रविवार, 2 मई 2010

लतीफ़े

मां- मैं तो तंग हो गई हूं तुमसे। एक के बाद एक गलतियां करते रहते हो। कब सुधरोगे?
बेटा- सुधरने के लिए क्या करना होगा मां?
मां- मम्मी-पापा और टीचर की हर बात माननी होगी।
अगले दिन जब मां कमरे में आई तो बेटे पर नजर पड़ते ही गुस्से से चिल्ला उठी।
मां (डांटते हुए)- किताब के पन्ने क्यों खा रहे हो?
बेटा (मासूमियत से)- सुधरने के लिए मां। तुम्हीं ने तो कहा था सुधरने के लिए टीचर की बात माननी होगी। मैडम ने कहा है, खाते-पीते-सोते बस किताबों में ही लगे रहो। वही तो कर रहा हूं।

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