज का विचार -२ (२७/४/१०)

जो दुःख आने से पहले ही
दुःख मानता है;
वह आवश्यकता से ज्यादा
दुःख उठाता है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें