गुरुवार, 15 अप्रैल 2010

अमित जैन का शेर



कुछ अजीब फास्लो का जन्म हो रहा है.........
नसीब मेरा जागकर भी सो रहा है..........
कैसे कह दू टूटा दिल धड़कता नही..............
जबकि आज दिल का हर टुकड़ा रो रहा है..............
देखते देखते तू मेरी ज़िंदगी बन गयी......
फिर ना जाने कैसे मेरी बंदगी बन गयी.......
 ओ हमसफर   तू मुझे यु मझधार में छोड....
जाने क्यो बेवफा बन गयी.....

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