मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

गीला कागज -२


जब खामोश आँखो से बात होती है
ऐसे ही मोहब्बत की शुरुवात होती है
तुम्हारे ही ख़यालो में खोए रहते हैं
पता नही कब दिन कब रात होती है

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें