शनिवार, 31 जुलाई 2010

भगवान के नाम पर

भिखारीः हलो , ताज होटल।
ताज होटल का कर्मचारीः हां जी।
भिखारीः एक बर्गर , एक बिरयानी और एक रसमलाई भेज दो।
ताज होटल का कर्मचारीः किसके नाम से भेजूं सर।
भिखारीः भगवान के नाम पर भेज दो |

लड़की पटाने का शेर -नंबर 15

क्या सोच कर तेरे हुस्न की तामीर की होगी,
क्या सोच कर खुदा ने तुझको बनाया होगा.
बड़ी प्यारी लगी होगी उसको भी तेरी सूरत,
जब जब नक़ाब तेरे रुख़ से हवा ने हटाया होगा.

मत सता लड़की को - जोके

लड़की लड़के से : मत सता लड़की को पाप होगा , तू भी किसी दिन किसी लड़की का बाप होगा।
लड़का लड़की से : भगवान करे तेरा कहा सच्चा हो , जो मुझे बाप कहे वो आपका ही बच्चा हो।

नहीं पता था जानू तुम इतनी जल्दी बदल जाओगे

सोचा था आप की बाहों में सोयेगे , मगर तकिये से काम चलाना पद्फ्ता है ,मुआ ये  pc  न हुआ मेरी सोतन हो गया , और ये तुमहरा  ब्लॉग , तो मेरी जान का दुश्मन हो गया है ,क्यों चिपके रहते हो इस से सारे दिन , पहले कहते थे , मै हू और तुम हो , अब तो ये  pc  रह गया हम बिन , आज इस डिब्बे को गुल न किया तो मेरी २ साडी की जगह एक ही धो देना , 


अरे  अरे भाई डरो मत , अब मै रोज यही सुनता हू , आप भी बताओ क्या ये आप के साथ भी होता है , और इस से बचने का तरीका जरूर बताना

शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

गुम होती प्‍यार की मिठास

एक समय था जब लड़का किसी लड़की को मन की मन महीनों तक प्यार करता रहता था। लेकिन उसे कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था। प्यार तो प्यार ही होता है। लाख छुपाए नहीं छुपता। जिस लड़की को वह चाहता था वह लड़की भी लड़के की भावना को समझ लेती थी, लेकिन कहने से शर्माती थी। आज समय बिलकुल बदल गया है। आज दोनों के पास धैर्य की कमी होती जा रही है। दो दिन निगाहें मिली नहीं कि तीसरे दिन प्‍यार का इजहार हो जाता है । यह इजहार, इजहार न होकर अश्‍लीलता का प्रदर्शन लगता है। यह प्रेम, प्रेम से अधिक शरीर की प्‍यास बुझाने का अवसर लगता है ।
आज की युवा पीढ़ी पहली बार में ही सारे हदें पार कर जाने की सोंच के साथ प्‍यार की पींगें बढ़ाती है । पहले एक लड़का जब एक लड़की से प्यार का इजहार करता था, तो लड़की शर्माकर सिर झुका लेती थी। यदि उसे लड़के का प्यार कबूल भी होता था तो अपने दोनों हाथों की ऊंगलियों से दुपट्टे को लपेटते हुए शर्माकर चली जाती थी। लड़का बेसब्री से दूसरे दिन तक उसके जवाब का इन्तजार करता था। उस इन्तजार में जो मिठास होती थी, उसका स्वाद तो दूर अब उसका अंश भी नहीं दिखता है। करवटे बदलते हुए रात गुजारने के बाद लड़का अपनी जवाब पाने के लिए उत्सुक रहता था। लड़की आती और थोड़ी बातें करने के बाद उसके प्यार को स्वीकार कर लेती थी। फिर दोनों का गला मिलने का सुख मन की मुराद पूरी होने जैसा था। आज कालचक्र ने जिस गति से करवट लिया है, उसमें युवा पीढ़ी को पलक झपकते ही प्यार होता है। वह अपने प्यार का इजहार भी करता और लड़की उसके इजहार को इस तरह लपकती है, जैसे क्रिकेट के मैदान में बल्लेबाज के द्वारा मारे गए शॉट पर उछला गेंद हो। लड़की का प्यार पाकर लड़कों की भी मुराद पुरी होती है। लेकिन यह मुराद उसके मन की नहीं, तन की होती है। पहले जैसे अब प्रेमी-प्रेमिका एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर नहीं चलते, बल्कि कमर से लिपटते, बदन से चिपटते प्‍यार का भोंडा प्रदर्शन करते चलते हैं । उनका प्यार, प्यार के लिए नहीं बल्कि एक-दूसरे का शरीर भोगने के लिए होता है ।
दोनों एक-दूसरे को इस तरह से चुंबन लेते हैं जैसे मीलों पैदल चलने के बाद किसी प्यासे को पानी मिला हो। आज का प्यार और उसके इजहार का तरीका जिस तरीके से अश्‍लील होता जा रहा है, वह सोचने पर मजबूत करती है कि प्‍यार और उसकी मिठास अभी बची भी है या नहीं । शायद यही वजह है कि आजकल के प्रेम विवाह कुछ दिन बाद ही कच्‍चे धागे की तरह टूट रहे हैं । दिल्‍ली जैसे महानगर को तलाक की राजधानी कहा जाने लगा है। प्‍यार की न वह भावना है और न ही वह समर्पण... है तो बस उच्‍छृंखलता, अश्‍लीलता, वासना और एक-दूसरे को जीतने की चाह । जीत लेने के बाद यही प्‍यार फीका लगता है और रिश्‍ते टूट जाते हैं ।

आप सभी के मन में भी इस तरह कुछ न कुछ कभी न कभी आया होगा , यदि हा तो अपनी भावनाओ को अबिव्यक्त भी करे ,

तकरार के बाद करो प्यार का इजहार

लड़ाई करने के बाद आपने भी अपने पति को मनाने की कोशिश जरूर की होगी । वैसे शायद ही ऐसे कोई पति-पत्नी होंगे जिनके बीच छोटी-मोटी नोंक-झों न चलती हो । इतना तो आखिर हर प्यार में जायज है । इन छोटे-छोटे झगड़ो से ही तो असल में प्यार बढ़ता है । आप रूठ जाएंगे, फिर वह आपको मनाएंगे । उनके मनाने की अदा पर ही बई बार न चाहते हुए भी प्यार उमड़ पड़ता है और आप हंस देते हैं । आपको कितना ही गुस्सा आ रहा हो और मन में ठान भी लिया हो कि अब चाहे कुछ भी हो जाए पर इस बार नहीं मानेगें लेकिन क्या करे प्यार है ही ऐसी गजब की चीज कि फिर सारे गिले-शिकवे आप भूल जाते हैं । पर यह लड़ाई बढ़ने नहीं चाहिए नहीं तो आपके रिश्ते में खटास भी पैदा हो सकती है।

कई बार ऐसा होता है कि गलती आपकी नहीं होती और आप यह सोचकर कि मैं माफी क्यूं मांगू जब मेरा कोई कसूर ही नहीं है लड़ाई को और तूल दे देती हैं । पर आप शायद यह नहीं जानती कि गलती न होने पर भी मनाने की आपकी यही अदा उन्हें घायल कर सकती है । कई बार देखने में आया है कि आपस में तकरार बहुत सी बेवजह बातों को लेकर होती है । जैसे जूते गलत जगह उतार दिए, कपड़े कैसे अस्त-व्यस्त रख दिए, रिमोट मुझे चाहिए, मुझे फोन क्यों नहीं किया, आज कहीं जाने का प्लान था तो मना कर दिया वगैरह..वगैरह । लेकिन इन झगड़ो में भी कहीं न कहीं प्यार ही छुपा होता है । यह तो बात हुई छोटे-मोटे झगड़ो से निपटने की । पर अगर कभी आपकी लड़ाई बढ़ जाए तो फिर आप उन्हें कैसे मनाती हैं। मनाने के बहुत से नुस्खे हैं । कोमल कहती हैं कि उनकी शादी को पांच साल हो चुके हैं और ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब वह लड़ते न हों लेकिन फिर वह आपस में जल्दी ही मान भी जाते हैं । हां अगर लड़ाई ज्यादा ही बढ़ जाती है तो फिर वह उस दिन उनका मनपसन्द खाना बनाती हैं । जिसे वह खास अन्दाज में पेश करती हैं । कोई तोहफा देकर उन्‍हें मनाती हैं । वहीं नवविवाहिता सलोनी की शादी को अभी एक ही महीना हुआ है लेकिन उनके पति को अकसर बाहर जाना पड़ता है । ऐसे में सलोनी कोशिश करती हैं कि जब भी उनके पति बाहर जाएं तो वह कुछ ऐसा करें कि उन्हें अपनी पूरी ट्रिप में उनकी याद आती रहे । मसलन उनकी शेविंग किट में बहुत सी चॉकलेट डाल देना, उनके लगेज बैग में कपड़ो के साथ अपनी फोटो रख देना, किसी जगह पर कोई प्यार से लिखा खत डाल देना । शालू कहती हैं जिस दिन उनके पति को गुस्सा आ जाता है उस दिन वह उन्हें सबसे पहले देर से उठाती हैं । उन्हें खूब सोने देती हैं और उठने के बाद बिना नहाए नाश्ता देती हैं । पूरे दिन टीवी का रिमोट उनके हाथ में होता है और अगर वह कोई न्‍यूज चैनल देखते हैं तो वह भी उनके साथ देखने लगती हैं। रात को कहीं बाहर घूमने जाते हैं और डिनर करते हैं ।

रविवार, 25 जुलाई 2010

50/= के नोट से पप्पी तो नहीं , चाटा जरूर मिल गया

अरे भयो आज आपको एक मजेदार किस्सा सुनाता हू , मेरे दोस्त  छगनलाल को टीवी का बहुत शोंक है , बेचारा हर बात को सच समझ लेता है ,एक दिन बेचारे ने  MAC DONAAAALD  का एक विज्ञापन बड़े शौक से देखा , और बड़ा खुश हुआ ,
लड़की की पप्पी और वो भी 50/= में . भाई ने किसी तरह अपने मोहल्ले की कन्या पटी और फिर उसे  MAC D   ले कर चला गया , वह बड़ी ही खुशी से अपनी मेहनत के 100/=  में २ BURGER  खुश होते हुए लिए , बस फिर क्या था , वो तो सपनो में उड़ने लगा , बस अब पप्पी मिलेगी , अब पप्पी मिलेगी , बस अब मिली ,अब मिली , लेकिन लड़की ने शायद वो विज्ञापन नहीं देखा था , वो तो खाने के बाद कड़ी हुई और बोली चलो , हमारे छगनलाल  को गुस्सा आ गया और बोला ,ये क्या हमने तुम्हे 50/= का  BURGER  खिलाया और तुमने पप्पी भी नहीं दी , और ये क्या हमारे छगनलाल को पप्पी तो नहीं ,चाटा जरूर मिल गया , अब आप ही बताए की यहाँ गलती किस की है , छगनलाल की , लड़की की , या MAC -D  की

शनिवार, 24 जुलाई 2010

क्या आप ने चलान भुगता है ?

राहुल भैंस के ऊपर बैठ कर घूम रहा था।
रमेश : तेरा चालान होगा।
राहुलः क्यों ?
रमेशः हेलमेट नहीं पहना है इसीलिए !
राहुलः जरा , नीचे देख , मैं फोर वीलर चला रहा हूं।

शुक्रवार, 23 जुलाई 2010

बडो मह्गो है भाई ये नर्सिंग होम

अरे  भाई आज एक गजब और देख लियो जिंदगी में , अब पूछ भी लो , क्या देख लिया मैंने एस्सा , आज मेरी बीवी की तबियत थोड़ी नासाज हो गई , खुद भी डॉ है , पर नहीं नर्शिंग होम का भूत सवार था , हम ने भी एक मजा ले लिया , कहा खुद को डॉ नहीं बताओ गी तो ही नर्सिंग होम में  check  karauga  बस यही मात खा  गया , अब पहुचे हम कृष्णा नगर के ..............नर्शिंग होम में , वाह जी बड़ी चका चूक सफाई ,जाते ही नंबर आ गया , और डॉ........ ने बड़ी मीठी मीठी बाते कर के तुरंत अपने नुर्शिंग होम में ही   ultra sound  करवाया ,और तुरंत 600/=  झटक लिए   साथ में 500/=  का  injection ,  450/=  की दवाई लिखी , जो उन्होंने अपने नुर्शिंग होम हो चेमिस्ट खोल राखी है , वाही से लेने के लिए कहा ,वो  injection   wholesale market me 125/= और दवाई 225 /=  की थी , बाहर पता करने पर पता चला की यहाँ सब के साथ यही होता है ,

क्या ये सज्जन लूट खसोट नहीं है , क्या कोई गरीब व्यक्ति इस तरीके से इलाज करवा सकता है , क्या गरीबो को जीने का हक नहीं है , हमारी सरकार इस पार्कर के निरंकुश डॉ पर लगाम क्यों नहीं लगाती , उन्हें मनमाफिक फीस और चिकित्सा व्यवसाय में इस तरीके का  profit  पर लगाम लगाती

शनिवार, 17 जुलाई 2010

अरे आज मेरा ब्लॉग मेरी ताजी ताजी बीवी ने पढ़ लिया

अब अपने दिलके उप्पर क्या क्या बिता क्या क्या बताऊ भयो , आज सुबह सुबह मेरा  pc  महाराज खुले रह गए और मेरी किस्मत ही खराब थी की मेरा ब्लोग भी खुला रह गया  था ,कल रत ही अपने मन की भाडास ब्लॉग पर लिख मरी थी , वो उस के हाथो पड गई , यार सुबह से चाय पानी तो दूर की कोड़ी नजर आ रही है , उस ने बात भी बंद कर दी है , और मै एक याचिकाकरता की तरह उस के समक्ष नतमस्तक मुद्रा में सुबह से खड़ा हू , कोई भगवन से प्राथना करो की वो कम से कम एक कप चाय (ठंडी भी चलेगी ) देने की किरपा करे , यार बड़ा मन जलता है जब वो मुझे चिडा चिडा कर चाय के साथ बिस्कुट खा रही है   ,

बाकि शाम को ................

लो जी मैंने भी प्रेम विवाह कर ही लिया

यारो बड़े दिन हो गए कुछ भी नहीं लिखा , कोई बात नहीं निकली मन से , कोई हँसी नहीं आई , कोई मजा नहीं लिया , किसी लड़की को पटाने का कोई तरीका भी नहीं लिखा , किसी को कुछ भी नहीं किया , 
अब  ये तो बता दू मैंने एस्सा क्यों किया , 
अब  क्या बताये भाई , लड़की पटाने का तरीका बताते बताते हम ने भी एक छोरी पसंद कर ली और अपने तरीको में से कुछ बाण उस पर चला दिए , अब क्या करू भयो ,मै तो फसगयो भाई , मेरे को उससे घना ही प्यार हो गयो , फिर के था , घर मे जब बताया तो पहली बार पता चलो की भूकंप किसी कहवे है , क्या क्या गली पड़ी , वाह मजा ही आ गयो . अब उस के घर की बात लोजी , वह का हाल भी यही था , शायद दोनों के घर वाले यो न समझ पायो की अरे तुम ने इन्हें डाक्टरी पड़वा दी ,तो बाल्कन को क्या अपने अछे बुरे की समझ न आवेगी , पर नहीं हिटलर फिर जिन्दा हो गया , कोई बात न , हम भी लगे रहे अपने काम में और २ दिन में ही सारा इंतजाम कर के शादी कर ही ली ,इस विवाह में हमारा साथ दिया हमारे ५ परम मित्रों ने ,
आज एक हरयान्वी भाई से मुलाकात हुई थी , तो मैंने सोचा क्यों न कुछ कुछ इस मीठी सी भाषा में लिख दू , कैसी लगी महारी हरयान्वी , अभी नयो नयो हू , कही न कही गलती हो गयी हो तो , उसे मत सोच्यो

शुक्रवार, 16 जुलाई 2010

क्या आप को भगवन का भरोसा है ?

पंडित जी : भगवान , अगर तुम मुझे 100 रुपये दो , तो 50 रुपये मैं मंदिर में दूंगा।
थोड़ी दूर जाने के बाद पंडित को 50 रुपये का नोट मिल गया।
पंडित डी : वाह भगवान , इतना भी भरोसा नहीं , अपने पैसे पहले ही काट लिए

सोमवार, 12 जुलाई 2010

म्हारी ताई ने देखी पिक्चर - कुकर यो भी जान लो

एक बार इक ताई पिक्चर देखन गई तो फिर एक छोरे ने पूछा , रे ताई पिकचर देख आई कै ?
ताई बोली
, रे छोरे के बताउ थारे को..
छोरा बोला , के बात होली ताई ?
ताई बोली , बात के हॉणी हे.. जब मैं फिलम देखण लगी तो फिलम में मेरे जेठ जेसे एक मरद था। फिर के होणा था सारी फिलम में घुघट काढ़ कर बेठी रई।

खुशी अनलिमिटेड है जी -आप भी शरीक हो सकते हो

पत्नी - मैं बचूंगी नही मर जाऊंगी ...


पति - मैं भी मर जाऊंगा !

पत्नी - मैं तो बीमार हूं इसलिए मर जाऊंगी। तुम क्यों मरोगे ?

पति - मैं इतनी खुशी बर्दाश्त नही कर सकता !

लायक कौन - आप भी बताओ

संता : आपके तीन लड़के तो बड़े लायक है
! एक इंजीनियर हैं , एक डॉक्टर है , एक वकील है पर आपका चौथा लड़का इतना नालायक है कि गोलगप्पों की रेहड़ी लगाता है !
मुन्नीलाल : अरे आहिस्ता बोलो ! कहीं वह नाराज़ हो जाए ! घर का सारा खर्चा वही चला रहा है !

सेकंड लैंग्वेज- सीख कर तो देखो

चूहों की फैमिली के आगे बड़ी सी
बिल्ली
गई। चूहों के फादर ने छलांग लगाई और कहा : भौं भौं ! बिल्ली दुम दबाकर भाग गई।
चूहे का बेटा बोला : डैड ! ये क्या था ...?
डैड : बेटे ये होता है सेकंड लैंग्वेज सीखने का फायदा !